संक्षेप में समाचार

20 Jun 2026

फास्ट एक्स-रे ट्रांजिएंट (FXT) 

खगोलविदों ने दुर्लभ फास्ट एक्स-रे ट्रांजिएंट (FXT) EP241107a का स्रोत एक शक्तिशाली विस्फोट को बताया है, जो संभवतः किसी विशाल तारे के पतन अथवा दो न्यूट्रॉन तारों के विलय के कारण उत्पन्न हुआ था।

EP241107a के बारे में

  • EP241107a नवंबर 2024 में खोजा गया एक दुर्लभ फास्ट एक्स-रे ट्रांजिएंट (Fast X-ray Transient – FXT) है, जिसकी विशेषता अल्प अवधि में उत्पन्न होने वाला अत्यंत शक्तिशाली एक्स-रे विस्फोट है।
  • आइंस्टीन प्रोब द्वारा खोज: इसका पता सर्वप्रथम आइंस्टीन प्रोब द्वारा लगाया गया, जो क्षणिक उच्च-ऊर्जा ब्रह्मांडीय घटनाओं की खोज हेतु समर्पित उपग्रह है।
  • संभावित उत्पत्ति: वैज्ञानिकों के अनुसार इसकी उत्पत्ति निम्नलिखित में से किसी एक घटना से हुई हो सकती है—
    • किसी विशाल तारे का पतन, अथवा
    • दो न्यूट्रॉन तारों का विलय।
  • संभावित ‘ऑर्फन आफ्टरग्लो’ (Orphan Afterglow): यद्यपि कोई गामा-किरण विस्फोट (GRB) प्रत्यक्ष रूप से दर्ज नहीं किया गया था, फिर भी वैज्ञानिक इसे एक संभावित “ऑर्फन आफ्टरग्लो” के रूप में वर्गीकृत करते हैं। इसका अर्थ यह है कि यह एक ऐसे GRB की पश्चदीप्ति है, जिसकी मुख्य गामा-किरण उत्सर्जन घटना सीधे दिखाई नहीं दी थी।
  • बहु-तरंगदैर्ध्य अवलोकन: इसका अध्ययन भारत, अमेरिका, चिली तथा हवाई स्थित वेधशालाओं द्वारा रेडियो, ऑप्टिकल तथा एक्स-रे अवलोकनों के माध्यम से किया गया।
  • भारतीय योगदान: अवलोकनों में भारत की निम्नलिखित सुविधाएँ सम्मिलित थीं—
    • इंडियन एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेटरी
    • हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप
    • ग्रोथ इंडिया टेलीस्कोप
    • उन्नत जायंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (uGMRT)।
  • वैज्ञानिक महत्त्व: यह खोज फास्ट एक्स-रे ट्रांजिएंट्स (FXTs) और गामा-किरण विस्फोटों (GRBs) के मध्य संबंध को समझने के लिए महत्त्वपूर्ण साक्ष्य प्रदान करती है तथा ब्रह्मांड में होने वाले सर्वाधिक ऊर्जावान विस्फोटों की प्रकृति को समझने में सहायता करती है।

फास्ट एक्स-रे ट्रांजिएंट्स (FXTs) क्या हैं?

  • फास्ट एक्स-रे ट्रांजिएंट्स (Fast X-ray Transients – FXTs) दुर्लभ, अत्यधिक ऊर्जावान तथा अल्पकालिक एक्स-रे विस्फोट हैं, जो ब्रह्मांड में घटित होने वाली हिंसक खगोलीय घटनाओं से उत्पन्न होते हैं।
  • विशेषताएँ 
    • ये सामान्यतः कुछ मिनटों से लेकर कुछ घंटों तक बने रहते हैं और उसके बाद तीव्र गति से क्षीण हो जाते हैं, जिससे इनका अवलोकन करना कठिन हो जाता है।
    • सामान्य एक्स-रे स्रोतों के विपरीत, FXTs प्रायः पुनरावृत्तिहीन एवं अप्रत्याशित होते हैं; ये अचानक प्रकट होते हैं और शीघ्र ही विलुप्त हो जाते हैं।
  • उत्पत्ति: FXTs का संबंध गामा-किरण विस्फोटों (GRBs), सुपरनोवा विस्फोटों, न्यूट्रॉन तारों के विलय तथा ब्लैक होल से संबंधित घटनाओं जैसी खगोलीय परिघटनाओं से माना जाता है।
  • वैज्ञानिक महत्त्व: ये ब्रह्मांड में होने वाले सर्वाधिक चरम विस्फोटों तथा उच्च-ऊर्जा खगोलीय प्रक्रियाओं को समझने के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।

INS दुनागिरि, INS संशोधक और INS अग्रय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वदेशी रूप से निर्मित तीन नौसैनिक मंचों—INS दुनागिरि, INS संशोधक और INS अग्रय—को भारतीय नौसेना में शामिल किया, जिससे भारत की समुद्री सुरक्षा तथा स्वदेशी जहाज निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को और सुदृढ़ता मिली।

INS दुनागिरि के बारे में

  • INS दुनागिरि भारतीय नौसेना का प्रोजेक्ट 17A (नीलगिरि श्रेणी) का पाँचवाँ स्टील्थ फ्रिगेट है।
  • विकसितकर्ता: इसका अभिकल्पन भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो (Warship Design Bureau) द्वारा किया गया है तथा इसका निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता द्वारा किया गया है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • बहु-भूमिका युद्ध क्षमता: यह एक साथ वायु, सतही एवं पनडुब्बी-रोधी युद्ध अभियानों का संचालन करने में सक्षम है।
    • उन्नत आयुध: यह ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों तथा मध्यम दूरी सतह-से-वायु में मार करने वाली मिसाइल (MRSAM) प्रणाली से सुसज्जित है।
    • स्टील्थ डिजाइन: इसमें रडार की कम पहचान तथा शत्रुतापूर्ण परिस्थितियों में बेहतर कार्य करने की क्षमता उपलब्ध है।
  • महत्त्व: यह भारत की ब्लू-वॉटर नौसैनिक क्षमता तथा समुद्री प्रतिरोधक शक्ति को सुदृढ़ करता है।

INS संशोधक के बारे में

  • INS संशोधक हाइड्रोग्राफिक एवं ओशनोग्राफिक अभियानों के लिए अभिकल्पित चौथा सर्वे पोत (बड़ा) है।
  • विकसितकर्ता: इसका अभिकल्पन एवं निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता द्वारा स्वदेशी रूप से किया गया है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • हाइड्रोग्राफिक सर्वे: यह तटीय तथा गहरे समुद्री क्षेत्रों में समुद्र-तल मानचित्रण एवं नौवहन सर्वेक्षण संचालित करता है।
    • उन्नत सर्वेक्षण प्रणालियाँ: यह स्वायत्त जलमग्न वाहनों (AUVs) तथा दूरस्थ संचालित वाहनों (ROVs) से सुसज्जित है।
    • वैज्ञानिक आँकड़ा संग्रहण: यह रक्षा एवं नागरिक उपयोगों के लिए ओशनोग्राफिक तथा भू-भौतिकीय आँकड़ों का संग्रह करता है।
  • महत्त्व: यह समुद्री क्षेत्र जागरूकता, नौवहन सुरक्षा तथा वैज्ञानिक अनुसंधान क्षमताओं को सुदृढ़ बनाता है।

INS अग्रय के बारे में

  • INS अग्रय अर्नाला श्रेणी का चौथा पनडुब्बी-रोधी युद्ध उथले जल पोत [Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft (ASW-SWC)] है।
  • विकसितकर्ता: इसका निर्माण भारतीय नौसेना के तटीय रक्षा आधुनिकीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा स्वदेशी रूप से किया गया है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • पनडुब्बी-रोधी युद्ध क्षमता: इसे उथले समुद्री क्षेत्रों में जलमग्न खतरों की पहचान, निगरानी एवं निष्प्रभावीकरण के लिए अभिकल्पित किया गया है।
    • स्वदेशी आयुध प्रणालियाँ: यह हल्के टॉरपीडो तथा स्वदेशी रॉकेट प्रक्षेपकों से सुसज्जित है।
    • उन्नत सेंसर: इसमें आधुनिक उथले जल सोनार (SONAR) प्रणालियाँ तथा वॉटरजेट प्रणोदन प्रणाली उपलब्ध है।
  • महत्त्व: यह तटीय सुरक्षा, तटीय युद्ध क्षमता तथा पनडुब्बी-रोधी रक्षा तैयारियों को सुदृढ़ करता है।

इन तीनों नौसैनिक मंचों में 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इनके निर्माण में 200 से अधिक MSMEs की भागीदारी रही है। ये आत्मनिर्भर भारत तथा रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण के उद्देश्यों का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

भारत की प्रथम वाणिज्यिक स्तर की कोयला-से-अमोनियम नाइट्रेट परियोजना 

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हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले के लखनपुर में भारत की प्रथम वाणिज्यिक स्तर की कोयला-से-अमोनियम नाइट्रेट परियोजना की आधारशिला रखी।

लखनपुर परियोजना के बारे में

  • यह अमोनियम नाइट्रेट के उत्पादन हेतु भारत की प्रथम वाणिज्यिक स्तर की कोयला गैसीकरण सुविधा है।
    • इसका विकास महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) की 350 एकड़ भूमि पर किया जाएगा।
  • कार्यान्वयन एजेंसी: इस परियोजना का विकास भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड (BCGCL) द्वारा किया जा रहा है, जो भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) और कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) का संयुक्त उद्यम है।
  • निवेश एवं सरकारी सहायता: इस परियोजना में ₹25,016 करोड़ का निवेश किया जाएगा, जिसमें कोयला गैसीकरण प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत कोयला मंत्रालय द्वारा ₹1,350 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
  • क्षमता एवं प्रौद्योगिकी: यह संयंत्र प्रति दिन 2,000 टन (0.66 MTPA) तकनीकी-ग्रेड अमोनियम नाइट्रेट का उत्पादन करेगा। इसमें BHEL द्वारा विकसित स्वदेशी दाबित द्रवित-परत गैसीकरण (PFBG) प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाएगा, जो उच्च राख युक्त भारतीय कोयले के लिए उपयुक्त है।
  • महत्त्व: यह परियोजना स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने, महत्त्वपूर्ण कच्चे माल के आयात पर निर्भरता कम करने, तथा आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप भारत के विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने का लक्ष्य रखती है। साथ ही, यह भविष्य की कोयला गैसीकरण परियोजनाओं के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में कार्य करेगी।

कोयला गैसीकरण के बारे में

  • कोयला गैसीकरण (Coal Gasification) वह प्रक्रिया है, जिसमें कोयले को नियंत्रित मात्रा में ऑक्सीजन (या वायु), भाप (Steam) तथा ऊष्मा के साथ उच्च तापमान एवं दाब पर अभिक्रिया कर सिंथेसिस गैस (सिनगैस) में परिवर्तित किया जाता है।
  • सिनगैस की संरचना: सिनगैस मुख्यतः कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और हाइड्रोजन (H) गैसों से मिलकर बनती है।
  • उत्पाद:  सिंगैस का उपयोग मेथेनॉल, अमोनिया, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट, सिंथेटिक प्राकृतिक गैस (SNG) तथा अन्य रासायनिक फीडस्टॉक उत्पादों के निर्माण में किया जा सकता है।

कोयला-से-अमोनियम नाइट्रेट प्रक्रिया

  • कोयला गैसीकरण: कोयले को सिंथेसिस गैस (सिनगैस) में परिवर्तित किया जाता है।
  • अमोनिया उत्पादन: सिनगैस को संसाधित कर अमोनिया का उत्पादन किया जाता है।
  • नाइट्रिक अम्ल उत्पादन: अमोनिया के एक भाग का ऑक्सीकरण कर नाइट्रिक अम्ल बनाया जाता है।
  • अमोनियम नाइट्रेट उत्पादन: नाइट्रिक अम्ल की अमोनिया के साथ अभिक्रिया कर अमोनियम नाइट्रेट का उत्पादन किया जाता है।

भारत की कोयला स्थिति

  • वैश्विक रैंकिंग: भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक एवं उपभोक्ता देश है।
  • कोयला भंडार: भारत के पास विश्व का पाँचवाँ सबसे बड़ा कोयला भंडार है, जिसका अनुमान 400 अरब टन से अधिक है।
  • सबसे बड़ा कोयला उत्पादक: कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) विश्व की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी है।
  • लक्ष्य: कोयला मंत्रालय ने वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन (MT) कोयला गैसीकरण प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क (CPF) 

विश्व बैंक ने भारत के लिए 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर के विकास नीति वित्तपोषण (Development Policy Financing – DPF) को स्वीकृति प्रदान की है, जिससे 1.1 करोड़ (11 मिलियन) युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।

  • यह वित्तपोषण विश्व बैंक के साथ भारत के वर्ष 2031 तक के कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क (Country Partnership Framework – CPF) के अनुरूप भी है।

कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क (CPF)

  • कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क (CPF) विश्व बैंक समूह का एक रणनीतिक रोडमैप है, जिसका उद्देश्य किसी सदस्य देश की विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप अपने सहयोग को संरेखित करना है।
  • मुख्य उद्देश्य: यह विश्व बैंक के हस्तक्षेपों को राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों तथा गरीबी उन्मूलन रणनीतियों के साथ संरेखित करता है।
  • साक्ष्य-आधारित योजना: यह सिस्टमैटिक कंट्री डायग्नोस्टिक (SCD) पर आधारित होता है, जो किसी देश की प्रमुख विकासात्मक चुनौतियों एवं अवसरों की पहचान करता है।
  • वित्तीय सहायता
    • विकास नीति वित्तपोषण (DPF): नीतिगत एवं संस्थागत सुधारों के लिए त्वरित बजटीय सहायता प्रदान करता है।
    • निवेश परियोजना वित्तपोषण: अवसंरचना, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा सामाजिक विकास परियोजनाओं को समर्थन प्रदान करता है।
    • निजी क्षेत्र वित्तपोषण: अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम (IFC) तथा विश्व बैंक समूह की अन्य संस्थाओं के माध्यम से निजी पूँजी को आकर्षित करता है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • सतत् एवं समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है।
    • निजी क्षेत्र की भागीदारी एवं निवेश को प्रोत्साहित करता है।
    • जलवायु अनुकूलन क्षमता, सुशासन सुधार तथा मानव पूँजी विकास का समर्थन करता है।
    • वित्तीय सहायता, तकनीकी सहयोग तथा नीतिगत परामर्श सेवाओं का समन्वित उपयोग करता है।

भारत के लिए कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क (CPF)

  • कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क (CPF), विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु समावेशी एवं सतत् विकास को समर्थन देने के लिए विश्व बैंक समूह का रणनीतिक ढाँचा है।
  • अवधि: वर्तमान CPF वित्तीय वर्ष 2026–2031 की अवधि को कवर करता है।
    • यह वित्तीय वर्ष 2018–2022 के पूर्ववर्ती CPF का स्थान लिया है।
  • वित्तीय सहायता पैकेज: विश्व बैंक समूह ऋण, निवेश एवं परामर्श सेवाओं के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 8–10 बिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता प्रदान करने की योजना रखता है।
  • प्रमुख लक्ष्य
    • ग्रामीण समृद्धि को बढ़ावा देना: कृषि आय में विविधता लाना, बाजार तक पहुँच में सुधार करना तथा जल संसाधन प्रबंधन को सुदृढ़ करना।
    • शहरी परिवर्तन को समर्थन देना: सतत् शहरीकरण, आवास, अवसंरचना तथा नगर वित्तपोषण को प्रोत्साहित करना।
    • मानव पूँजी में निवेश: स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, कौशल विकास तथा कार्यबल भागीदारी को बढ़ाना, विशेष रूप से युवाओं एवं महिलाओं के लिए।
    • ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना: नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, ई-मोबिलिटी तथा रेजिलिएंट अवसंरचना का विस्तार करना।
  • महत्त्व: CPF का उद्देश्य निजी क्षेत्र-नेतृत्व वाली, रोजगार-सृजनकारी आर्थिक वृद्धि को तेज करना, जीवन की सुगमता (Ease of Living) में सुधार करना, जलवायु प्रत्यास्थता को सुदृढ़ करना तथा भारत के एक उच्च-मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्था बनने की ओर संक्रमण को समर्थन देना और विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करना है।

प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) के अंतर्गत ₹2,400 करोड़ की राशि वितरित की, जिसका उद्देश्य प्रथम बार रोजगार प्राप्त करने वाले युवाओं को सहायता प्रदान करना, रोजगार सृजन को बढ़ावा देना तथा विभिन्न क्षेत्रों में सामाजिक सुरक्षा कवरेज का विस्तार करना है।

प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY)

  • प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) एक प्रमुख रोजगार-आधारित प्रोत्साहन योजना है, जिसका उद्देश्य औपचारिक रोजगार, सामाजिक सुरक्षा कवरेज तथा समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।
  • शुभारंभ: इसे 1 अगस्त, 2025 को श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा विकसित भारत विजन के अंतर्गत रोजगार-आधारित विकास को गति देने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया।
  • उद्देश्य
    • प्रथम बार रोजगार प्राप्त करने वाले कर्मचारियों को सहायता: प्रत्यक्ष वित्तीय प्रोत्साहनों एवं सामाजिक सुरक्षा लाभों के माध्यम से युवाओं के औपचारिक कार्यबल में प्रवेश को सुगम बनाना।
    • नियोक्ताओं को प्रोत्साहन: विभिन्न क्षेत्रों में अतिरिक्त एवं स्थायी रोजगार अवसर सृजित करने हेतु नियोक्ताओं को प्रोत्साहित करना।
    • वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना: युवा श्रमिकों में वित्तीय साक्षरता, बचत की आदतों तथा औपचारिक कार्यबल में भागीदारी को सुदृढ़ करना।
  • बजटीय प्रावधान: कुल वित्तीय परिव्यय ₹99,446 करोड़ है।
  • लक्ष्य: दो वर्षों की अवधि में 3.5 करोड़ रोजगार अवसरों का सृजन करना।
  • प्रमुख घटक
    • प्रथम बार कर्मचारियों के लिए प्रोत्साहन 
      • EPFO में पंजीकृत प्रथम बार कर्मचारियों को ₹15,000 तक का प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है।
      • ₹1 लाख तक के सकल मासिक वेतन प्राप्त करने वाले कर्मचारी पात्र हैं।
      • इसमें एक ऑनलाइन वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम भी शामिल है।
    • नियोक्ताओं के लिए सहायता
      • अतिरिक्त रोजगार सृजन के लिए प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है।
      • प्रत्येक पात्र नए कर्मचारी के लिए नियोक्ता को ₹3,000 प्रति माह तक की सहायता मिलती है।
      • यह प्रोत्साहन सभी क्षेत्रों में 2 वर्ष तक, तथा विनिर्माण क्षेत्र में 4 वर्ष तक उपलब्ध है।
  • प्रमुख उपलब्धियाँ
    • लगभग 70 लाख नए रोजगार सृजित किए गए और समान संख्या में प्रथम बार कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा कवरेज के अंतर्गत लाया गया।
    • प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से ₹2,000 करोड़ से अधिक की राशि सीधे लाभार्थियों को हस्तांतरित की गई।

प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) औपचारिक रोजगार सृजन को बढ़ावा देती है, सामाजिक सुरक्षा कवरेज को सुदृढ़ बनाती है, विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार वृद्धि को प्रोत्साहित करती है तथा भारत को वर्ष 2047 तक एक विकसित अर्थव्यवस्था में रूपांतरित करने की दिशा में समर्थन प्रदान करती है।

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