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NEET विवाद और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA)

NEET विवाद और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) 14 May 2026

संदर्भ:

भारत ने “वन नेशन, वन एग्जाम” की अवधारणा के तहत NEET की शुरुआत की, ताकि देश भर के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया को समान (Uniform), पारदर्शी (Transparent) और सरल (Simplified) बनाया जा सके।

राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के बारे में

  • NTA की प्रकृति: राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की स्थापना इन परीक्षाओं के संचालन के लिए की गई थी। यह भारतीय सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के अंतर्गत पंजीकृत है।
  • स्थिति: यह एक वैधानिक निकाय नहीं है क्योंकि इसकी स्थापना संसद के किसी अधिनियम के माध्यम से नहीं की गई है।

NEET विवाद से संबंधित प्रमुख मुद्दे

  • कथित प्रश्नपत्र लीक और विश्वसनीयता संकट: रिपोर्टों में बताया गया कि कोचिंग संस्थानों द्वारा प्रसारित एक अनुमानित प्रश्नपत्र के प्रश्न वास्तविक NEET प्रश्नपत्र से मेल खाते थे, जिससे संभावित पेपर लीक को लेकर चिंताएँ उत्पन्न हुईं।
  • छात्रों और परिवारों पर व्यापक प्रभाव: लगभग 22 लाख छात्रों ने इस परीक्षा में भाग लिया, और किसी भी अनियमितता से व्यापक मनोवैज्ञानिक, आर्थिक और भावनात्मक तनाव उत्पन्न होता है।
  • जवाबदेही की कमी: बार-बार विवादों के बावजूद, परीक्षा प्रणाली में स्पष्ट संस्थागत जवाबदेही के अभाव को लेकर आलोचना की गई है।
  • NTA की कमजोर संस्थागत क्षमता: आलोचकों का तर्क है कि NTA के पास इतने बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय परीक्षा को कुशलतापूर्वक संचालित करने के लिए पर्याप्त संस्थागत क्षमता का अभाव है।
  • बार-बार परीक्षा अनियमितताएँ: NEET प्रणाली कई बार विवादों का सामना कर चुकी है, जिनमें नकल (Impersonation) घोटाले, ग्रेस मार्क्स विवाद और प्रश्नपत्र लीक शामिल हैं।
    • 2019: “मुन्ना भाई” नकल विवाद
    • 2024: ग्रेस मार्क्स एवं पेपर लीक विवाद
    • 2026: पेपर लीक के नए आरोप

के. राधाकृष्णन समिति की सिफ़ारिशें

पिछली लीक की घटनाओं के बाद, ISRO के पूर्व चेयरमैन के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली एक समिति ने कई सुधारों का प्रस्ताव रखा था; हालाँकि, इन सुधारों को अभी तक पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है।

  • NTA का पुनर्गठन: NTA को वर्त्तमान में “कमजोर” बताया गया है और इसके पूर्ण पुनर्गठन की आवश्यकता है।
  • बहु-स्तरीय परीक्षा प्रणाली: प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा (UPSC की तरह) वाली प्रणाली की ओर बढ़ना, ताकि एक ही पेपर लीक से पूरी प्रक्रिया प्रभावित न हो।
  • हाइब्रिड मॉडल: प्रश्नपत्र को कंप्यूटर स्क्रीन पर प्रदर्शित करना, जबकि छात्र उत्तरों को एक भौतिक OMR शीट पर भरते हैं।
  • बेहतर समन्वय: परीक्षा के अधिक सुरक्षित संचालन के लिए राज्य और जिला प्राधिकरणों के साथ संबंधों को मजबूत करना।

व्यापक शासन एवं सामाजिक चिंताएँ

  • भ्रष्टाचार और नैतिक पतन: परीक्षा घोटालों की बार-बार पुनरावृत्ति समाज में भ्रष्टाचार और नैतिक पतन से जुड़ी गहरी चिंताओं को दर्शाती है।
  • सीमित अवसर और उच्च प्रतिस्पर्धा: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के अवसरों की कमी के कारण प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं पर दबाव बढ़ जाता है।
  • मूल्य-आधारित शासन की आवश्यकता: दीर्घकालिक सुधार के लिए केवल संस्थागत बदलाव ही नहीं, बल्कि समाज और शासन में मजबूत नैतिक मूल्यों की भी आवश्यकता है।

निष्कर्ष

  • NEET संकट केवल एक परीक्षा संबंधी समस्या नहीं है, बल्कि यह शासन, जवाबदेही, संस्थागत क्षमता और सामाजिक नैतिकता से जुड़ी व्यापक चुनौतियों का भी प्रतिबिंब है।
  • पारदर्शी और विश्वसनीय परीक्षाएँ सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुधारों की आवश्यकता है, जिनमें मजबूत संस्थाएँ, तकनीकी सुरक्षा उपाय, प्रशासनिक जवाबदेही और मूल्य-आधारित शासन शामिल हैं।
  • प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में विश्वास बहाल करना लाखों छात्रों की आकांक्षाओं की रक्षा करने और भारत की शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को मजबूत करने के लिए आवश्यक है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: NEET जैसी राष्ट्रव्यापी प्रवेश परीक्षाओं के संचालन में बार-बार होने वाली प्रशासनिक और नैतिक विफलताओं ने संस्थागत निकायों में सार्वजनिक विश्वास को गंभीर रूप से कमजोर किया है। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के भीतर विद्यमान प्रणालीगत खामियों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए तथा विश्वसनीयता बहाल करने हेतु के. राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों पर चर्चा कीजिए।

 (15 अंक, 250 शब्द)

NEET विवाद और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA)

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