संदर्भ:
इस चर्चा की आधारशिला महात्मा गांधी के प्रसिद्ध कथन पर
“वास्तविक भारत गाँवों में बसता है” पर आधारित है।
- स्रोत इस बात पर बल देता है कि ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास के बिना राष्ट्रीय विकास असंभव है।
- इसे संबोधित करने के लिए भारत, इंटरनेशनल फंड फॉर एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट (IFAD)—जो विकासशील देशों में गरीबी और भूख को समाप्त करने पर केंद्रित संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है—के साथ सहयोग कर रहा है, ताकि 2026–2033 की अवधि के लिए एक मध्यम से दीर्घकालिक रणनीतिक रूपरेखा लागू की जा सके, जिसे “कंट्री स्ट्रेटेजिक अपॉर्च्युनिटी प्रोग्राम (COSOP)” कहा जाता है।
कंट्री स्ट्रेटेजिक अपॉर्च्युनिटीज प्रोग्राम (COSOP) क्या है?
- यह इंटरनेशनल फंड फॉर एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट (IFAD) और किसी सदस्य देश द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई मध्यम से दीर्घकालिक रणनीतिक रूपरेखा है।
- भारत का COSOP वर्ष 2026–2033 की अवधि को शामिल करता है।
- इसका मुख्य उद्देश्य भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना और आजीविका में सुधार करना है।
COSOP 2026–2033 के तीन प्रमुख स्तंभ
- सामाजिक-आर्थिक एवं जलवायु लचीलापन: ग्रामीण समुदायों को गरीबी, बीमारियों, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक तनाव/ झटकों के विरुद्ध सशक्त बनाना।
- तन्यक आजीविका (Resilient Livelihoods) और अनुकूलन क्षमता (Adaptive Capacity) पर ध्यान केंद्रित करना।
- जमीनी स्तर की संस्थाओं को सशक्त बनाना: स्वयं सहायता समूहों (SHGs), पंचायतों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को सशक्त करना।
- विकेंद्रीकृत शासन और सामूहिक सौदेबाजी शक्ति को बढ़ावा देना।
- उदाहरण: किसान उत्पादक संगठन (FPOs) किसानों को बीज, उर्वरक और अन्य कृषि इनपुट सामूहिक रूप से कम कीमतों पर खरीदने में सहयोग करते हैं।
- दक्षिण-दक्षिण सहयोग: भारत अपने सफल ग्रामीण विकास मॉडलों को अन्य विकासशील देशों के साथ साझा करेगा। वे क्षेत्र जहाँ भारत योगदान दे सकता है:
- डिजिटल शासन
- स्वयं सहायता समूह (SHG) आंदोलन
- ग्रामीण वित्तीय समावेशन
अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) के बारे में
- संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है।
- इसकी स्थापना निम्न समस्याओं को कम करने के लिए की गई थी:
- ग्रामीण गरीबी
- भूख
- खाद्य असुरक्षा
- यह विकासशील देशों के साथ दीर्घकालिक ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के माध्यम से कार्य करता है।
- IFAD विश्व बैंक से संबद्ध नहीं है।

भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था के समक्ष विद्यमान चुनौतियाँ
- संरचनात्मक बाधाएँ (Structural Constraints): छोटे और बिखरे हुए भूमि जोत कृषि उत्पादकता को कम करते हैं तथा उन्नत मशीनरी के उपयोग को कठिन बनाते हैं।
- प्रच्छन्न बेरोजगारी (Disguised Unemployment): कृषि क्षेत्र में आवश्यकता से अधिक लोग कार्यरत हैं, जिसके परिणामस्वरूप कम उत्पादकता और छिपी हुई बेरोजगारी उत्पन्न होती है।
- जलवायु संवेदनशीलता (Climate Vulnerability): भारतीय कृषि जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न सूखा, बाढ़ और अनियमित वर्षा के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।
- विदर्भ में सूखा
- बिहार में बाढ़
- अनिश्चित मॉनसून पैटर्न
- कमजोर बाजार पहुँच और ऋण जाल: खराब आधारभूत संरचना और संस्थागत ऋण की कमी के कारण किसानों को अपनी उपज कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है तथा वे साहूकारों पर निर्भर हो जाते हैं।
- मानव विकास की कमी (Human Development Deficit): खराब स्वास्थ्य सेवाएँ और शिक्षा सुविधाएँ ग्रामीण क्षेत्रों में मानव पूँजी निर्माण को कमजोर करती हैं।
COSOP के अंतर्गत प्रस्तावित प्रमुख समाधान
- बाजार-उन्मुख कृषि की ओर परिवर्तन: यह कार्यक्रम किसानों की आय बढ़ाने के लिए व्यावसायिक खेती और बाजार-आधारित उत्पादन को बढ़ावा देता है।
- कृषि में मूल्य संवर्धन: कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण लाभप्रदता बढ़ाता है और ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहित करता है।
- स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को बढ़ावा देना: SHGs बेहतर ऋण सुविधा और उद्यमिता के अवसरों के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण को मजबूत करते हैं।
- जलवायु-सहिष्णु कृषि: जलवायु-सहिष्णु कृषि पद्धतियाँ कृषि पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में सहायता करती हैं।
- वित्तीय समावेशन: IFAD का उद्देश्य NABARD और बैंकिंग संस्थानों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण तक पहुँच में सुधार करना है।
- संस्थागत ऋण की उपलब्धता
- साहूकारों पर निर्भरता में कमी
- ग्रामीण वित्तीय सहायता में वृद्धि
- संस्थाओं को सुदृढ़ बनाना: यह कार्यक्रम पंचायतों, FPOs (किसान उत्पादक संगठनों) और SHGs (स्वयं सहायता समूहों) को कानूनी, वित्तीय और बाजार संबंधी सहायता के माध्यम से समर्थन प्रदान करता है।
ग्रामीण विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका
AI को कई माध्यमों से ग्रामीण विकास के लिए एक परिवर्तनकारी साधन के रूप में चिन्हित किया गया है:
- बेहतर कृषि (Precision Farming): सेंसरों का उपयोग करके मृदा की आर्द्रता और उर्वरक की आवश्यकताओं के बारे में उचित डेटा प्रदान करना।
- उन्नत पूर्वानुमान (Advanced Forecasting): सूखे और बाढ़ के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रदान करना।
- AI आधारित क्रेडिट स्कोरिंग: फसलों की सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग करके बैंकों को किसान की ऋण पात्रता का आकलन करने में मदद करना।
- बाज़ार संपर्क (Market Linkages): ऐसे ऐप्स का उपयोग करना जो किसानों को उन शहरों के बारे में सूचित करते हैं जहाँ उनकी विशिष्ट फसलों को सबसे अधिक कीमत मिल रही है।
- टेलीमेडिसिन और ई-शिक्षा: एआई-आधारित प्लेटफॉर्मों के माध्यम से दूरस्थ स्वास्थ्य सेवाएँ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करके “मानव विकास की कमी” को दूर करना।
उपयोगी/लाभ उठाने योग्य प्रमुख सरकारी योजनाएँ
स्रोत ग्रामीण उत्थान के लिए कई महत्वपूर्ण पहलों को सूचीबद्ध करता है:
- PM ग्राम सड़क योजना: सभी मौसमों में सड़क संपर्क उपलब्ध कराने के लिए।
- PM आवास योजना (ग्रामीण): ग्रामीण क्षेत्रों में पक्के मकान उपलब्ध कराने के लिए।
- PM-किसान: किसानों को ₹6,000 की प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए।
- PM फसल बीमा योजना: फसल बीमा उपलब्ध कराने के लिए।
- e-NAM: कृषि उत्पादों के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय बाज़ार बनाने का एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म।
निष्कर्ष
वास्तविक ग्रामीण विकास ऐतिहासिक संबंधों की “सद्भावना” से आगे बढ़कर परिणाम और कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करने की मांग करता है। घरेलू सुधारों, संस्थागत सुदृढ़ीकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी अत्याधुनिक तकनीक के एकीकरण के माध्यम से भारत अपनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को “निर्वाह-आधारित” स्थिति से बदलकर राष्ट्रीय विकास के एक प्रेरक शक्ति में परिवर्तित कर सकता है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न: भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाली संरचनात्मक बाधाओं पर चर्चा कीजिए। हाल ही में शुरू किए गए COSOP 2026–2033 ढाँचे के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी उभरती तकनीकें “विकसित भारत@2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने में किस प्रकार उत्प्रेरक की भूमिका निभा सकती हैं?
(15 अंक, 250 शब्द)
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