संदर्भ
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने ‘टीम कल्कि’ नामक एक अखिल भारतीय डार्कनेट ड्रग नेटवर्क का भंडाफोड़ किया, जिससे नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए क्रिप्टोकरेंसी और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म के उपयोग का खुलासा हुआ।
संबंधित तथ्य
- टीम कल्की एन्क्रिप्टेड संचार प्लेटफॉर्मों और क्रिप्टोकरेंसी लेन-देन के माध्यम से कार्य करती थी।
डार्कनेट (Darknet) के बारे में
- डार्कनेट एक ऐसा गुप्त इंटरनेट प्लेटफॉर्म है, जिसका इस्तेमाल नशीले पदार्थों की बिक्री, अश्लील सामग्री के आदान-प्रदान और अन्य अवैध गतिविधियों के लिए किया जाता है। यह प्लेटफॉर्म कानून प्रवर्तन एजेंसियों की निगरानी से बचने के लिए गुप्त नेटवर्क (ToR) का उपयोग करता है।
- डार्कनेट ड्रग सिंडिकेट संगठित आपराधिक नेटवर्क को संदर्भित करता है, जो नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए डार्क वेब की गुमनामी का लाभ उठाते हैं। वे अक्सर भुगतान के लिए क्रिप्टोकरेंसी और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के लिए एन्क्रिप्टेड संचार प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं।
आमतौर पर तस्करी की जाने वाली दवाएँ
- लाइसर्जिक एसिड डायथाइलमाइड (LSD ब्लॉटर्स): एर्गोट कवक से प्राप्त एक शक्तिशाली कृत्रिम मतिभ्रम उत्पन्न करने वाला पदार्थ।
- यह धारणा, मनोदशा और सोच को बदल देता है, जिससे संवेदनशील व्यक्तियों में मतिभ्रम, घबराहट के दौरे, चिंता और संभावित मनोविकार हो सकता है।
- 3,4-मिथाइलेनेडियोक्सीमेथैम्फेटामाइन (MDMA गोलियाँ): एक कृत्रिम उत्तेजक और सहानुभूति पैदा करने वाला पदार्थ है, जो सेरोटोनिन, डोपामाइन और नॉरएड्रेनालिन को बढ़ाता है।
- स्वास्थ्य जोखिमों में निर्जलीकरण, अतिताप, हृदय गति रुकना, तंत्रिका विषाक्तता और उपयोग के बाद अवसाद या स्मृति हानि शामिल हैं।
- तरल MDMA: वितरण या आगे की प्रक्रिया के लिए उपयोग किया जाने वाला एक सांद्रित एमडीएमए घोल।
- बड़ी मात्रा में सेवन से गंभीर विषाक्तता, तंत्रिका तंत्र को हानि और संभावित रूप से घातक ओवरडोज का खतरा काफी बढ़ जाता है।
- एम्फेटामाइन: एक शक्तिशाली कृत्रिम उत्तेजक है, सतर्कता और ऊर्जा बढ़ाता है।
- लंबे समय तक प्रयोग कीलत, हृदय संबंधी समस्याएँ, भ्रम, मतिभ्रम और सेवन बंद करने पर अत्यधिक थकान हो सकती है।
- चारस (कैनाबिस रेजिन): टेट्राहाइड्रोकैनाबिनोल (THC) से भरपूर एक गाढ़ा कैनबिस उत्पाद।
- इसके दुष्प्रभावों में याददाश्त में कमी, चिंता, भ्रम, समन्वय में कमी और संभावित मनोवैज्ञानिक निर्भरता शामिल हैं।
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नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के बारे में
- नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो भारत की मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध मादक पदार्थों के सेवन से निपटने वाली सर्वोच्च एजेंसी है।
- स्थापना: 17 मार्च 1986, NDPS अधिनियम, 1985 की धारा 4(3) के अंतर्गत।
- मुख्यालय: नई दिल्ली।
- मुख्य कार्य
- समन्वय: केंद्रीय और राज्य स्तरीय प्रवर्तन निकायों के समन्वय हेतु नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है।
- खुफिया जानकारी और प्रवर्तन: देशव्यापी स्तर पर मादक पदार्थों के नेटवर्क के विरुद्ध खुफिया जानकारी एकत्र करता है और अभियान चलाता है।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग: अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए इंटरपोल और संयुक्त राष्ट्र औषधि एवं अपराध कार्यालय जैसी वैश्विक एजेंसियों के साथ मिलकर कार्य करता है।
- डार्कनेट ड्रग सिंडिकेट पर हालिया अभियान
- ऑपरेशन केटामेलॉन (2025): NCB ने “केटामेलॉन” के नेतृत्व वाले एक लेवल-4 भारतीय डार्कनेट ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया।
- अधिकारियों ने LSD, केटामाइन और 70 लाख रुपये की क्रिप्टोकरेंसी जब्त की और ब्लॉकचेन विश्लेषण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से यूके स्थित डॉ. स्यूस कार्टेल से इसके संबंधों का खुलासा किया।
- ऑपरेशन जाम्बाडा (2023): NCB ने भारत के सबसे बड़े डार्कनेट LSD तस्करी नेटवर्क, “जाम्बाडा कार्टेल” का भंडाफोड़ किया, जिसमें 29,000 से अधिक LSD ब्लॉटर्स और 472 ग्राम MDMA जब्त किए गए, और क्रिप्टोकरेंसी-आधारित अंतरराष्ट्रीय ड्रग आपूर्ति शृंखला को बाधित किया।