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न्यायिक सुधार और आपराधिक न्याय प्रणाली

न्यायिक सुधार और आपराधिक न्याय प्रणाली 13 May 2026

संदर्भ:

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में जमानत के एक मामले की सुनवाई करते हुए न्यायिक विलंब को कम करने और आपराधिक न्याय प्रणाली में सुधार के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।

न्यायिक सुधार का अर्थ:

न्यायिक सुधार से आशय उन संरचनात्मक और प्रशासनिक परिवर्तनों से है, जिनका उद्देश्य न्यायपालिका को अधिक:

  • उत्तरदायी (Accountable)
  • पारदर्शी (Transparent)
  • दक्ष (Efficient)
  • सुलभ (Accessible) बनाना होता है

संवैधानिक परिप्रेक्ष्य

  • त्वरित (शीघ्र) न्याय का अधिकार:
    • संवैधानिक प्रावधान: त्वरित न्याय का अधिकार किसका हिस्सा माना जाता है:
      • भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा माना जाता है।
  • सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय: हुसैनारा खातून बनाम बिहार राज्य मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि:
    • त्वरित न्याय का अधिकार अनुच्छेद 21 के अंतर्गत एक मौलिक अधिकार है।
    • आपराधिक कार्यवाही में अत्यधिक देरी किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन है।

न्यायिक देरी के प्रमुख कारण

  • न्यायिक रिक्तियाँ: न्यायालयों में बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं।
    • न्यायाधीशों और कर्मचारियों की कमी।
  •  कमजोर फॉरेंसिक अवसंरचना: सीमित फॉरेंसिक प्रयोगशालाएँ।
    • DNA परीक्षण और साक्ष्य विश्लेषण में देरी।
  • समन्वय की कमी: इनके बीच समन्वय का अभाव है:
    • पुलिस
    • न्यायपालिका
    • अभियोजन एजेंसियां
  • जाँच में देरी: चार्जशीट दाखिल करने में देरी।
    • कमजोर साक्ष्य संग्रह
  • बार-बार स्थगन: वकीलों और पक्षकारों द्वारा लगातार सुनवाई स्थगित कराना।
  • खराब न्यायालयिक अवसंरचना: कई अधीनस्थ न्यायालयों में निम्नलिखित सुविधाओं की कमी है:
    • पर्याप्त भवन
    • प्रतीक्षालय
    • शौचालय
    • डिजिटल सुविधाएँ

इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देश

न्यायालय ने हाल ही में लंबित मामलों को कम करने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस और अधीनस्थ न्यायपालिका को कई आदेश जारी किए हैं:

  • रिक्त पद भरना: न्यायिक पदों की शीघ्र भर्ती प्रक्रिया तेज करना।
  • फॉरेंसिक अवसंरचना: फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं और कर्मचारियों में सुधार किया जाए ताकि अनिवार्य डीएनए मिलान संभव हो सके, जो निर्विवाद साक्ष्य प्रदान करता है और मुकदमों की प्रक्रिया को तेज करता है।
  • बेहतर समन्वय: जिला न्यायाधीशों और पुलिस प्रमुखों (DGP/SP) के बीच बेहतर सहयोग सुनिश्चित करने के लिए मासिक बैठकें आयोजित की जाएँ।
  • प्रौद्योगिकी: स्टेनोग्राफरों और रीडरों की कमी को दूर करने के लिए निर्णयों हेतु एआई-आधारित भाषण-से-पाठ (speech-to-text) सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाए।
  • पुलिस जवाबदेही: उन अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए जो समन या वारंट तामील करने में देरी करते हैं।

समय पर न्याय क्यों महत्वपूर्ण है?

  • मौलिक अधिकारों की रक्षा: विलंब से न्याय अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करता है।
  • कानून के शासन को मजबूत करना: त्वरित दंड अपराध और अराजकता के विरुद्ध एक निवारक के रूप में कार्य करता है।
  • साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ को रोकता है: लंबे विलंब से साक्ष्यों के नष्ट होने या उनमें हेरफेर होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • आर्थिक विश्वास को बढ़ावा देता है: एक प्रभावी न्यायिक प्रणाली निवेशकों के विश्वास को बढ़ाती है और आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करती है।
  • जन विश्वास को बढ़ाता है: समय पर न्याय लोकतंत्र और सार्वजनिक संस्थानों में लोगों के विश्वास को मजबूत करता है।

आगे की राह (आवश्यक सुधार)

  • न्यायिक क्षमता बढ़ाना: लंबित मामलों को कम करने के लिए अधिक न्यायाधीशों की नियुक्ति की जाए और अतिरिक्त न्यायालय स्थापित किए जाएँ।
  • फॉरेंसिक अवसंरचना में सुधार: त्वरित न्याय प्रक्रिया के लिए फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं और आधुनिक जाँच सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाए।
  • डिजिटल न्यायालयों का विस्तार: दक्षता और पहुँच में सुधार के लिए ई-कोर्ट्स और वर्चुअल सुनवाइयों को बढ़ावा दिया जाए।
  • पुलिस सुधारों को मजबूत करना: समय पर न्याय सुनिश्चित करने के लिए पुलिस व्यवस्था का आधुनिकीकरण किया जाए और जाँच की गुणवत्ता में सुधार किया जाए।
  • प्रक्रियागत विलंब को कम करना: कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए और अनावश्यक स्थगनों को हतोत्साहित किया जाए।
  • प्रौद्योगिकी एकीकरण को बढ़ावा देना: मामलों के तेज़ निपटारे के लिए AI, डिजिटल अभिलेखों और केस-प्रबंधन प्रणालियों का उपयोग किया जाए।
  • संस्थागत समन्वय में सुधार: पुलिस, अभियोजन, न्यायपालिका और फॉरेंसिक एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय को बढ़ावा दिया जाए।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: आपराधिक न्याय प्रणाली में विलंब के लिए उत्तरदायी संस्थागत चुनौतियों का परीक्षण कीजिए तथा समय पर और प्रभावी न्याय सुनिश्चित करने के उपाय सुझाइए।

 (10 अंक, 150 शब्द)

न्यायिक सुधार और आपराधिक न्याय प्रणाली

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