संदर्भ
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2029 के चुनावों से पूर्व, परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर और विधायी प्रतिनिधित्व का विस्तार करके, महिलाओं के लिए आरक्षण को लागू करने हेतु एक मसौदा संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है।
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम‘ के कार्यान्वयन हेतु मसौदा संशोधन विधेयक के प्रमुख प्रावधान
- वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर शीघ्र परिसीमन: विधेयक में नई जनगणना की प्रतीक्षा करने के बजाय वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन का प्रस्ताव है, जिससे महिला आरक्षण के कार्यान्वयन में तेजी आएगी।
- लोकसभा की संख्या में वृद्धि: लोकसभा की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव है, जिससे प्रतिनिधित्व में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
- महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण: अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के भीतर ऊर्ध्वाधर आरक्षण सहित लगभग 273 सीटें (एक तिहाई) महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
- कार्यान्वयन की समयसीमा: इस संशोधन का उद्देश्य वर्ष 2029 के आम चुनावों से पहले आरक्षण प्रावधानों का कार्यान्वयन सुनिश्चित करना है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2023) के प्रमुख प्रावधान
- आरक्षण के लिए संवैधानिक अनिवार्यता: लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान है।
- अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति सीटों का समावेश: अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए पहले से आरक्षित सीटों में आरक्षण लागू होता है (ऊर्ध्वाधर आरक्षण)।
- शर्तों के अधीन कार्यान्वयन: कार्यान्वयन अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन से जुड़ा है।
- आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों का चक्रण: महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें बारी-बारी से आरक्षित होंगी, हालाँकि इसकी प्रक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है।
कार्यान्वयन से संबंधित मुख्य चिंताएँ
- संघीय असंतुलन संबंधी चिंताएँ: जनसंख्या आधारित परिसीमन से उत्तरी राज्यों को लाभ हो सकता है, जिससे कम प्रजनन दर वाले दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा।
- विलंब और अनिश्चितता: मूल प्रावधानों के कार्यान्वयन में देरी हुई, जिससे समय-सीमा और क्रियान्वयन को लेकर अस्पष्टता उत्पन्न हो गई।
- आरक्षित सीटों के रोटेशन पर स्पष्टता का अभाव: आरक्षित सीटों के रोटेशन पर स्पष्ट दिशा-निर्देशों का अभाव राजनीतिक निरंतरता और जवाबदेही को प्रभावित कर सकता है।
- प्रतिनिधित्व बनाम विकास पर बहस: इस बात पर बहस जारी है कि प्रतिनिधित्व केवल जनसंख्या पर आधारित होना चाहिए या इसमें सामाजिक-आर्थिक कारकों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
आगे की राह
- संतुलित परिसीमन मानदंड: जनसंख्या, विकास संकेतक और जनसांख्यिकीय प्रदर्शन को शामिल करते हुए एक मिश्रित सूत्र अपनाएँ।
- स्पष्ट परिचालन ढाँचा: निष्पक्षता और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों के रोटेशन के लिए पारदर्शी नियम परिभाषित करें।
- महिलाओं की राजनीतिक क्षमता को सुदृढ़ करना: महिलाओं की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए नेतृत्व प्रशिक्षण, पार्टी स्तर पर समर्थन और वित्तीय सहायता को बढ़ावा दें।
निष्कर्ष
महिलाओं के लिए आरक्षण का समयबद्ध और संतुलित कार्यान्वयन समावेशी लोकतंत्र को सुदृढ़ करने के साथ-साथ संघीय समानता तथा राजनीतिक स्थिरता को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।