UPSC PYQs

Prelims, Mains & Optional PYQs

UPSC Notes

Comprehensive & Short Notes

तमिलनाडु की सीफूड यूनिट में अमोनिया गैस का रिसाव

22 Jun 2026

संदर्भ

हाल ही में, तमिलनाडु के पेरियापालयम में झींगा प्रोसेसिंग यूनिट में अमोनिया गैस लीक होने से कई लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। इस घटना ने भारत में केमिकल से जुड़ी आपदाओं की तैयारी और औद्योगिक सुरक्षा प्रबंधन में मौजूद कमियों को उजागर किया है।

5 17

मुख्य अवधारणाएँ और जोखिम प्रोफाइल

  • वर्गीकरण एक आपदा के रूप में: यह घटना रासायनिक औद्योगिक आपदा के रूप में वर्गीकृत है—मानव-निर्मित आपदाओं की वह श्रेणी जिसमें यांत्रिक, संरचनात्मक, या प्रणालीगत तकनीकी विफलताओं के कारण खतरनाक पदार्थों का अचानक उत्सर्जन होता है।
  • ऐतिहासिक और समकालीन उदाहरण
    • भोपाल गैस त्रासदी (1984): भारत की सबसे बड़ी औद्योगिक आपदाओं में से एक, जो एक कीटनाशक संयंत्र से अत्यंत विषैली मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस के घातक रिसाव के कारण हुई।
    • विशाखापत्तनम गैस रिसाव (2020): कोविड-19 लॉकडाउन के बाद संचालन दोबारा शुरू होने के दौरान आंध्र प्रदेश स्थित एलजी पॉलिमर्स संयंत्र में खतरनाक स्टाइरीन गैस के रिसाव से हुई एक प्रमुख विषाक्त रासायनिक दुर्घटना।
  • अमोनिया (NH) का खतरा प्रोफ़ाइल
    • विशेषताएँ: अमोनिया (NH₃) एक विषैली, रंगहीन गैस है, जिसकी गंध अत्यधिक तीखी, चुभने वाली और दम घोंटने वाली होती है।
    • औद्योगिक उपयोग: समुद्री खाद्य पदार्थ (सी-फूड) जल्दी खराब हो जाते हैं, इसलिए उन्हें तुरंत फ्रीज करना आवश्यक होता है।
      • अमोनिया अपनी उच्च शीतलन क्षमता, कम परिचालन लागत तथा ओजोन-क्षयकारी सिंथेटिक क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) की तुलना में बेहतर पर्यावरणीय प्रदर्शन (शून्य ओजोन क्षय क्षमता) के कारण औद्योगिक रेफ्रिजरेंट (शीतलक) के रूप में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
    • स्वास्थ्य पर प्रभाव: अमोनिया गैस के साँस के साथ शरीर में प्रवेश करने पर श्वसन तंत्र में गंभीर रासायनिक जलन होती है, जिससे तीव्र साँस लेने में कठिनाई, रासायनिक न्यूमोनाइटिस (फेफड़ों की सूजन), फेफड़ों को गंभीर क्षति तथा अधिक मात्रा में संपर्क होने पर दम घुटने (अस्फिक्सिया) का खतरा उत्पन्न हो सकता है।

6 14

हैबर-बॉश प्रक्रिया

  • हैबर-बॉश प्रक्रिया: इस प्रक्रिया में वायुमंडलीय नाइट्रोजन (N₂) की हाइड्रोजन (H₂) के साथ अभिक्रिया कराकर अमोनिया (NH₃) का निर्माण किया जाता है।
  • इस प्रक्रिया में लौह उत्प्रेरक का उपयोग किया जाता है तथा इसे उच्च तापमान और उच्च दाब पर संचालित किया जाता है।

7 15

हैबर-बॉश प्रक्रिया के प्रमुख प्रभाव

  • खाद्य उत्पादन में वृद्धि: हैबर-बॉश प्रक्रिया के माध्यम से अमोनिया का बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव हुआ। अमोनिया कृत्रिम (सिंथेटिक) उर्वरकों का प्रमुख घटक है, जिससे फसलों की उपज में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और तेजी से बढ़ती वैश्विक जनसंख्या के लिए पर्याप्त खाद्य उत्पादन संभव हो सका।
  • कृत्रिम नाइट्रोजन उर्वरक: इस प्रक्रिया के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 10 करोड़ टन (100 मिलियन टन) नाइट्रोजन वायुमंडल से लेकर उसे 16.5 करोड़ टन (165 मिलियन टन) रिएक्टिव नाइट्रोजन उर्वरकों में परिवर्तित किया जाता है। यह मात्रा प्राकृतिक जैविक प्रक्रियाओं द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले नाइट्रोजन से भी अधिक है।
  • जनसंख्या वृद्धि में योगदान: अनुमान है कि आज विश्व की लगभग एक-तिहाई जनसंख्या ऐसे खाद्यान्न पर निर्भर है, जिनका उत्पादन इस प्रक्रिया से बने नाइट्रोजन उर्वरकों की सहायता से होता है। यदि यह प्रक्रिया न होती, तो विश्व में अकाल और कुपोषण की समस्या कहीं अधिक गंभीर होती।
  • पारिस्थितिक तंत्र पर प्रभाव: उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से अतिरिक्त नाइट्रोजन पर्यावरण को नुकसान पहुँचाती है। इसके कारण अम्लीय वर्षा, मृदा क्षरण, जल स्रोतों का प्रदूषण तथा यूट्रोफिकेशन के कारण जलीय पारिस्थितिक तंत्रों में ऑक्सीजन की कमी जैसी गंभीर पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।

भारत में वैधानिक एवं संस्थागत ढाँचा

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) रासायनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा रासायनिक खतरों के सक्रिय एवं प्रभावी प्रबंधन के लिए बहु-स्तरीय कानूनी एवं संस्थागत ढाँचे का प्रावधान करता है।

  • आपदा प्रबंधन: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत लागू, जो राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) तथा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) को आपातकालीन प्रतिक्रिया, तैयारी एवं शमन उपायों की निगरानी और संचालन का अधिकार प्रदान करता है।
  • रासायनिक सुरक्षा: पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत विनियमित, जो औद्योगिक गतिविधियों में पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों के लिए एक व्यापक कानून के रूप में कार्य करता है।
  • खतरनाक रसायनों का प्रबंधन: विनिर्माण, भंडारण एवं खतरनाक रसायनों के आयात नियम (MSIHC Rules), 1989 के अंतर्गत नियंत्रित, जो खतरनाक रसायनों के भंडारण की सीमा (इन्वेंट्री थ्रेशहोल्ड) एवं प्रबंधन को विनियमित करते हैं।
  • आपातकालीन योजना: रासायनिक दुर्घटना (आपातकालीन योजना, तैयारी एवं प्रतिक्रिया) नियम, 1996 के अंतर्गत निर्धारित, जो बहु-स्तरीय संकट प्रबंधन एवं आपातकालीन योजना को अनिवार्य बनाते हैं।
  • कार्यस्थल सुरक्षा: कारखाना अधिनियम, 1948 तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियाँ संहिता, 2020 अंतर्गत संचालित किया जाता है।
  • पीड़ितों को मुआवजा: लोक दायित्व बीमा अधिनियम, 1991 के अंतर्गत प्रावधान किया गया है। यह अधिनियम खतरनाक पदार्थों का उपयोग करने वाले उद्योगों के लिए सार्वजनिक दायित्व बीमा अनिवार्य करता है, ताकि दुर्घटना से प्रभावित लोगों को तत्काल राहत एवं मुआवजा उपलब्ध कराया जा सके।

आपदा प्रबंधन चक्र का विश्लेषण

  • रोकथाम एवं शमन: संस्थागत सुरक्षा ऑडिट को सुदृढ़ बनाना, उपकरणों के लेआउट ब्लूप्रिंट का सत्यापन करना, स्वचालित गैस रिसाव पहचान (लीक डिटेक्शन) प्रणाली स्थापित करना तथा यांत्रिक विफलताओं को रोकने के लिए सभी नियामकीय मानकों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करना।
  • तैयारी: ऑन-साइट आपातकालीन योजना (कारखाना संचालक द्वारा तैयार) तथा ऑफ-साइट आपातकालीन योजना (आसपास के समुदाय के लिए जिला प्रशासन द्वारा तैयार) को अनिवार्य रूप से तैयार करना। इसके साथ ही उद्योग कर्मियों, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA), अग्निशमन सेवाओं तथा पुलिस की संयुक्त भागीदारी से नियमित मॉक ड्रिल आयोजित करना आवश्यक है।
  • प्रतिक्रिया: क्षेत्रीय प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग तथा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की CBRN (रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल एवं परमाणु) विशेषज्ञ टीमों के बीच त्वरित बहु-एजेंसी समन्वय स्थापित कर सुरक्षित निकासी तथा प्राथमिक चिकित्सा एवं रोगी वर्गीकरण सुनिश्चित करना।
  • पुनर्प्राप्ति एवं पुनर्वास: प्रभावित लोगों को अनुग्रह राशि (Ex gratia)/सांत्वना राशि प्रदान करना, श्वसन संबंधी विशेष चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराना तथा परिचालन संबंधी लापरवाही के लिए दोषियों की शीघ्र आपराधिक जवाबदेही सुनिश्चित करना।

रासायनिक आपदा प्रबंधन की प्रमुख चुनौतियाँ

  • कमजोर नियामकीय अनुपालन: अनेक औद्योगिक इकाइयाँ सुरक्षा मानकों को सक्रिय उपाय के बजाय केवल औपचारिकता के रूप में अपनाती हैं। संयंत्र की स्वीकृति, गैस रिसाव पहचान प्रणाली, चेतावनी तंत्र तथा आपातकालीन अवसंरचना में संभावित कमियों की गहन जाँच आवश्यक है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन खामियों ने दुर्घटना की गंभीरता तो नहीं बढ़ाई।
  • अपर्याप्त आपातकालीन अवसंरचना: दूरस्थ खाद्य-प्रसंस्करण एवं औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित इकाइयाँ अक्सर शहरों से दूर होती हैं, जहाँ स्वचालित क्षेत्रीय चेतावनी (टेलीमेट्री) प्रणाली तथा श्वसन संबंधी विशेष चिकित्सा सुविधाओं तक तत्काल पहुँच उपलब्ध नहीं होती।
  • संस्थागत सुरक्षा संस्कृति का अभाव: कारखानों में कार्यरत निम्न-आय वर्ग के श्रमिकों को प्रायः रासायनिक सुरक्षा संकेतों को समझने तथा आपात स्थिति में त्वरित निकासी की प्रक्रिया का पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया जाता।
  • अंतर्राज्यीय प्रवासी श्रमिकों की संवेदनशीलता: अंतर्राज्यीय प्रवासी श्रमिकों को भाषा संबंधी बाधाओं, स्थानीय सामाजिक सुरक्षा तंत्र तक सीमित पहुँच तथा खतरनाक रसायनों के भंडारण टैंकों के निकट स्थित फैक्ट्री परिसर में आवास मिलने के कारण अधिक जोखिम का सामना करना पड़ता है।

वैश्विक कार्यवाहियाँ एवं पहल

  • ग्लोबल फ्रेमवर्क ऑन केमिकल्स: सितंबर 2023 में रसायन प्रबंधन पर पाँचवें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (ICCM-5) के दौरान बॉन घोषणा के साथ अपनाया गया। इसका उद्देश्य रसायनों के पूरे जीवनचक्र के दौरान श्रमिकों को विषैले रासायनिक खतरों से सुरक्षित रखने हेतु 28 प्रमुख लक्ष्यों को प्राप्त करना है।
  • अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) का कन्वेंशन संख्या 174: प्रमुख औद्योगिक दुर्घटनाओं की रोकथाम कन्वेंशन, 1993, जो प्रमुख जोखिम वाले औद्योगिक प्रतिष्ठानों की पहचान तथा नियोक्ताओं के सुरक्षा संबंधी दायित्वों के लिए वैश्विक मानक निर्धारित करता है।
  • UNEP का केमिकल एक्सीडेंट प्रिवेंशन एंड प्रिपेयर्डनेस (CAPP) कार्यक्रम: यह कार्यक्रम विकासशील देशों को सुदृढ़ कानूनी एवं संस्थागत व्यवस्था के माध्यम से रासायनिक दुर्घटनाओं की रोकथाम तथा प्रभावी तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता विकसित करने में सहायता प्रदान करता है।
  • आपदा जोखिम न्यूनीकरण हेतु सेंदाई फ्रेमवर्क (Sendai Framework for Disaster Risk Reduction 2015–2030): यह प्राकृतिक तथा मानव-जनित/तकनीकी आपदाओं के लिए जोखिम शासन और आपदा तैयारी को सुदृढ़ बनाने पर बल देता है, ताकि ‘बिल्ड बैक बेटर’ के सिद्धांत के अनुरूप पुनर्निर्माण और पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके।

आगे की राह 

वैश्विक कार्यवाहियाँ एवं पहल

  • सक्रिय जोखिम शासन: रासायनिक सुरक्षा को दुर्घटना के बाद मुआवजा देने की व्यवस्था से आगे बढ़ाकर रोकथाम-आधारित निगरानी पर केंद्रित करना। इसके लिए वास्तविक समय गैस रिसाव पहचान प्रणाली तथा जिला आपातकालीन नियंत्रण कक्षों से जुड़ी स्वचालित चेतावनी व्यवस्था विकसित करना।
  • कानूनी प्रावधानों का प्रभावी प्रवर्तन: MSIHC नियम एवं रासायनिक दुर्घटना (आपातकालीन योजना, तैयारी एवं प्रतिक्रिया) नियम (EPPR Rules) का कठोरता से पालन सुनिश्चित करना तथा श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियाँ संहिता, 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में तेजी लाना।
  • आवास एवं खतरनाक क्षेत्रों का पृथक्करण: श्रमिक आवासीय परिसरों तथा खतरनाक रसायनों के भंडारण स्थलों के बीच पर्याप्त एवं अनिवार्य भौगोलिक दूरी सुनिश्चित करना।
  • सामुदायिक जोखिम संचार: बहुभाषी चेतावनी संकेतक विकसित करना, स्वचालित सायरन प्रणाली स्थापित करना तथा सामुदायिक आधारित आपदा प्रबंधन (Community-Based Disaster Management- CBDM) के माध्यम से स्थानीय स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित एवं सशक्त बनाना।

निष्कर्ष

तिरुवल्लूर अमोनिया गैस रिसाव यह स्पष्ट करता है कि औद्योगिक सुरक्षा के क्षेत्र में दुर्घटना के बाद की प्रतिक्रिया से आगे बढ़कर सक्रिय एवं निवारक सुरक्षा व्यवस्था अपनाना समय की आवश्यकता है। विशेषकर अंतर्राज्यीय प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कठोर नियामकीय अनुपालन, त्वरित जवाबदेही तथा प्रौद्योगिकी-आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को प्रभावी ढंग से लागू करना आवश्यक है, ताकि आर्थिक विकास मानव जीवन की कीमत पर न हो।

तमिलनाडु की सीफूड यूनिट में अमोनिया गैस का रिसाव

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Free Counselling for UPSC Aspirants

Connect with our experts and take the right next step.

Expert Guidance
Personalized Strategy
100% Free

Book Your Free Session

NEED ASSISTANCE?

Request a Callback

Our counsellor will connect with you and help you choose the right course and centre.

  • Expert Guidance
  • Course & Fee Information
  • Quick Callback Support

Request a Callback

Books
UPSC PYQs
UPSC Notes
Current Affairs
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.