मैपिंग संबंधी प्रतिबंध और गूगल मैप्स

14 Mar 2026

संदर्भ

विभिन्न देशों में गूगल मैप्स के उपयोग का अनुभव अलग-अलग होता है, क्योंकि उपग्रह चित्रों और भौगोलिक सर्वेक्षणों से संबंधित सरकारी नियम अलग होते हैं।

  • कुछ देश सैन्य या सुरक्षा कारणों से संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए विस्तृत मानचित्रण पर प्रतिबंध लगाते हैं।

‘गूगल मैप्स’ के बारे में

  • गूगल मैप्स गूगल द्वारा विकसित एक वेब-आधारित और मोबाइल नेविगेशन सेवा है।
  • मुख्य सेवाएँ: यह मानचित्र, उपग्रह चित्र, सड़क दृश्य, वास्तविक समय यातायात जानकारी और कार, सार्वजनिक परिवहन, साइकिल या पैदल यात्रा के लिए मार्ग नियोजन की सुविधा प्रदान करता है।
  • प्रयुक्त तकनीक: यह मंच उपग्रह चित्रण, फोटोग्रामेट्री और भौगोलिक सूचना प्रणाली जैसी तकनीकों का उपयोग करके विस्तृत डिजिटल मानचित्र तैयार करता है।
  • डेटा स्रोत: यह अद्यतन मानचित्र जानकारी बनाए रखने के लिए सरकारी एजेंसियों, वाणिज्यिक उपग्रह प्रदाताओं और उपयोगकर्ताओं के योगदान से प्राप्त डेटा को एकीकृत करता है।

मानचित्रण डेटा कैसे तैयार किया जाता है?

  • मानचित्रण मंच फोटोग्रामेट्री तकनीक का उपयोग करते हैं, जिसमें विभिन्न स्रोतों से प्राप्त उपग्रह चित्रों को संयोजित किया जाता है।:
    • सरकारी एजेंसियाँ
    • भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण संगठन
    • वाणिज्यिक उपग्रह चित्रण प्रदाता।

कुछ देश विस्तृत मानचित्रण का विरोध क्यों करते हैं?

  • राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: सरकारें विस्तृत मानचित्रों पर प्रतिबंध लगाती हैं ताकि सैन्य ठिकानों, परमाणु संयंत्रों और रणनीतिक अवसंरचना की जानकारी सार्वजनिक न हो सके।
    • उदाहरण: वर्ष 2007 में भारत ने गूगल अर्थ पर चित्रों की स्पष्टता कम करने को कहा था और वर्ष 2016 में सुरक्षा कारणों से ‘स्ट्रीट व्यू’ को प्रारंभ में अस्वीकार कर दिया था।
  • आतंकवाद और सुरक्षा जोखिम: अत्यधिक विस्तृत उपग्रह चित्र आतंकवादी समूहों या शत्रुतापूर्ण तत्त्वों को हमलों की योजना बनाने में सहायता कर सकते हैं।
    • उदाहरण: इजरायल की उपग्रह तस्वीरें कई वर्षों तक धुँधली रखी गईं, क्योंकि वर्ष 1997 के काइल-बिंगामन संशोधन के तहत अमेरिका में उपग्रह चित्रों की रिजॉल्यूशन पर सीमा निर्धारित की गई थी।
  • भू-स्थानिक डेटा पर रणनीतिक नियंत्रण: कई देश अपनी संप्रभुता और संवेदनशील भौगोलिक जानकारी की सुरक्षा के लिए मानचित्रण डेटा को नियंत्रित करते हैं।
    • उदाहरण: दक्षिण कोरिया ने गूगल को उच्च-परिशुद्धता मानचित्र डेटा निर्यात करने की अनुमति नहीं दी, जिसके कारण उपयोगकर्ता नेवर मैप जैसे स्थानीय अनुप्रयोगों पर निर्भर रहते हैं।
      • कुछ संवेदनशील स्थानों, जैसे फ्राँस में इंटरपोल मुख्यालय, को भी मानचित्रों में धुँधला दिखाया जाता है।
  • पर्यावरणीय और तकनीकी सीमाएँ: कुछ क्षेत्रों में कठोर जलवायु और सीमित उपग्रह कवरेज के कारण विस्तृत मानचित्रण उपलब्ध नहीं हो पाता।
    • उदाहरण: ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका के बड़े हिस्सों का उच्च स्तर की स्पष्टता के साथ मानचित्रण करना अभी भी कठिन है।

उच्च गुणवत्ता वाले मानचित्रण डेटा का महत्त्व

  • बेहतर नेविगेशन: गूगल मैप्स जैसे-प्लेटफॉर्म पर उच्च गुणवत्ता वाला मानचित्रण डेटा सटीक नेविगेशन प्रदान करता है, जिससे उपयोगकर्ताओं को अधिक सुरक्षित और कुशल यात्रा करने में सहायता मिलती है। यह सटीक मार्ग, यातायात जानकारी और स्थान संबंधी विवरण उपलब्ध कराता है।
  • पत्रकारिता और पारदर्शिता: उपग्रह चित्र पत्रकारिता और सार्वजनिक जवाबदेही के लिए एक महत्त्वपूर्ण उपकरण बन गए हैं।
    • उदाहरण: गाजा पट्टी में हुए विनाशक उपग्रह तस्वीरों का उपयोग पत्रकारों और शोधकर्ताओं द्वारा सैन्य अभियानों के प्रभाव का दस्तावेजीकरण करने के लिए किया गया है।
  • भ्रामक सूचना की पहचान: विश्वसनीय उपग्रह चित्रों तक पहुँच शोधकर्ताओं और विश्लेषकों को जानकारी की पुष्टि करने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा एडिटेड या हेरफेर की गई तस्वीरों की पहचान करने में मदद करती है, जिससे गलत सूचना के प्रसार को रोकने में सहायता मिलती है।
    • उदाहरण: तेहरान टाइम्स द्वारा प्रकाशित एक उपग्रह तस्वीर में दावा किया गया था कि कतर में स्थित संयुक्त राज्य अमेरिका का एक सैन्य अड्डा नष्ट हो गया है। बाद में शोधकर्ताओं ने इसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता से एडिटेड एक नकली चित्र के रूप में पहचान लिया।
  • तकनीकी नवाचार: विस्तृत मानचित्रण डेटा स्वायत्त वाहनों और स्मार्ट मोबिलिटी प्रणालियों जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के विकास में सहायक होता है।
    • उदाहरण: अल्फाबेट इंक की सहायक कंपनी वेमो द्वारा विकसित रोबोटैक्सी नेविगेशन के लिए उच्च-परिशुद्धता भू-स्थानिक डेटा पर व्यापक रूप से निर्भर करती हैं।

‘गूगल स्ट्रीट व्यू’ के बारे में

  • परिभाषा: गूगल स्ट्रीट व्यू, गूगल द्वारा विकसित गूगल मैप्स की एक विशेषता है, जो सड़कों और स्थानों की 360-डिग्री पैनोरमिक तस्वीरें प्रदान करती है।
  • कार्य: यह उपयोगकर्ताओं को सड़कों, स्थलों और पड़ोस के क्षेत्रों को भूमि स्तर पर आभासी रूप से देखने की सुविधा देता है, वे साक्षात् उस स्थान पर वास्तविक रूप से उपस्थित हों।
  • प्रयुक्त तकनीक: स्ट्रीट व्यू की तस्वीरें विशेष कैमरों की सहायता से ली जाती हैं, जिन्हें वाहनों, ट्राइपॉड, नावों या बैकपैक पर लगाया जाता है। इसके बाद इन चित्रों को जोड़कर व्यापक परिदृश्य तैयार किया जाता है।
  • उपयोग: यह नेविगेशन, शहरी नियोजन, पर्यटन और व्यवसायों की दृश्यता बढ़ाने में सहायक है, जिससे उपयोगकर्ता किसी स्थान पर जाने से पहले ही उसे देख सकते हैं।
  • उपलब्धता: यह सेवा कई देशों में उपलब्ध है, हालाँकि कुछ स्थानों जैसे भारत में यह सुरक्षा और नियामकीय प्रतिबंधों के साथ संचालित होती है।

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