UPSC PYQs

Prelims, Mains & Optional PYQs

UPSC Notes

Comprehensive & Short Notes

‘एम्परर पेंगुइन’ एक संकेतक प्रजाति घोषित

13 Apr 2026

संदर्भ

हाल ही में अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) ने ‘एम्परर पेंगुइन’ (Emperor Penguin) को लुप्तप्राय (Endangered) श्रेणी में सूचीबद्ध किया है, जो जलवायु परिवर्तन के लिए इसकी संकेतक प्रजाति (Sentinel Species) के रूप में भूमिका को रेखांकित करता है।

संकेतक प्रजातियों (Sentinel Species) के बारे में

  • संकेतक प्रजातियाँ वे जीव होते हैं, जिनका स्वास्थ्य और संख्या प्रवृत्तियाँ किसी पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिति को दर्शाती हैं।
  • ये प्रदूषण, रोग और जलवायु परिवर्तन जैसे पर्यावरणीय तनाव के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के रूप में कार्य करती हैं।
  • इनकी प्रतिक्रियाएँ अन्य प्रजातियों की तुलना में तीव्र और अधिक स्पष्ट होती हैं, जिससे पारिस्थितिकी स्वास्थ्य की निगरानी में सहायता मिलती है।
  • संकेतक प्रजातियों की विशेषताएँ
    • पर्यावरणीय परिवर्तनों के प्रति उच्च संवेदनशीलता: इनमें ऐसे शारीरिक गुण होते हैं, जो इन्हें विषाक्त पदार्थों, रोगजनकों या तापमान परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनाते हैं।
    • विषाक्त पदार्थों का जैव-संचयन: ये खाद्य शृंखला में अपनी स्थिति के कारण समय के साथ प्रदूषकों का संचय करती हैं।
      • यह दीर्घकालिक पर्यावरणीय प्रदूषण की पहचान में सहायक होता है।
    • स्पष्ट और मापनीय प्रतिक्रियाएँ: ये जनसंख्या में गिरावट, विकृतियाँ या प्रजनन विफलता जैसे स्पष्ट परिवर्तन प्रदर्शित करती हैं।
      • इनका अवलोकन और अध्ययन अपेक्षाकृत सरल होता है।
  • संकेतक प्रजातियों के उदाहरण एवं पारिस्थितिकी तंत्र
    • मेंढक (मीठे जल का पारितंत्र): पारगम्य त्वचा के कारण कीटनाशकों और रोगजनकों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील।
    • मधुमक्खियाँ (कृषि पारितंत्र): कीटनाशकों की अधिकता और परागण स्वास्थ्य का संकेत देती हैं।
    • ध्रुवीय भालू (आर्कटिक पारितंत्र): जलवायु परिवर्तन और प्रदूषकों के संचय को दर्शाते हैं।
    • लाइकेन (स्थलीय पारितंत्र): वायु प्रदूषण और अम्लीय वर्षा के संकेतक।

‘एम्परर पेंगुइन’ (Aptenodytes forsteri) के बारे में

  • एम्परर पेंगुइन (Aptenodytes forsteri) के बारे में: एम्परर पेंगुइन जीवित पेंगुइन प्रजातियों में सबसे लंबा और सबसे भारी होता है।
    • इसका लगभग 10 लाख वर्ष पूर्व उद्भव हुआ और यह अंटार्कटिक की चरम परिस्थितियों के लिए अत्यधिक अनुकूलित है।

1 15

  • वितरण: यह अंटार्कटिक तथा उसके आस-पास के उप-अंटार्कटिक द्वीपों में पाया जाता है।
    • इसके प्रजनन उपनिवेश अंटार्कटिक तटरेखा (66°–78° दक्षिण अक्षांश) के साथ संरेखित हैं।
  • आवास: ज्यादातर बर्फ-अनुकूलित पेंगुइन प्रजातियाँ, जो मुख्य रूप से पैक आइस (Pack Ice) और उसके आसपास के समुद्री क्षेत्रों में रहती हैं, उनमें एम्परर पेंगुइन और अडेली पेंगुइन (Adelie Penguin) सबसे प्रमुख हैं।
    • एम्परर पेंगुइन अपना पूरा जीवन अंटार्कटिक की बर्फ और महासागर पर बिताता है।
    • पैक आइस (Pack Ice): यह वह जमी हुई समुद्री बर्फ होती है जो समुद्र की सतह पर तैरती है। पेंगुइन इसका उपयोग आराम करने, शिकार से बचने और भोजन की तलाश के लिए आधार के रूप में करते हैं।
  • विशेषताएँ
    • भौतिक विशेषताएँ: यह उड़ने में अक्षम प्रजाति है, जिसका शरीर सुव्यवस्थित तथा पंख तैरने हेतु ‘फ्लिपर’ के समान होते हैं।
      • इसका रंग काला-सफेद होता है तथा सिर और गर्दन पर पीले-नारंगी धब्बे होते हैं।
    • शीतकालीन अनुकूलन
      • पंखों की दो परतें
      • मोटा वसा भंडार (fat reserves)
      • ऊष्मा हानि को कम करने के लिए छोटी चोंच और फ्लिपर
    • विशिष्ट क्षमताएँ: लगभग 550 मीटर तक गोता लगाने में सक्षम, जिससे यह सबसे गहराई तक गोता लगाने वाला पक्षी है।
      • अत्यधिक ठंड में ऊष्मा संरक्षण हेतु ‘हडलिंग’  संबंधी व्यवहार प्रदर्शित करता है।
      • प्रजनन और भोजन चक्र के दौरान तेजी से वजन बढ़ता/घटता है।
    • आहार: मांसाहारी (पिस्किवोर और मोलस्किवोर)
      • मछली, क्रिल और स्क्विड का सेवन करता है।
    • प्रजनन: विशिष्ट प्रजनन व्यवहार के लिए जाना जाता है, नर अत्यधिक ठंड में अंडों को सेते हैं।
      • प्रजनन काल अप्रैल से नवंबर (अंटार्कटिक शीतकाल)
    • आयु: लगभग 15–20 वर्ष
  • संकेतक प्रजाति के रूप में भूमिका
    • जलवायु परिवर्तन का संकेतक: अंटार्कटिक में तापमान वृद्धि के रुझानों को दर्शाता है।
      • संख्या में गिरावट समुद्री बर्फ के पिघलने से जुड़ी है।
    • पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलन का संकेत: पेंगुइन  की संख्या में परिवर्तन समुद्री खाद्य शृंखला (क्रिल की उपलब्धता) में व्यवधान को दर्शाता है।
    • दीर्घकालिक पर्यावरणीय निगरानी: भविष्य के जलवायु पूर्वानुमानों के संकेत प्रदान करता है, जहाँ अध्ययनों के अनुसार, 2080 के दशक तक इनकी संख्या में उल्लेखनीय गिरावट हो सकती है।
  • मुख्य खतरे
    • जलवायु परिवर्तन और समुद्री बर्फ का पिघलना
    • खाद्य उपलब्धता में व्यवधान।
  • संरक्षण स्थिति: IUCN द्वारा लुप्तप्राय (Endangered) के रूप में सूचीबद्ध।
‘एम्परर पेंगुइन’ एक संकेतक प्रजाति घोषित

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Free Counselling for UPSC Aspirants

Connect with our experts and take the right next step.

Expert Guidance
Personalized Strategy
100% Free

Book Your Free Session

NEED ASSISTANCE?

Request a Callback

Our counsellor will connect with you and help you choose the right course and centre.

  • Expert Guidance
  • Course & Fee Information
  • Quick Callback Support

Request a Callback

Books
UPSC PYQs
UPSC Notes
Current Affairs
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.