संदर्भ
लोकसभा अध्यक्ष के हालिया संबोधनों में भारत की बौद्धिक पूँजी के संक्रमण को रेखांकित करते हुए एक महत्त्वपूर्ण थीम पर चर्चा की गई- ‘प्राचीन वैज्ञानिक अन्वेषण और आधुनिक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) के नेटवर्क के बीच का स्वाभाविक सेतु’।
- यह निरंतरता भारत की आधुनिक यात्रा—स्वतंत्रता-उपरांत पुनर्स्थापना से लेकर वैश्विक प्रौद्योगिकीय आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत)—की आधारशिला को दर्शाती है।
आधुनिक स्तंभ—IIT पारिस्थितिकी तंत्र
IITs भारत की स्वतंत्रता-उपरांत प्रौद्योगिकीय शिक्षा व्यवस्था के शिखर का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसने देश को वैश्विक प्रौद्योगिकी के उपभोक्ता से प्रमुख उत्पादक में परिवर्तित किया।
- संस्थागत संरचना: IITs स्वायत्त, उत्कृष्ट सार्वजनिक संस्थान हैं, जिनका उद्देश्य विश्व-स्तरीय तकनीकी मानव संसाधन और इंजीनियरिंग अग्रदूतों का विकास करना है।
- विधिक स्थिति: इन्हें संसद के अधिनियमों द्वारा राष्ट्रीय महत्त्व के संस्थान (Institutes of National Importance) के रूप में मान्यता प्राप्त है, जिससे इन्हें शैक्षणिक एवं प्रशासनिक स्वायत्तता प्राप्त होती है।
- विकास: इस पारितंत्र की शुरुआत वर्ष 1951 में खड़गपुर से हुई—जहाँ हिजली डिटेंशन कैंप (औपनिवेशिक दमन का प्रतीक) को बौद्धिक सृजन केंद्र में परिवर्तित किया गया। आज यह नेटवर्क बढ़कर 23 परिसरों तक विस्तृत हो चुका है।

प्राचीन आधार—भारत की वैज्ञानिक विरासत
- आधुनिक प्रयोगशाला विज्ञान के औपचारिक रूप से विकसित होने से सदियों पूर्व, भारतीय उपमहाद्वीप में अनुभवजन्य अनुसंधान, गणितीय तर्क तथा संस्थागत शिक्षा की अत्यंत उन्नत परंपराएँ विद्यमान थीं।
- प्राचीन ज्ञान केंद्र
- तक्षशिला (Taxila): यह विकेंद्रीकृत शैक्षणिक मॉडल पर आधारित था, जहाँ कठोर केंद्रीय कक्षाओं का अभाव था। यह राजनीति एवं विज्ञान का एक प्रमुख केंद्र था।
- यहाँ से पाणिनि (संस्कृत व्याकरण के औपचारिककर्ता) और चाणक्य (कौटिल्य) जैसे महान चिंतक हुए।
- अवस्थित: वर्तमान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में।
- नालंदा: इसे विश्व का प्रमुख आवासीय अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय माना जाता है।
- यहाँ एक विशाल पुस्तकालय प्रणाली तथा कठोर प्रवेश मानदंड थे, जिससे विश्वभर के विद्वान आकर्षित होते थे।
- ह्वेनसांग और इत्सिंग जैसे चीनी यात्रियों ने इसकी विद्वत परंपरा का विस्तृत वर्णन किया।
- अवस्थित: वर्तमान बिहार।
- विक्रमशिला: यह पाल वंश के संरक्षण में स्थापित एक संगठित, राज्य-प्रशासित संस्थान था, जो दर्शन, तर्कशास्त्र और शिक्षक-प्रशिक्षण में विशेषज्ञता रखता था।
संस्थागत नीति—पुनर्जीवन और नवाचार को गति देना
इस ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक आर्थिक मूल्य में परिवर्तित करने हेतु राज्य ने कई वैधानिक, संरचनात्मक तथा वित्तीय हस्तक्षेप लागू किए हैं।
- संरचनात्मक सुधार एवं स्वदेशी आधार
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020: रटने की प्रवृत्ति से हटकर बहुविषयक शिक्षा, अंतर-विषयक लचीलापन तथा संस्थागत अनुसंधान एवं विकास (R&D) की दिशा में संरचनात्मक परिवर्तन को अनिवार्य बनाती है।
- भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) केंद्र: विभिन्न IITs में स्थापित ये केंद्र अंतःविषयक अनुसंधान पर केंद्रित हैं, जिनका उद्देश्य स्वदेशी प्रौद्योगिकियों (पारंपरिक जल संचयन, ऐतिहासिक धातुकर्म मिश्रण, गणितीय एल्गोरिदम) को आधुनिक इंजीनियरिंग में सत्यापित और एकीकृत करना है।
- वित्तपोषण एवं अनुसंधान उत्प्रेरक
- अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF): यह शिक्षा जगत, निजी उद्योगों और सरकारी एजेंसियों को जोड़कर वित्तपोषण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करता है तथा नौकरशाही अवरोधों को कम करता है।
- प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप (PMRF): यह एक लक्षित वित्तीय पहल है, जिसका उद्देश्य उच्च-स्तरीय घरेलू प्रतिभा को IITs और प्रमुख विज्ञान संस्थानों में उन्नत डॉक्टोरल अनुसंधान हेतु बनाए रखना है।
- डीप-टेक एवं उद्यमिता के अग्रिम क्षेत्र
- रणनीतिक मिशन: नेशनल क्वांटम मिशन (क्वांटम क्रिप्टोग्राफी एवं कंप्यूटिंग को सुरक्षित करना) और इंडियाAI मिशन (सॉवरेन कंप्यूटिंग अवसंरचना का निर्माण) जैसे लक्षित राज्य-समर्थित कार्यक्रम।
- इनक्यूबेशन ढाँचा: अटल इनोवेशन मिशन (AIM) स्कूलों में ग्रासरूट टिंकरिंग स्पेस स्थापित करता है, जबकि स्टार्ट-अप इंडिया संस्थागत प्रयोगशालाओं में विकसित प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण हेतु वेंचर कैपिटल समर्थन प्रदान करता है।