संदर्भ
केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) में प्रस्तावित संशोधनों का प्रारूप प्रकाशित किया।
संबंधित तथ्य
- भारत ने ऐतिहासिक रूप से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) तथा लक्षित कल्याणकारी कार्यक्रमों जैसी योजनाओं के माध्यम से भुखमरी की समस्या का समाधान करने का प्रयास किया है।
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) को वर्ष 2013 में खाद्य सुरक्षा के लिए अधिकार-आधारित ढाँचा प्रदान करने हेतु अधिनियमित किया गया था।
- इसे खाद्य अधिकार अधिनियम (Right to Food Act) के नाम से भी जाना जाता है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 के बारे में
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 एक ऐतिहासिक कल्याणकारी कानून है, जिसका उद्देश्य उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण खाद्य की पर्याप्त मात्रा तक पहुँच सुनिश्चित करके खाद्य एवं पोषण सुरक्षा प्रदान करना है। इसने खाद्य सुरक्षा को एक सरकारी कल्याणकारी कार्यक्रम से परिवर्तित कर एक वैधानिक अधिकार बना दिया।
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 के उद्देश्य
- खाद्य सुरक्षा: समाज के कमजोर वर्गों के लिए पर्याप्त खाद्यान्न की उपलब्धता तथा आवश्यक खाद्य पदार्थों तक किफायती पहुँच सुनिश्चित करना।
- पोषण सुरक्षा: महिलाओं, बच्चों तथा गरीब परिवारों के पोषण स्तर में सुधार करना तथा भूख एवं कुपोषण का समाधान करना।
- अधिकार-आधारित दृष्टिकोण: रियायती खाद्यान्न तक पहुँच को वैधानिक अधिकार बनाना तथा इसके क्रियान्वयन हेतु जवाबदेही तंत्र स्थापित करना।
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 के अंतर्गत कवरेज
- कवरेज: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 के अंतर्गत ग्रामीण जनसंख्या के 75% तथा शहरी जनसंख्या के 50% को कवर किया जाता है, जिससे भारत की लगभग दो-तिहाई जनसंख्या लाभान्वित होती है।
- लाभार्थियों की श्रेणियाँ
- अंत्योदय अन्न योजना (AAY) परिवार: अंत्योदय अन्न योजना (AAY) सबसे गरीब परिवारों को कवर करती है तथा प्रति परिवार प्रति माह 35 किलोग्राम खाद्यान्न उपलब्ध कराती है।
- प्राथमिक परिवार (PHH): अन्य पात्र कमजोर परिवारों को कवर करती है तथा प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलोग्राम खाद्यान्न उपलब्ध कराती है।
- महिलाओं एवं बच्चों के लिए पोषण सहायता: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) तथा मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) कार्यक्रमों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं तथा बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराता है, साथ ही ₹6,000 का मातृत्व लाभ भी प्रदान करता है।
- महिला सशक्तीकरण प्रावधान: परिवार की सबसे वरिष्ठ महिला (जिसकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक हो) को राशन कार्ड जारी करने के लिए परिवार का मुखिया नामित किया जाता है।
- शिकायत निवारण तंत्र: अधिनियम निम्नलिखित का प्रावधान करता है—
- राज्य खाद्य आयोग
- जिला-स्तरीय शिकायत निवारण तंत्र
- क्रियान्वयन की निगरानी।
नया प्रस्तावित संशोधन क्या है?
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 की धारा 3 में एक नया प्रावधान प्रस्तावित किया गया है, जिसके अनुसार अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के अंतर्गत आने वाले परिवार के प्रत्येक सदस्य को प्रति माह 7 किलोग्राम खाद्यान्न प्राप्त करने का अधिकार होगा, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति परिवार 35 किलोग्राम होगी।
- अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के राशन कार्डधारकों के लिए यह खाद्यान्न पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। पूर्व में, अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के अंतर्गत परिवार में सदस्यों की संख्या की परवाह किए बिना प्रति परिवार 35 किलोग्राम खाद्यान्न प्रदान किया जाता था।
NFSA में प्रस्तावित संशोधन (AAY पात्रता में परिवर्तन) का कारण
- वर्तमान समस्या: AAY के अंतर्गत परिवार-आधारित पात्रता लाभार्थियों के बीच असमानता उत्पन्न करती है।
- प्रति-व्यक्ति असमानता
- छोटे परिवारों को प्रति व्यक्ति अधिक मात्रा में खाद्यान्न प्राप्त होता है।
- बड़े परिवारों को प्रति व्यक्ति कम खाद्यान्न पात्रता प्राप्त होती है, जो कई बार प्राथमिकता परिवार (PHH) के स्तर से भी कम होती है।
- सरकार का उद्देश्य
- AAY के लाभार्थियों के भीतर मौजूद आंतरिक असमानताओं को समाप्त करना।
- खाद्यान्न का अधिक तर्कसंगत आवंटन सुनिश्चित करना।
- परिवार के आकार के बजाय पोषण संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप खाद्यान्न पात्रता को निर्धारित करना।
NFSA में प्रस्तावित संशोधन (AAY पात्रता में परिवर्तन) की आलोचना
- लाभों में कमी
- आलोचकों का तर्क है कि प्रति परिवार 35 किलोग्राम की पात्रता में परिवर्तन से AAY के कमजोर परिवारों को मिलने वाले खाद्यान्न के आवंटन में कमी आ सकती है।
- राज्यों की चिंताएँ
- कुछ राज्यों ने इस संशोधन का विरोध किया है।
- केरल सरकार ने तर्क दिया है कि AAY के अंतर्गत वर्तमान प्रति परिवार 35 किलोग्राम की व्यवस्था को जारी रखा जाना चाहिए।
- इससे केरल जैसे राज्यों को मिलने वाले खाद्यान्न के आवंटन में कमी आ सकती है।
- उत्तर–दक्षिण विभाजन की चिंता
- कार्यकर्ताओं का तर्क है कि यह संशोधन क्षेत्रीय असंतुलन उत्पन्न कर सकता है।
- दक्षिणी राज्यों में सामान्यतः परिवारों का आकार छोटा होता है, इसलिए वहाँ के परिवारों को उत्तरी राज्यों के बड़े परिवारों की तुलना में कम आवंटन प्राप्त हो सकता है।
- जनगणना में विलंब का मुद्दा
- जनगणना में विलंब के कारण AAY के लाभार्थियों की संख्या का पुनरीक्षण नहीं किया गया है।
- कई पात्र गरीब परिवार अभी भी NFSA के लाभों से वंचित हो सकते हैं।
- अधिक पात्रता की माँग
- राइट टू फूड कैंपेन के कार्यकर्ता वर्तमान लाभों में कमी करने के बजाय प्रति व्यक्ति 14 किलोग्राम खाद्यान्न आवंटित करने की माँग कर रहे हैं।
- पोषण संबंधी चिंताएँ
- आलोचकों का तर्क है कि यदि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा अनुशंसित पोषण संबंधी आवश्यकताओं के आधार पर आवंटन किया जाता है, तो लाभार्थियों को दालें तथा खाद्य तेल भी उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 का महत्त्व
- खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करना
- भुखमरी से संरक्षण: समाज के कमजोर वर्गों को खाद्य असुरक्षा और भुखमरी से सुरक्षा प्रदान करता है।
- नियमित खाद्य आपूर्ति: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से आवश्यक खाद्यान्न तक किफायती पहुँच सुनिश्चित करता है।
- सामाजिक न्याय को बढ़ावा
- गरीब परिवारों को सहायता: आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों को खाद्य सहायता प्रदान करता है।
- असमानता में कमी: समाज के कमजोर और संपन्न वर्गों के बीच की खाई को कम करने में सहायता करता है।
- मानव विकास
- बेहतर पोषण: खाद्य उपलब्धता सुनिश्चित करके स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी परिणामों में सुधार करता है।
- महिलाओं और बच्चों का कल्याण: गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं तथा बच्चों के लिए विशेष प्रावधान प्रदान करता है।
- संवैधानिक संबंध
- अनुच्छेद-21 – जीवन और गरिमा का अधिकार: खाद्य सुरक्षा का संबंध गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार से है।
- अनुच्छेद-39(b) – संसाधनों का न्यायसंगत वितरण: लोक कल्याण के लिए संसाधनों तक समान पहुँच को बढ़ावा देता है।
- अनुच्छेद-47 – पोषण स्तर एवं लोक स्वास्थ्य में सुधार: पोषण स्तर बढ़ाने और लोक स्वास्थ्य में सुधार करने के राज्य के दायित्व का समर्थन करता है।
- महिला सशक्तीकरण
- परिवार की मुखिया के रूप में महिला: NFSA राशन कार्ड जारी करने के उद्देश्य से परिवार की सबसे वरिष्ठ महिला को परिवार का मुखिया मानकर महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देता है।
- निर्णय लेने में अधिक भूमिका: खाद्य तक पहुँच और परिवार के कल्याण से जुड़े निर्णयों में महिलाओं की भूमिका को सशक्त बनाता है।
- वैधानिक अधिकार आधारित दृष्टिकोण
- अधिकार-आधारित ढाँचा: खाद्य सहायता को एक कल्याणकारी योजना से वैधानिक अधिकार में परिवर्तित करता है।
- जवाबदेही तंत्र: लाभार्थियों को अपने खाद्य अधिकारों की माँग करने तथा शिकायत निवारण प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।
- संकट के समय सहायता
- खाद्य सुरक्षा कवच: आर्थिक झटकों, बेरोजगारी, आपदाओं तथा आपात स्थितियों के दौरान सुरक्षा प्रदान करता है।
- अत्यधिक गरीबी की रोकथाम: कमजोर परिवारों को न्यूनतम खाद्य उपभोग बनाए रखने में सहायता करता है।
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को सुदृढ़ करना
- बेहतर वितरण: पारदर्शिता, डिजिटलीकरण तथा राशन वितरण की बेहतर निगरानी जैसे सुधारों को प्रोत्साहित करता है।
- लक्षित लाभ: सब्सिडीयुक्त खाद्यान्न को प्राथमिकता एवं कमजोर परिवारों तक पहुँचाना सुनिश्चित करता है।
NFSA की चुनौतियाँ
- लाभार्थियों की पहचान संबंधी समस्याएँ
- पुराने अभिलेखों तथा राशन कार्ड डेटाबेस में त्रुटियों के कारण लाभार्थियों की सटीक पहचान एक प्रमुख चुनौती बनी हुई है।
- कई पात्र गरीब परिवार लाभों से वंचित रह जाते हैं, जबकि कुछ अपात्र परिवार लाभ प्राप्त करते रहते हैं।
- PDS में भ्रष्टाचार
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में खाद्यान्न की हेराफेरी, भ्रष्टाचार तथा वितरण संबंधी अनियमितताएँ प्रमुख चुनौतियाँ हैं।
- खरीद, भंडारण तथा परिवहन के विभिन्न चरणों में कमजोर निगरानी अंतिम लक्ष्य तक वितरण को प्रभावित करती है।
- पोषण संबंधी सीमाएँ
- NFSA मुख्यतः चावल एवं गेहूँ जैसे अनाजों की उपलब्धता पर केंद्रित है, जिससे संपूर्ण पोषण के बजाय कैलोरी सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
- दालों, प्रोटीन, खाद्य तेल तथा सूक्ष्म पोषक तत्त्वों से युक्त खाद्य पदार्थों की सीमित उपलब्धता पोषण सुरक्षा पर इसके प्रभाव को कम करती है।
- राजकोषीय भार
- NFSA के अंतर्गत दी जाने वाली खाद्य सब्सिडी पर सरकार का अत्यधिक व्यय होता है, जिससे सार्वजनिक वित्त पर दबाव पड़ता है।
- किफायती खाद्य उपलब्धता बनाए रखते हुए राजकोषीय स्थिरता सुनिश्चित करना एक नीतिगत चुनौती बनी हुई है।
- आँकड़ों एवं कवरेज संबंधी समस्याएँ
- जनगणना में विलंब तथा लाभार्थी डेटाबेस के अद्यतन में देरी से लाभार्थियों की सटीक पहचान प्रभावित होती है।
- जनसंख्या वृद्धि तथा प्रवास के कारण वास्तविक आवश्यकता और आधिकारिक कवरेज के मध्य अंतर उत्पन्न हो जाता है।
- भंडारण एवं आपूर्ति शृंखला संबंधी चुनौतियाँ
- अपर्याप्त भंडारण क्षमता, गोदामों की खराब स्थिति तथा परिवहन संबंधी समस्याओं के कारण खाद्यान्न की हानि होती है।
- दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में खाद्य आपूर्ति पहुँचने में अक्सर विलंब होता है।
- कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियाँ
- NFSA की प्रभावशीलता विभिन्न राज्यों में प्रशासनिक क्षमता एवं अवसंरचना के अंतर के कारण भिन्न-भिन्न है।
- कमजोर शिकायत निवारण तंत्र लाभार्थियों को उनके वैधानिक अधिकारों तक पहुँचने से वंचित कर सकता है।
- गुणवत्ता एवं निगरानी संबंधी समस्याएँ
- खाद्यान्न की खराब गुणवत्ता संबंधी शिकायतें योजना की समग्र प्रभावशीलता को प्रभावित करती हैं।
- नियमित निरीक्षण तथा जवाबदेही तंत्र के अभाव से पारदर्शिता में कमी आती है।
आगे की राह
- लाभार्थी डेटाबेस का अद्यतन
- पात्र परिवारों को शामिल करने के लिए राशन कार्ड सूचियों का विश्वसनीय जनसांख्यिकीय आँकड़ों के आधार पर नियमित अद्यतन आवश्यक है।
- गतिशील डेटाबेस प्रवास तथा जनसंख्या वृद्धि के कारण होने वाले परिवर्तनों का समाधान कर सकते हैं।
- प्रौद्योगिकी-आधारित PDS सुधारों को सुदृढ़ करना
- डिजिटलीकरण, e-POS मशीनों, ऑनलाइन ट्रैकिंग तथा पारदर्शिता पोर्टलों के व्यापक उपयोग से वितरण व्यवस्था में सुधार किया जा सकता है।
- प्रौद्योगिकी रिसाव को कम कर सकती है तथा यह सुनिश्चित कर सकती है कि लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुँचें।
- पारदर्शिता के माध्यम से भ्रष्टाचार में कमी
- सामाजिक अंकेक्षण, सामुदायिक निगरानी तथा आपूर्ति शृंखला ट्रैकिंग को सुदृढ़ करके जवाबदेही में सुधार किया जा सकता है।
- भ्रष्टाचार के विरुद्ध कठोर कार्रवाई खाद्य अधिकारों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
- खाद्य सुरक्षा से पोषण सुरक्षा की ओर परिवर्तन
- नीतिगत ध्यान केवल कैलोरी उपलब्ध कराने के बजाय संतुलित एवं स्वस्थ आहार सुनिश्चित करने पर केंद्रित होना चाहिए।
- कुपोषण से निपटने के लिए विविध प्रकार के खाद्य पदार्थों को शामिल करना आवश्यक है।
- खाद्य बास्केट का विविधीकरण
- दालों, मोटे अनाजों, खाद्य तेलों तथा प्रोटीन-समृद्ध खाद्य पदार्थों को शामिल करने से पोषण संबंधी परिणामों में सुधार किया जा सकता है।
- स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने से प्रणाली अधिक सतत् बन सकती है।
- भंडारण एवं लॉजिस्टिक्स में सुधार
- आधुनिक गोदामों, शीत भंडारण तथा कुशल परिवहन प्रणालियों में निवेश से अपव्यय को कम किया जा सकता है।
- बेहतर अवसंरचना खाद्यान्न की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।
- सुशासन एवं समन्वय में सुधार
- प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केंद्र, राज्यों तथा स्थानीय निकायों के मध्य मजबूत समन्वय आवश्यक है।
- बेहतर शिकायत निवारण तंत्र लाभार्थियों के अधिकारों को सुदृढ़ कर सकते हैं।
- सतत् खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना
- भविष्य के सुधारों में सामाजिक कल्याण, पोषण संबंधी आवश्यकताओं तथा राजकोषीय स्थिरता के मध्य संतुलन स्थापित किया जाना चाहिए।
- दीर्घकालिक दृष्टिकोण में खाद्य सुरक्षा को कृषि सुधारों तथा सुदृढ़ खाद्य प्रणालियों के साथ जोड़ा जाना चाहिए।