संदर्भ
भारत के संस्कृति सचिव श्री विवेक अग्रवाल को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के 2026–27 कार्यकाल के लिए उपाध्यक्ष (Vice-President) नियुक्त किया गया है।
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के बारे में
- फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) एक अंतर-सरकारी निकाय है, जो धन शोधन, आतंकवाद वित्तपोषण तथा प्रसार वित्तपोषण से निपटने हेतु वैश्विक मानक विकसित करता है।
- स्थापना: FATF की स्थापना वर्ष 1989 में पेरिस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन द्वारा धन शोधन के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए की गई थी।
- इसके कार्यादेश का विस्तार वर्ष 2001 में आतंकवाद वित्तपोषण निरोध को शामिल करने तथा वर्ष 2012 में प्रसार वित्तपोषण को अपने दायरे में सम्मिलित करने के लिए किया गया।
- मुख्यालय: FATF सचिवालय का प्रशासनिक संचालन आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) द्वारा पेरिस, फ्राँस में किया जाता है।
- उद्देश्य
- एंटी-मनी लॉण्ड्रिंग (AML): अपराध से अर्जित आय के अवैध वैधीकरण को रोकने हेतु अंतरराष्ट्रीय मानक विकसित करता है।
- आतंकवाद वित्तपोषण निरोध (CTF): आतंकवादी वित्तपोषण नेटवर्कों की पहचान एवं उन्हें बाधित करने के वैश्विक प्रयासों को सुदृढ़ करता है।
- सहकर्मी निगरानी: FATF की सिफारिशों के अनुपालन का आकलन करने के लिए पारस्परिक मूल्यांकन के माध्यम से देशों का मूल्यांकन करता है।
- सदस्य: FATF में 40 सदस्य हैं, जिनमें 38 न्यायक्षेत्र तथा 2 क्षेत्रीय संगठन—यूरोपीय आयोग (European Commission) और गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) शामिल हैं।
- भारत की सदस्यता: भारत वर्ष 2010 में FATF का पूर्ण सदस्य बना।
- भारत में कार्यान्वयन: भारत FATF की सिफारिशों को मुख्यतः धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 तथा गैर-कानूनी गतिविधियाँ (निवारण) अधिनियम (UAPA), 1967 के माध्यम से लागू करता है।
- FATF प्लेनरी: प्लेनरी FATF की मुख्य निर्णय-निर्माण संस्था है, जिसकी बैठक वर्ष में तीन बार आयोजित होती है।
- अध्यक्ष: FATF का प्रमुख प्रतिनिधि एवं लीडर होता है, जो इसकी रणनीतिक प्राथमिकताओं, नीतिगत एजेंडा तथा अंतरराष्ट्रीय सहभागिता का मार्गदर्शन करता है।
- उपाध्यक्ष: उपाध्यक्ष, अध्यक्ष को FATF के कार्यों के निर्वहन में सहायता प्रदान करता है तथा नेतृत्व की निरंतरता सुनिश्चित करता है।
- कार्यकाल: अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चुनाव FATF सदस्य देशों द्वारा दो वर्ष की अवधि के लिए किया जाता है।
- FATF सिफारिशें: FATF अपनी 40 सिफारिशों के कार्यान्वयन की निगरानी करता है, जिनमें AML/CFT नीतियाँ, पारदर्शिता, निवारक उपाय, नियामकीय पर्यवेक्षण तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग शामिल हैं।
- सूचियों के प्रकार
- ग्रे लिस्ट (कड़ी निगरानी के अधीन न्यायक्षेत्र): इसमें ऐसे देश शामिल होते हैं, जिनकी AML/CFT प्रणालियों में रणनीतिक कमियाँ पाई जाती हैं, लेकिन जिन्होंने FATF की निगरानी में सुधारात्मक कदम उठाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की होती है।
- अफ्रीका:अंगोला, कैमरून, कोट डी’आइवर, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, केन्या, नामीबिया और दक्षिण सूडान।
- अमेरिका: बोलिविया, हैती और वेनेजुएला।
- एशिया-प्रशांत: लाओस, नेपाल, पापुआ न्यू गिनी और वियतनाम।
- यूरोप: बोस्निया एवं हर्जेगोविना, बुल्गारिया, मोनाको और ब्रिटिश वर्जिन द्वीपसमूह (UK)।
- मध्य पूर्व: इराक, कुवैत, लेबनान, सीरिया और यमन।
- ब्लैक सूची (कार्रवाई हेतु चिन्हित उच्च-जोखिम वाले न्यायक्षेत्र): इसमें वे देश शामिल होते हैं, जिनकी व्यवस्थाओं में गंभीर रणनीतिक कमियाँ होती हैं और जो अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली के लिए महत्त्वपूर्ण जोखिम उत्पन्न करते हैं।
- ब्लैक सूची में शामिल देश: उत्तर कोरिया, ईरान और म्याँमार।
- सूचीबद्ध होने के प्रभाव
- ग्रे सूची: इससे बैंकिंग लेन-देन पर कड़ी निगरानी बढ़ जाती है, विदेशी निवेश में कमी आती है तथा उधारी की लागत बढ़ जाती है।
- ब्लैक सूची: इसके परिणामस्वरूप कठोर अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंध लग सकते हैं तथा संबंधित देश वैश्विक वित्तीय प्रणाली से अलग-थलग पड़ सकता है।
- महत्त्व: FATF अवैध वित्तीय प्रवाह, संगठित अपराध, आतंकवाद वित्तपोषण तथा प्रसार-संबंधी गतिविधियों का मुकाबला करके वैश्विक वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा एवं अखंडता बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।