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विशालकाय तारे: नए तारों की उत्पत्ति को प्रेरित करना

9 May 2026

संदर्भ

आर्यभट्ट प्रेक्षणीय विज्ञान अनुसंधान संस्थान के शोधकर्ताओं ने पाया कि विशालकाय तारे (Massive Stars) अपने निकट के आणविक बादलों में नए तारों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

संबंधित तथ्य

यह शोधद एस्ट्रोफिजिकल जर्नल’ में प्रकाशित हुआ है।

अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष

  • अध्ययन क्षेत्र: अध्ययन में ब्राइट रिम्ड क्लाउड 44’ (BRC 44) का परीक्षण किया गया, जो सेफियस OB2 तारा-निर्माण क्षेत्र में लगभग 900 पारसेक दूरी पर स्थित है।
    • पारसेक खगोलीय दूरी की एक इकाई है, जो लगभग 3.26 प्रकाश-वर्ष या लगभग 31 ट्रिलियन किलोमीटर के बराबर होती है, जिसका उपयोग सामान्यतः तारों और आकाशगंगाओं के बीच दूरी मापने के लिए किया जाता है।

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  • विकिरण-प्रेरित तारा निर्माण: निकटवर्ती विशालकाय तारों से निकलने वाला पराबैंगनी विकिरण आस-पास के गैसीय बादलों को आयनीकृत और संपीडित करता है, जिससे नए तारों के निर्माण के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनती हैं।
  • आघातीय तरंग तंत्र: संपीडित गैस आघातीय-तरंगें उत्पन्न करती है, जो आणविक बादलों के भीतर गहराई तक पहुँचकर घनत्व बढ़ाती हैं और तारों के जन्म की प्रक्रिया को आरंभ करती हैं।
  • नवीन तारकीय पिंडों की खोज: शोधकर्ताओं ने BRC 44 में 22 नए नवीन तारकीय पिंडों की पहचान की, जिनमें कई ब्राउन ड्वार्फ शामिल हैं, जो हाइड्रोजन संलयन को बनाए रखने में सक्षम नहीं होते।
  • बहु-तरंगदैर्ध्य अवलोकन: अध्ययन में 3.6-मीटर देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप, देवस्थल फास्ट ऑप्टिकल टेलीस्कोप (देवस्थल, उत्तराखंड, भारत), स्पिट्जर स्पेस टेलीस्कोप (बाह्य अंतरिक्ष; संचालित: NASA, संयुक्त राज्य अमेरिका), तथा चीन की रेडियो वेधशालाओं से प्राप्त आँकड़ों का उपयोग किया गया।

आणविक बादल (Molecular Clouds) क्या हैं?

  • आणविक बादल (Molecular Clouds) अंतरिक्ष में स्थित सघन और अत्यधिक ठंडे क्षेत्र होते हैं, जो मुख्यतः आणविक हाइड्रोजन के साथ-साथ धूल कणों और अन्य गैसों द्वारा निर्मित होते हैं। ये आकाशगंगाओं में उपस्थित सबसे बड़ी संरचनाओं में से एक हैं।
  • संरचना: आणविक बादलों में मुख्यतः शामिल होते हैं:
    • आणविक हाइड्रोजन (H₂)
    • हीलियम
    • कॉस्मिक धूल
    • अन्य अणुओं के अंश, जैसे- कार्बन मोनोऑक्साइड।
  • तापमान और घनत्व: ये बादल अत्यंत निम्न तापमान वाले होते हैं, जिनका तापमान सामान्यतः 10–30 केल्विन के बीच होता है।
    • इनका उच्च घनत्व गैस कणों को गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में एकत्र होने की अनुमति देता है।

विशालकाय तारे (Massive stars) क्या हैं?

  • विशालकाय तारे वे तारे होते हैं, जिनका द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान से आठ गुना से अधिक होता है तथा जिनमें अत्यधिक दीप्ति और तापमान पाया जाता है।
  • तीव्र तारकीय विकास: विशालकाय तारे अपने नाभिकीय ईंधन का तीव्र गति से उपभोग करते हैं और अपना जीवन चक्र कुछ मिलियन वर्षों में पूरा कर लेते हैं, जबकि सूर्य जैसे तारे अरबों वर्षों तक अस्तित्त्व में रहते हैं।
  • उच्च ऊर्जा उत्सर्जन: ये तारे अत्यधिक पराबैंगनी विकिरण और प्रबल तारकीय पवन का उत्सर्जन करते हैं, जो आस-पास के अंतरतारकीय वातावरण को महत्त्वपूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं।
  • सुपरनोवा अंतिम अवस्था: विशालकाय तारे अंततः टाइप-II सुपरनोवा के रूप में विस्फोट करते हैं, और अपने पीछे न्यूट्रॉन तारे या ब्लैक होल के रूप में अवशेष उत्सर्जित करते हैं।
  • निर्माण का स्रोत: सामान्य तारों की तरह, विशालकाय तारे भी आणविक बादलों में उत्पन्न होते हैं, जो निहारिकाओं में उपस्थित गैस और कॉस्मिक धूल से बने होते हैं।

महत्त्व

  • तारकीय विकास की समझ: ये निष्कर्ष इस बात की वैज्ञानिक समझ को बेहतर बनाते हैं कि तारे कैसे विकसित होते हैं और कॉस्मिक विकास के विभिन्न चरणों में आस-पास के आणविक बादलों के साथ कैसे अंतःक्रिया करते हैं।
  • प्रेरित तारा निर्माण सिद्धांत: यह अध्ययन विकिरण-प्रेरित या तारा निर्माण के लिए प्रमाणों को सुदृढ़ करता है, जिसमें पुराने विशालकाय तारे नई तारकीय पीढ़ियों के जन्म की प्रक्रिया शुरू करते हैं।
  • ब्राउन ड्वार्फ पर अंतर्दृष्टि: ब्राउन ड्वार्फ की पहचान ग्रहों और पूर्ण विकसित तारों के बीच संक्रमण को समझने के लिए महत्त्वपूर्ण संकेत प्रदान करती है।
  • खगोलीय अनुसंधान में प्रगति: यह शोध स्वदेशी दूरबीनों के उपयोग और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग के माध्यम से प्रेक्षणीय खगोल विज्ञान में भारत की बढ़ती क्षमताओं को प्रदर्शित करता है।
  • आकाशगंगा निर्माण की समझ: तारा-निर्माण क्षेत्रों का अध्ययन वैज्ञानिकों को आकाशगंगाओं के विकास और ब्रह्मांड में पदार्थ के वितरण को बेहतर ढंग से समझने में सहायता करता है।
विशालकाय तारे: नए तारों की उत्पत्ति को प्रेरित करना

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