संदर्भ
जर्मनी में आयोजित बॉन जलवायु सम्मेलन (SB64) के दौरान वैश्विक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा कीमतों में वृद्धि तथा जलवायु वित्त की भारी कमी के चलते वैश्विक हरित लक्ष्यों के पूरा न होने का संकट बढ़ गया है।
मुख्य बिंदु
- वित्तपोषण की माँग: स्वास्थ्य संगठन समृद्ध देशों से वर्ष 2035 तक सार्वजनिक अनुकूलन वित्त को तीन गुना बढ़ाकर 120 अरब डॉलर प्रति वर्ष करने का आह्वान कर रहे हैं, ताकि जलवायु परिवर्तन से जुड़ी स्वास्थ्य आपदाओं और जल-संकट से संवेदनशील समुदायों की रक्षा की जा सके।
- जीवाश्म ईंधनों से दूरी: वार्ताकार विकसित देशों पर दबाव डाल रहे हैं कि वे कोयला, तेल और गैस का उपयोग न करने के लिए स्पष्ट, चरणबद्ध और विस्तृत आंतरिक रोडमैप साझा करें, ताकि वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C की सीमा के भीतर बनाए रखा जा सके।
- विश्वास का संकट: इस वर्ष के अंत में COP31 की संयुक्त मेजबानी ऑस्ट्रेलिया और तुर्किए द्वारा किए जाने के कारण, वर्तमान वार्ताएँ अंतरराष्ट्रीय सद्भावना को बनाए रखने तथा संवेदनशील प्रशांत द्वीपीय नेटवर्कों की सुरक्षा पर विशेष रूप से केंद्रित हैं।
- वैश्विक प्रगति सूचक: शिखर सम्मेलन में टीमें नव-स्वीकृत 59 बेलम अनुकूलन संकेतकों तथा जस्ट ट्रांजिशन मैकेनिज्म (न्यायसंगत परिवर्तन तंत्र) को लागू करने पर कार्य कर रही हैं, ताकि यह सत्यापित किया जा सके कि स्थानीय समुदाय वास्तव में अधिक सुरक्षित हो रहे हैं और उन्हें निष्पक्ष रोजगार व पुनर्प्रशिक्षण मिल रहा है।
बॉन जलवायु सम्मेलन (SB64) के बारे में
बॉन जलवायु सम्मेलन 2026 (आधिकारिक रूप से सहायक निकायों का 64वाँ सत्र – SB64) वर्तमान में 8 जून से 18 जून, 2026 तक जर्मनी के बॉन में आयोजित किया जा रहा है।
- यह संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय (UNFCCC) के अंतर्गत आयोजित होने वाला नियमित मध्य-वर्षीय तकनीकी कार्य सत्र है।
- मुख्य उद्देश्य: प्रमुख वार्षिक जलवायु शिखर सम्मेलनों के बीच एक महत्त्वपूर्ण योजना-सेतु के रूप में कार्य करते हुए, इसका उद्देश्य केवल राजनीतिक घोषणाओं से आगे बढ़कर पेरिस समझौते के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए व्यावहारिक उपायों को अंतिम रूप देना है।
- मुख्य फोकस क्षेत्र: वर्ष 2026 के एजेंडे का केंद्र ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य प्रणालियाँ, मेथेन उत्सर्जन में कमी तथा शहरी लचीलापन के लिए वास्तविक और व्यावहारिक समाधान विकसित करना है।
भारत की उपलब्धियाँ एवं चुनौतियाँ
- सौर ऊर्जा की सफलता की कहानी
- सौर क्षमता का विशाल विस्तार: घरेलू राष्ट्रीय सौर मिशन ने अपने प्रारंभिक लक्ष्यों को काफी पीछे छोड़ दिया है, और भारत अब 1,50,000 मेगावाट (150 गीगावाट) की विशाल सौर ऊर्जा क्षमता वाला देश है।
- पिछले एक वर्ष में तीव्र वृद्धि: इस स्वच्छ ऊर्जा क्षमता में से 40,000 मेगावाट की उल्लेखनीय वृद्धि केवल पिछले एक वर्ष के दौरान हुई है।
- निजी क्षेत्र की मजबूत भागीदारी: सरकार ने निश्चित कीमतों और प्रतिफल की गारंटी देकर निजी कंपनियों के लिए वित्तीय जोखिमों को सफलतापूर्वक कम किया, जिससे बड़े पैमाने पर निजी निवेश आकर्षित हुआ।
- विकास की चुनौती
- गरीबी उन्मूलन सर्वोपरि: भारतीय राजनयिक इस बात पर जोर देते हैं कि भारत में प्रति व्यक्ति औसत आय अभी भी लगभग 3,000 डॉलर के स्तर पर है, इसलिए औद्योगिक विकास की गति अवरुद्ध नहीं हो सकती है।
- समानता की माँग: भारत का स्पष्ट मत है कि विकसित देश विकासशील देशों से अधिक महत्त्वाकांक्षी हरित लक्ष्यों की अपेक्षा नहीं कर सकते, जब तक कि वे अपने वादों के अनुरूप सस्ती वित्तीय सहायता, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण उपलब्ध न कराएँ।