संक्षेप में समाचार

10 Jun 2026

खगोलविदों ने सैजिटेरियस A* से निकलने वाली सक्रिय पवन का पता लगाया

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पचास वर्षों की खोज के बाद, खगोलविदों ने अंततः आकाशगंगा (मिल्की वे) के केंद्र में स्थित महाविशालकाय ब्लैक होल सैजिटेरियस A*(Sgr A*) से निकलने वाली एक स्थिर एवं मंद ब्रह्मांडीय पवन (Cosmic Wind) की खोज की है, जिससे अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ा एक दीर्घकालिक रहस्य सुलझ गया है।

मुख्य बिंदु

  • महत्त्वपूर्ण खोज: वैज्ञानिकों ने पाया कि आकाशगंगा का केंद्र पूरी तरह शांत नहीं है; वहाँ स्थित ब्लैक होल कम-से-कम पिछले 20,000 वर्षों से एक निरंतर ब्रह्मांडीय पवन उत्सर्जित कर रहा है।
  • निर्णायक प्रमाण: इस ब्रह्मांडीय पवन ने आकाशगंगा के केंद्रीय क्षेत्र के चारों ओर फैली ठंडी आणविक गैस (Cold Molecular Gas) की घनी परत में 45 डिग्री कोणीय चौड़ी तथा 3 प्रकाश-वर्ष से अधिक लंबी शंकु-आकार की एक विशाल रिक्त गुहा निर्मित कर दी है, जो इसके अस्तित्व का प्रत्यक्ष प्रमाण प्रस्तुत करती है।
  • प्रयुक्त उपकरण: इस सूक्ष्म पवन का पता चिली स्थित अटाकामा लार्ज मिलिमीटर/सबमिलिमीटर एरे (ALMA) दूरबीन से प्राप्त रेडियो तरंगों के आँकड़ों तथा नासा के चंद्रा एक्स-रे वेधशाला (Chandra X-ray Observatory) के एक्स-रे आँकड़ों को संयुक्त रूप से विश्लेषित करके लगाया गया।
  • महत्त्व: जहाँ दूरस्थ अंतरिक्ष में स्थित अत्यधिक सक्रिय ब्लैक होल शक्तिशाली एनर्जी-जेट (Energy Jets) उत्सर्जित करते हैं, वहीं हमारी आकाशगंगा का केंद्रीय ब्लैक होल अपेक्षाकृत शांत अवस्था में होता है। यह खोज इस बात की दुर्लभ एवं निकटतम समझ प्रदान करती है कि शांत ब्लैक होल भी दीर्घकाल में अपनी मेजबान आकाशगंगाओं की संरचना, गैसीय परिवेश एवं विकासक्रम को किस प्रकार प्रभावित करते हैं।”

महाविशालकाय ब्लैक होल (Supermassive Black Holes) के बारे में

  • महाविशालकाय ब्लैक होल एक अत्यंत विशाल खगोलीय पिंड होता है, जिसमें लाखों से अरबों सूर्यों के बराबर द्रव्यमान अंतरिक्ष के एक अत्यंत छोटे क्षेत्र में संकेंद्रित होता है।
  • आकाशगंगाओं के केंद्रीय आधार: वैज्ञानिकों का मानना है कि ब्रह्मांड की लगभग प्रत्येक बड़ी आकाशगंगा के केंद्र में एक महाविशालकाय ब्लैक होल स्थित होता है।
  • यह कैसे पदार्थ को ग्रहण करता है?: जब गैस और धूल के विशाल बादल ब्लैक होल की ओर सर्पिलाकार गति से बढ़ते हैं, तो वे अत्यधिक वेग के कारण आपस में घर्षण उत्पन्न करते हैं। यह घर्षण गैस को लाखों डिग्री तापमान तक गर्म कर देता है, जिससे अत्यधिक बाह्य दाब उत्पन्न होता है।
  • पदार्थ का बाहर निकलना: ब्लैक होल की ओर आकर्षित होने वाला सारा पदार्थ इवेंट होराइजन (यानी वह सीमा जहाँ से वापस आना असंभव है) के पार नहीं जाता है। तीव्र ऊष्मा एवं चुंबकीय बल इस गर्म गैस के एक बड़े भाग को ब्लैक होल पवनों (Black Hole Winds) के रूप में पुनः अंतरिक्ष में बाहर धकेल देते हैं।
  • ब्रह्मांडीय ताप-नियंत्रक: ये पवनें आकाशगंगा के लिए एक नियामक तंत्र की तरह कार्य करती हैं। निकटवर्ती ठंडी गैस को हटाकर या गर्म करके वे नए तारों के निर्माण हेतु आवश्यक कच्चे पदार्थ की उपलब्धता को कम कर देती हैं, जिससे आकाशगंगा की वृद्धि एवं विकास नियंत्रित होता है।

सैजिटेरियस A* (Sagittarius A* / Sgr A*) के बारे में

  • सैजिटेरियस A* (Sgr A*) मिल्की वे (आकाशगंगा) के ठीक केंद्र में स्थित विशिष्ट महाविशालकाय ब्लैक होल है।
  • आकार एवं दूरी: यह पृथ्वी से लगभग 26,000 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है तथा इसका द्रव्यमान लगभग 40 लाख सूर्यों के बराबर है।
  • शांत पदार्थ-ग्राही (A Quiet Eater): दूरस्थ आकाशगंगाओं के अत्यधिक चमकीले केंद्रों में स्थित सक्रिय ब्लैक होलों के विपरीत, सैजिटेरियस A* अपेक्षाकृत शांत है और बहुत कम मात्रा में पदार्थ का उपभोग करता है। इसलिए इसे एक ‘अल्प-पोषित’ (Starved) ब्लैक होल भी माना जाता है।

ऊर्जा-कुशल अगली पीढ़ी की कंप्यूटिंग के लिए ध्वनि तरंगों का उपयोग 

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इंस्टिट्यूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी (INST) के शोधकर्ताओं ने ध्वनि तरंगों (Sound Waves) का उपयोग करके स्पिन धाराओं (Spin Currents) को उत्पन्न एवं नियंत्रित करने की एक नई तकनीक विकसित की है, जो कम ऊर्जा खपत वाली अगली पीढ़ी की कंप्यूटिंग (Low-Power Next-Generation Computing) का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।

संबंधित तथ्य

  • पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक्स में सूचना के संचार एवं प्रसंस्करण के लिए विद्युत आवेश (इलेक्ट्रॉनों) की गति का उपयोग किया जाता है, जिससे ऊष्मा उत्पन्न होती है तथा ऊर्जा की हानि होती है।
  • वैज्ञानिक स्पिन्ट्रॉनिक्स (Spintronics) प्रौद्योगिकी की संभावनाओं का अन्वेषण कर रहे हैं, जिसमें सूचना का वहन विद्युत आवेश के बजाय इलेक्ट्रॉन के स्पिन (Electron Spin) द्वारा किया जाता है।
  • यह तकनीक अधिक तीव्र, ऊर्जा-कुशल तथा कम ऊर्जा खपत वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के विकास में सहायक हो सकती है।

अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष

  • ध्वनि तरंगों से स्पिन धाराएँ उत्पन्न होना: शोधकर्ताओं ने सरफेस एकॉस्टिक वेव्स (Surface Acoustic Waves – SAWs) का उपयोग करके मैग्नॉन-आधारित स्पिन धाराओं (Magnon-based Spin Currents) को उत्पन्न करने की एक नई प्रक्रिया प्रदर्शित की है।
  • मैग्नॉन्स की भूमिका: मैग्नॉन्स सूचना के कुशल वाहक के रूप में कार्य कर सकते हैं, जिनमें पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक धाराओं की तुलना में ऊर्जा हानि बहुत कम होती है।
  • ग्रैफीन-जैसा चुंबकीय पदार्थ: अध्ययन में एक दो-आयामी (2D) ग्रैफीन-समान चुंबकीय पदार्थ का उपयोग किया गया, जिसे पीजोइलेक्ट्रिक सब्सट्रेट (Piezoelectric Substrate) पर रखा गया था।
  • स्यूडो-गेज फील्ड्स (Pseudo Gauge Fields) की खोज: जब ध्वनि तरंगें पदार्थ से गुजरती हैं, तो वे सूक्ष्म विकृतियाँ उत्पन्न करती हैं जिन्हें स्यूडो-गेज फील्ड्स (Pseudo Gauge Fields) कहा जाता है। ये मैग्नॉन्स की गति को प्रभावित कर स्पिन धाराएँ उत्पन्न करते हैं।
  • नया सैद्धांतिक मॉडल: शोधकर्ताओं ने एक नया विश्लेषणात्मक मॉडल विकसित किया है, जो निम्नलिखित को आपस में जोड़ता है:
    • सरफेस एकॉस्टिक वेव्स (Surface acoustic waves)
    • मैग्नॉन ट्रांसपोर्ट (Magnon Transport)
    • क्वांटम ज्यामितीय प्रभाव (Quantum Geometric Effects)
  • महत्त्व
    • कम ऊर्जा वाली कंप्यूटिंग: भविष्य के कंप्यूटिंग उपकरणों में ऊर्जा खपत को काफी कम किया जा सकता है।
    • क्वांटम कंप्यूटिंग: कुशल क्वांटम सूचना प्रसंस्करण प्रणालियों के विकास में सहायक हो सकता है।
    • अगली पीढ़ी का संचार: न्यूनतम ऊर्जा हानि के साथ सूचना संचरण के नए तरीके संभव होंगे।
    • स्ट्रेन-इंजीनियर्ड डिवाइसेज: ऐसे उपकरणों के विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिनमें यांत्रिक विकृति से इलेक्ट्रॉनिक/चुंबकीय गुणों को नियंत्रित किया जा सके।

प्रमुख अवधारणाएँ

  • स्पिन्ट्रॉनिक्स: एक ऐसी प्रौद्योगिकी है, जो सूचना के भंडारण एवं प्रसंस्करण के लिए इलेक्ट्रॉनों के आवेश के बजाय उनके स्पिन (Spin) का उपयोग करती है, जिससे अधिक तीव्र एवं ऊर्जा-कुशल उपकरण विकसित किए जा सकते हैं।
  • मैग्नॉन्स: चुंबकीय पदार्थों में उत्पन्न कलेक्टिव स्पिन-वेव एक्साइटेशन्स (सामूहिक चक्रण-तरंग विक्षोभ) का प्रतिनिधित्व करने वाले क्वाजीपार्टिकल्स (आभासी-कण) ‘मैग्नॉन्स’ कहलाते हैं, जो न्यूनतम ऊष्मा हानि के साथ सूचना का वहन कर सकते हैं।
  • सरफेस एकॉस्टिक वेव्स: ध्वनि तरंगें जो किसी पदार्थ की सतह के साथ-साथ संचरित होती हैं तथा इलेक्ट्रॉनों और मैग्नेटिक एक्साइटेशन्स के व्यवहार को प्रभावित कर सकती हैं।
  • पीजोइलेक्ट्रिक पदार्थ: ऐसे पदार्थ जो मैकेनिकल स्ट्रेस (Mechanical Stress) या दाब लगाए जाने पर विद्युत आवेश उत्पन्न करते हैं।

सोलर कम्युनिटी हब स्किल वैन्स 

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हाल ही में भारत ने देशभर में पाँच नई सौर ऊर्जा संचालित कम्युनिटी स्किल वैन्स (Community Skill Vans) का शुभारंभ किया है।

सोलर कम्युनिटी हब स्किल वैन्स के बारे में

  • सोलर कम्युनिटी हब स्किल वैन्स सौर ऊर्जा संचालित मोबाइल शिक्षण एवं कौशल विकास केंद्र हैं, जिन्हें डेल टेक्नोलॉजीज (Dell Technologies) द्वारा राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) के सहयोग से प्रारंभ किया गया है तथा लर्निंग लिंक्स फाउंडेशन (Learning Links Foundation) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
  • उद्देश्य: इनका उद्देश्य वंचित समुदायों के बीच डिजिटल समावेशन, शिक्षा, भविष्य-उन्मुख कौशल विकास तथा रोजगार क्षमता को बढ़ावा देना है।
  • कवरेज: भारत की पहली सोलर कम्युनिटी हब स्किल वैन को वित्तीय वर्ष 2022-23 (FY23) में शुरू किया गया था।
  • विस्तार: यह पहल भारत के 14 राज्यों के 18 जिलों तक पहुँच चुकी है तथा 26.7 लाख (2.67 मिलियन) लोगों को लाभान्वित कर चुकी है।
  • वैश्विक उपस्थिति: यह कार्यक्रम 12 देशों में संचालित 63 सोलर कम्युनिटी हब स्किल वैन्स के माध्यम से लागू किया जा रहा है, जिससे यह डेल टेक्नोलॉजीज की डिजिटल समावेशन एवं कौशल विकास को बढ़ावा देने वाली सबसे बड़ी वैश्विक पहलों में से एक बन गया है।
  • हालिया विस्तार: हाल ही में उत्तर प्रदेश, दिल्ली/एनसीआर, कर्नाटक, तेलंगाना एवं महाराष्ट्र में पाँच नई कौशल वैनें तैनात की गई हैं।
  • लक्षित लाभार्थी: यह पहल मुख्य रूप से युवाओं, महिलाओं तथा हाशिए पर स्थित समुदायों को सशक्त बनाने पर केंद्रित है।

सोलर कम्युनिटी हब स्किल वैन्स की प्रमुख विशेषताएँ

  • सौर ऊर्जा संचालित मोबाइल शिक्षण केंद्र: ये वैन लैपटॉप, इंटरैक्टिव स्क्रीन, इंटरनेट कनेक्टिविटी तथा एआई-सक्षम शिक्षण उपकरणों से सुसज्जित हैं।
  • भविष्य-उन्मुख कौशल विकास: इनमें उभरती हुई उद्योग आवश्यकताओं के अनुरूप अनुकूलित प्रशिक्षण मॉड्यूल उपलब्ध कराए जाते हैं।
  • रोजगारोन्मुख मार्गदर्शन: शिक्षार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा एवं रोजगार अवसरों से जोड़ने की व्यवस्था प्रदान की जाती है।
  • समुदाय-केंद्रित मॉडल: यह पहल उन क्षेत्रों तक सीधे सेवाएँ पहुँचाती है, जहाँ डिजिटल अवसंरचना का अभाव है और समुदाय अपेक्षाकृत वंचित हैं।
  • नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग: ये वैन सौर ऊर्जा से संचालित होती हैं, जिससे सेवाओं की सतत् एवं विश्वसनीय उपलब्धता सुनिश्चित होती है।

आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) 

हाल ही में पश्चिम बंगाल, आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) को लागू करने वाला 36वाँ राज्य/केंद्रशासित प्रदेश बन गया है, जिससे यह योजना पूरे देश में क्रियान्वित हो गई है।

आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के बारे में

  • आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) विश्व की सबसे बड़ी सरकारी वित्तपोषित स्वास्थ्य बीमा योजना है, जो प्रमुख स्वास्थ्य व्ययों के विरुद्ध वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है।
  • प्रारंभ: इस योजना को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (Universal Health Coverage – UHC) को बढ़ावा देने हेतु राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 की सिफारिशों के आधार पर वर्ष 2018 में प्रारंभ किया गया था।
  • उद्देश्य: प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक स्तर की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को संबोधित करते हुए सुलभ, किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना।
  • घटक
  • हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (HWCs)
    • HWCs रोकथाम, स्वास्थ्य संवर्द्धन एवं शीघ्र निदान पर विशेष बल देते हुए व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करते हैं।
      • भारत सरकार द्वारा HWCs को आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में पुनः नामित किया गया है।
      • वर्तमान में देश के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 1.8 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हैं।
    • प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY): PM-JAY पात्र परिवारों को अस्पताल में भर्ती होने तथा उन्नत चिकित्सा उपचार हेतु वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है।
  • प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) की प्रमुख विशेषताएँ
    • स्वास्थ्य बीमा कवरेज: यह योजना द्वितीयक एवं तृतीयक स्तर के अस्पताल उपचार हेतु प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का कैशलेस स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करती है।
    • लाभार्थी: योजना के अंतर्गत 10.74 करोड़ से अधिक गरीब परिवार, अर्थात् लगभग 50 करोड़ लाभार्थी पात्र हैं।
    • पात्रता मानदंड: PM-JAY के अंतर्गत लाभार्थी पात्रता मानदंड-
      • ग्रामीण क्षेत्र: सामाजिक-आर्थिक एवं जाति जनगणना, 2011 (SECC 2011) डेटाबेस में चिह्नित ग्रामीण परिवार, जिनमें भूमिहीन श्रमिक, SC/ST परिवार, महिला-प्रधान परिवार, दिव्यांग सदस्य वाले परिवार तथा अन्य वंचित श्रेणियाँ शामिल हैं, योजना के अंतर्गत पात्र हैं।
      • शहरी क्षेत्र: स्ट्रीट वेंडर्स, घरेलू कामगार, निर्माण श्रमिक, स्वच्छता कर्मी, परिवहन कर्मी, कारीगर तथा अन्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों जैसे निर्दिष्ट कमजोर व्यवसायों से जुड़े परिवार योजना के अंतर्गत कवर किए जाते हैं।
      • आयुष्मान वय वंदना पहल के अंतर्गत 70 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के सभी भारतीय नागरिक, उनकी आय, व्यवसाय या सामाजिक-आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना, योजना के पात्र हैं।
      • कोई प्रतिबंध नहीं: परिवार के आकार, आयु या लिंग के आधार पर कोई प्रतिबंध नहीं है तथा सभी पूर्व-विद्यमान बीमारियाँ (Pre-existing Diseases) पहले दिन से ही कवर की जाती हैं।
    • देशव्यापी पोर्टेबिलिटी: पात्र लाभार्थी पैनल में शामिल सरकारी एवं निजी अस्पतालों के नेटवर्क के माध्यम से भारत में कहीं भी उपचार प्राप्त कर सकते हैं।
    • व्यापक उपचार पैकेज: योजना के अंतर्गत अस्पताल में भर्ती होने का खर्च, दवाइयाँ, डायग्नोस्टिक जाँच, ICU शुल्क, सर्जन फीस तथा अस्पताल में भर्ती होने से पूर्व एवं बाद के खर्च शामिल हैं।

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) का महत्त्व

  • कमजोर एवं वंचित परिवारों को वित्तीय सुरक्षा: यह योजना अत्यधिक चिकित्सा व्यय के आर्थिक बोझ को कम करती है तथा गरीब एवं कमजोर परिवारों को स्वास्थ्य संबंधी खर्चों के कारण गरीबी के दुष्चक्र में फँसने से बचाकर वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है।
  • सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में प्रगति: PM-JAY स्वास्थ्य सेवाओं तक समान एवं न्यायसंगत पहुँच को सुदृढ़ करती है तथा सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) एवं सतत् विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने की भारत की प्रतिबद्धता को समर्थन प्रदान करती है।
  • स्वास्थ्य अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण: यह योजना 36,000 से अधिक सूचीबद्ध अस्पतालों के विशाल नेटवर्क के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा वितरण को मजबूत बनाती है तथा देशभर में गुणवत्तापूर्ण उपचार तक बेहतर पहुँच को प्रोत्साहित करती है।

H-1B वीजा कार्यक्रम (H-1B Visa Programme)

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एक अमेरिकी संघीय न्यायालय (US Federal Court) ने उस कड़े कार्यकारी नीति (Executive Policy) को रद्द कर दिया है, जिसके तहत कंपनियों को नए H-1B वीजा जारी कराने के लिए 1,00,000 डॉलर का वार्षिक शुल्क भुगतान करने के लिए बाध्य किया गया था।

संबंधित तथ्य

  • न्यायालय ने कहा कि अमेरिकी संविधान (US Constitution) के अनुसार, कर (Tax) लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस (Congress) के पास है और राष्ट्रपति स्पष्ट संसदीय (कांग्रेसी) स्वीकृति के बिना कोई नया कर नहीं लगा सकते हैं।

H-1B वीजा कार्यक्रम के बारे में

H-1B वीजा एक अस्थायी कार्य अनुमति है, जो अमेरिकी कंपनियों को अन्य देशों के कुशल पेशेवरों को कानूनी रूप से नियुक्त करने की अनुमति देता है।

  • विशेषीकृत ज्ञान: H-1B वीजा के लिए पात्र होने हेतु किसी व्यक्ति के पास कम से कम स्नातक डिग्री तथा STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित), चिकित्सा या शिक्षण जैसे उच्च माँग वाले क्षेत्रों में विशेष कौशल होना आवश्यक है।
  • वार्षिक सीमा: अमेरिकी कांग्रेस ने सामान्य नौकरियों के लिए H-1B वीजा की संख्या प्रति वर्ष 65,000 तक सीमित कर रखी है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री प्राप्त विदेशी नागरिकों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा उपलब्ध कराए जाते हैं।
  • छूट प्राप्त नियोक्ता: विश्वविद्यालयों, सरकारी अनुसंधान प्रयोगशालाओं और गैर-लाभकारी अस्पतालों जैसी सार्वजनिक संस्थाओं पर ये वार्षिक सीमाएँ लागू नहीं होतीं। वे अपनी आवश्यकता के अनुसार कितने भी H-1B कर्मियों को नियुक्त कर सकती हैं।
  • मानक शुल्क: 1,00,000 डॉलर वाले विवादास्पद नियम से पहले, किसी कर्मचारी के लिए H-1B वीजा आवेदन करने हेतु कंपनियों को सामान्यतः 2,000 से 5,000 डॉलर तक का प्रशासनिक शुल्क देना पड़ता था।

निर्णय का भारत के आईटी क्षेत्र और सेवा निर्यात पर प्रभाव

  • प्रतिभा शृंखला को सुरक्षित बनाता है: भारतीय नागरिक प्रत्येक वर्ष स्वीकृत किए जाने वाले कुल H-1B वीज़ा में से 70% से अधिक प्राप्त करते हैं। ऐसे में, वीजा शुल्क में हुई हालिया बढ़ोतरी को वापस लिए जाने (या रद्द किए जाने) से युवा भारतीय तकनीकी प्रतिभाओं के सिलिकॉन वैली की ओर प्रवाह में आने वाली किसी भी संभावित गिरावट से बचाव हो सकेगा।
  • सेवा निर्यात को बढ़ावा देता है: अमेरिका को भारत के सॉफ्टवेयर सेवा निर्यात देश के विदेशी मुद्रा भंडार का एक प्रमुख आधार हैं।
    • तकनीकी विशेषज्ञों की तैनाती की लागत कम बनाए रखते हुए, भारतीय प्रौद्योगिकी दिग्गज (Tech Giants) अमेरिकी परामर्श (Consulting) के बड़े अनुबंध प्राप्त करना जारी रख सकते हैं, जिससे भारत का सेवा निर्यात संतुलन मजबूत और स्वस्थ बना रहेगा।

अमेरिका में प्रमुख उच्च-कुशल एवं रोजगार आधारित वीजा (H-1B के अतिरिक्त)

  • L-1 वीजा: बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा अपने विदेशी कार्यालयों से प्रबंधकों, अधिकारियों या विशेष कौशल वाले कर्मचारियों को अमेरिकी कार्यालयों में स्थानांतरित करने के लिए उपयोग किया जाता है।
  • O-1 वीजा: विज्ञान, व्यवसाय, कला, शिक्षा या खेल जैसे क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियाँ रखने वाले व्यक्तियों को जारी किया जाता है।
  • EB-2 एवं EB-3 वीजा: उच्च-कुशल पेशेवरों, उन्नत डिग्री धारकों तथा कुशल श्रमिकों के लिए रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड श्रेणियाँ हैं, जो स्थायी निवास प्राप्त करना चाहते हैं।
  • J-1 वीजा: शोधकर्ताओं, प्रोफेसरों, चिकित्सा प्रशिक्षुओं, इंटर्न्स तथा शैक्षणिक विनिमय कार्यक्रमों के प्रतिभागियों के लिए विनिमय वीजा  है।

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