संदर्भ
हाल ही में ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने भारतीय प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर भारत का दौरा किया।
ब्राजील के राष्ट्रपति के दौरे के प्रमुख परिणाम (2026)
- भविष्य के लिए डिजिटल साझेदारी पर संयुक्त घोषणा: यह डिजिटल रूप से सशक्त भविष्य के लिए एक रणनीतिक ढाँचा स्थापित करती है।
- इसका एक प्रमुख आधार ओपन प्लैनेटरी इंटेलिजेंस नेटवर्क (OPIN) है, जो जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई और सतत् विकास लक्ष्यों को गति देने के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) का लाभ उठाने का प्रयास करता है।

- व्यापार और आर्थिक सहयोग: भारत और ब्राजील ने वर्ष 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर के पूर्व लक्ष्य से बढ़ाकर 30 अरब डॉलर करने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
- महत्त्वपूर्ण खनिज और रेअर अर्थ मेटल्स: रेअर अर्थ मेटल्स और महत्त्वपूर्ण खनिजों में मूल्य शृंखलाओं को सुरक्षित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए, जो हरित ऊर्जा और उच्च-तकनीकी विनिर्माण की ओर संक्रमण के लिए आवश्यक हैं।
- यह इस्पात आपूर्ति शृंखला के लिए खनन पर एक विशिष्ट समझौते द्वारा पूरक है।
- रणनीतिक स्वास्थ्य सहयोग: नियामक अनुमोदनों में तेजी लाने के लिए ब्राजील की स्वास्थ्य नियामक एजेंसी (ANVISA) और भारत के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के बीच एक महत्त्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
- इसके अतिरिक्त, फियोक्रूज और बायोकॉन तथा ल्यूपिन जैसी भारतीय कंपनियों के बीच निजी क्षेत्र की साझेदारियाँ सामाजिक रूप से निर्धारित और कैंसर संबंधी रोगों के लिए अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर केंद्रित हैं।
- पारंपरिक ज्ञान डिजिटल पुस्तकालय (TKDL) तक पहुँच: बौद्धिक संपदा अधिकारों के लिए एक महत्त्वपूर्ण कदम के रूप में, ब्राजील के राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा संस्थान (INPI) को भारत के पारंपरिक ज्ञान डिजिटल पुस्तकालय तक पहुँच प्रदान की गई है, जो वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) द्वारा प्रबंधित एक डेटाबेस है, ताकि प्राचीन औषधीय ज्ञान के दुरुपयोग को रोका जा सके।
- रक्षा एवं समुद्री सुरक्षा: नेताओं ने स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों के रखरखाव के लिए मझगाँव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और दोनों नौसेनाओं के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन का स्वागत किया, जो भारत की आत्मनिर्भर भारत पहल को ब्राजील के रक्षा औद्योगिक आधार से जोड़ता है।
भारत-ब्राजील संबंधों के बारे में
- ऐतिहासिक और सभ्यतागत आधार
- पाँच शताब्दियों का जुड़ाव: यह संबंध 16वीं शताब्दी से जुड़ा है, जब गोवा और ब्राजील पुर्तगाली साम्राज्य के महत्त्वपूर्ण केंद्र थे।
- यह विरासत साझा खान-पान की परंपराओं, वस्त्रों के पैटर्न और स्थापत्य कला के रूपांकनों में संरक्षित है, जो एक लंबे समय से चले आ रहे समुद्री आदान-प्रदान को दर्शाते हैं।
- ‘गिर’ संबंध: ब्राजील के अधिकांश मवेशी भारतीय मूल के हैं (गिर और कंकरेज जैसी जेबू नस्लें)।
- यह आनुवंशिक संबंध ब्राजील के अरबों डॉलर के कृषि व्यवसाय का आधार बना हुआ है और जैविक कूटनीति का एक अनूठा प्रतीक है।
- आधुनिक सौम्य शक्ति: 21वीं शताब्दी में लोकप्रिय टेलीनोवेला ‘कैमिन्हो दास इंडियास’ (पाथ ऑफ इंडिया) ने भारत के प्रति जागरूकता में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया, जबकि सल्वाडोर में ‘फिलहोस दे गांधी’ (गांधी के पुत्र) विश्व प्रसिद्ध ब्राजीलियन कार्निवल में गांधीवादी अहिंसा के सिद्धांतों को एकीकृत करना जारी रखे हुए है।
- राजनीतिक सहयोग और बहुपक्षीय नेतृत्व
- पारस्परिक बहुपक्षवाद: दोनों राष्ट्र सामरिक स्वायत्तता के सिद्धांत पर एकमत हैं और द्विध्रुवीय विश्व व्यवस्था में हाशिए पर धकेले जाने से इनकार करते हैं। ब्राजील की विदेश नीति अक्सर भारत के बहुध्रुवीय वैश्विक दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती है।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार (G4): G4 (भारत, ब्राजील, जर्मनी, जापान) के सदस्य के रूप में, दोनों राष्ट्र, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए संयुक्त रूप से प्रयास तेज कर रहे हैं, यह तर्क देते हुए कि लगभग 1.6 अरब लोगों की संयुक्त आबादी को बाहर रखने वाले निकाय में वैश्विक प्रभावशीलता और वैधता की कमी है।
- ब्रिक्स की अध्यक्षता 2026: भारत की वर्तमान अध्यक्षता में, “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के निर्माण” पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- राष्ट्रपति लूला ने भारत के मानवता-प्रथम दृष्टिकोण के लिए पूर्ण समर्थन का वादा किया है, यह सुनिश्चित करते हुए कि ब्रिक्स और आईबीएसए (भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका) मंच समावेशी विकास की आवाज बने रहें।
- संसदीय कूटनीति: उच्च स्तरीय आदान-प्रदान अपने चरम पर पहुँच गया है, जिसमें स्पीकर ओम बिरला ने ब्रासीलिया में ब्रिक्स संसदीय मंच (जून 2025) में एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया और डॉ. शशि थरूर ने वर्ष 2025 के पहलगाम हमले के बाद आतंकवाद विरोधी तंत्रों पर चर्चा करने के लिए एक रणनीतिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।
- आर्थिक और ऊर्जा संबंध
- ब्राजील लैटिन अमेरिका में भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार बना हुआ है और दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक 30 अरब अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य रखा है।
- व्यापारिक गतिशीलता: वित्त वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 12.20 अरब अमेरिकी डॉलर का रहा। भारत का निर्यात 6.77 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया (जिसमें जैविक रसायन, डीजल और फार्मास्यूटिकल्स का वर्चस्व रहा), जबकि ब्राजील से आयात 5.43 अरब अमेरिकी डॉलर रहा (कच्चा पेट्रोलियम, सोयाबीन तेल और सोना)।
- निवेश का प्रभाव: ब्राजील में भारतीय निवेश 6 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया है, जिसमें टीसीएस, इन्फोसिस और सन फार्मा जैसी दिग्गज कंपनियाँ शामिल हैं।
- दूसरी ओर, भारत में ब्राजील का कुल निवेश लगभग 1 अरब अमेरिकी डॉलर है, जिसमें वेले (खनन) और WEG (इलेक्ट्रिक मोटर्स) जैसी कंपनियाँ अग्रणी हैं।
- तेल और गैस का तालमेल: ब्राज़ील अमेरिका में भारत का सबसे बड़ा अपस्ट्रीम तेल निवेश गंतव्य है।
- OVL और BPRL जैसी भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने बीएम-सील-11 और उत्सर्जन कटौती प्रौद्योगिकियों पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करते हुए गहरे पानी के ब्लॉकों में 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश किया है।
- रक्षा, सुरक्षा और अंतरिक्ष
- रक्षा औद्योगिक जुड़ाव: वर्ष 2026 का एक प्रमुख परिणाम स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों के रखरखाव के लिए मझगाँव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और दोनों नौसेनाओं के बीच त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन है।
- यह समझौता भारत के आत्मनिर्भर भारत को ब्राजील के रक्षा औद्योगिक आधार से प्रभावी रूप से जोड़ता है।
- साइबर और अंतरिक्ष: सीमा पार साइबर अपराध और ऑनलाइन कट्टरपंथ से निपटने के लिए भारत-ब्राजील साइबर संवाद (वर्ष 2025 में स्थापित) के माध्यम से सहयोग का विस्तार हुआ है।
- अंतरिक्ष क्षेत्र में, एजेंसियाँ अब जलवायु और पर्यावरण निगरानी के लिए संयुक्त उपग्रह डिजाइन और डेटा साझाकरण की संभावनाओं पर काम कर रही हैं।
- जैव-ऊर्जा, कृषि और स्वास्थ्य
- ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस (GBA): सह-संस्थापक के रूप में, दोनों देश “बेलेम 4x प्रतिज्ञा” का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसका लक्ष्य वर्ष 2035 तक वैश्विक सतत् ईंधन उपयोग को चार गुना करना है।
- यह भारत की राष्ट्रीय जैव-ईंधन नीति को ब्राजील के रेनोवाबायो कार्यक्रम के अनुरूप बनाता है।
- कृषि-तकनीक और खाद्य सुरक्षा: MAITRI 2.0 कार्यक्रम पशु आनुवंशिकी और खाद्य प्रसंस्करण में स्टार्ट-अप के लिए क्रॉस-इनक्यूबेशन को बढ़ावा देता है।
- भारत कृषि रसायनों का एक प्रमुख निर्यातक (1 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक) बना हुआ है, जबकि ब्राजील से दालें और कपास आयात करता है।
- स्वास्थ्य संप्रभुता: ANVISA (ब्राजील) और CDSCO (भारत) के बीच वर्ष 2026 के एक समझौते का उद्देश्य किफायती गुणवत्ता वाली दवाओं, विशेष रूप से कैंसर और दुर्लभ बीमारियों के लिए, अनुमोदन प्रक्रिया को तेज करना है।
- सॉफ्ट पॉवर और शिक्षा
- योग और स्वास्थ्य: माटो ग्रोसो डो सुल में सार्वजनिक स्कूलों के पाठ्यक्रम में वर्ष 2024 में योग को शामिल किए जाने के बाद, स्वास्थ्य पर्यटन में जबरदस्त उछाल आया है।
- वेदांत में उनके योगदान के लिए जोनास मासेट्टी को वर्ष 2025 में पद्म श्री से सम्मानित किया जाना, इस गहरे आध्यात्मिक संबंध को और भी स्पष्ट करता है।
- शैक्षिक गतिशीलता: IIIT-बंगलूरू और ब्राजील के शिक्षा मंत्रालय के बीच हुए नए समझौता ज्ञापनों से डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) पेशेवरों की एक नई पीढ़ी तैयार हो रही है।
PWOnlyIAS विशेष
बहुपक्षीय मंचों में सहयोग
- ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका): ये दोनों ही प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएँ होने के नाते ब्रिक्स के एजेंडे को आकार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- वे ब्रिक्स का उपयोग निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए करती हैं:
- बहुध्रुवीयता और वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार को बढ़ावा देना।
- दक्षिण-दक्षिण सहयोग को मजबूत करना।
- सतत् विकास, व्यापार, वित्त और डिजिटल शासन जैसे मुद्दों पर सहयोग करना।
- BASIC (ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, भारत, चीन): संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिसंघ (UNFCCC) में समन्वित जलवायु कार्रवाई के लिए वर्ष 2009 में गठित।
- भारत और ब्राजील
- जलवायु न्याय और समानता-आधारित सिद्धांतों (CBDR-RC) की वकालत करते हैं।
- पेरिस समझौते के तहत विकासशील देशों के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता पर जोर देते हैं।
- IBSA (भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका संवाद मंच): तीन अलग-अलग महाद्वीपों के लोकतांत्रिक देशों का एक मंच (स्थापना 2003)।
- मुख्य क्षेत्र
- विकास सहयोग, गरीबी उन्मूलन, समावेशी विकास।
- संयुक्त राष्ट्र, विश्व व्यापार संगठन और विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसे मंचों पर वैश्विक मुद्दों पर समन्वित रुख अपनाना।
- नियम-आधारित, लोकतांत्रिक और न्यायपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बढ़ावा देना।
- G4 (भारत, ब्राजील, जर्मनी, जापान): भारत और ब्राजील संयुक्त रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए एक-दूसरे के प्रयासों का समर्थन करते हैं।
- निम्नलिखित लक्ष्यों पर कार्य करना
- 21वीं सदी की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार करना।
- अंतरराष्ट्रीय निर्णय लेने में वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करना।
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भारत-ब्राजील संबंधों का महत्त्व
भारत और ब्राजील के बीच साझेदारी एक पारंपरिक मित्रता से विकसित होकर सामरिक स्वायत्तता की साझा खोज पर आधारित एक सामरिक आवश्यकता बन गई है।
- बहुपक्षीय समन्वय एवं वैश्विक नेतृत्व: वर्ष 2026 में भारत द्वारा “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” विषय के तहत ब्रिक्स की अध्यक्षता ग्रहण करने के साथ, दोनों देशों ने वैश्विक दक्षिण का प्रतिनिधित्व करने के लिए अपने एजेंडा को समन्वित किया है।
- वे भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका (IBSA) मंच को उभरती अर्थव्यवस्थाओं के “लोकतांत्रिक केंद्र” के रूप में उपयोग करते हैं ताकि नियम-आधारित, फिर भी न्यायसंगत, अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का समर्थन किया जा सके।
- व्यापक वैश्विक शासन सुधार: G4 (भारत, ब्राजील, जर्मनी, जापान) के सदस्य के रूप में, दोनों देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की अपनी अटूट मांग रखते हैं।
- उनका तर्क है कि 1.4 अरब लोगों (भारत) और लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (ब्राजील) का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रमुख शक्तियों को बाहर रखने से वैश्विक शांति के लिए संयुक्त राष्ट्र के “प्रयास” तेजी से अप्रभावी और अवैध होते जा रहे हैं।
- ‘फार्मेसी और फार्म’ प्रतिमान: यह रणनीतिक पूरकता वैश्विक स्थिरता सुनिश्चित करती है। ब्राजील, एक अग्रणी कृषि व्यवसाय शक्ति (फार्म) के रूप में, खाद्य और पोषण सुरक्षा प्रदान करता है, जबकि भारत, जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स में वैश्विक अग्रणी (फार्मेसी) के रूप में, स्वास्थ्य समानता सुनिश्चित करता है।
- ANVISA और CDSCO के बीच 2026 का समझौता किफायती गुणवत्ता वाली दवाओं के लिए नियामक अनुमोदन प्रक्रिया को और भी तेज करता है।
- ऊर्जा और जलवायु नेतृत्व: ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस (GBA) के सह-संस्थापक के रूप में, दोनों देश वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन का नेतृत्व कर रहे हैं।
- COP30 (बेलेम) में ब्राजील के नेतृत्व और ट्रॉपिकल फॉरेस्ट्स फॉरएवर फैसिलिटी (TFFF) का शुभारंभ, जिसे भारत के मिशन LiFE का समर्थन प्राप्त है, से साझा लेकिन विभेदित उत्तरदायित्वों (CBDR-RC) पर एक एकीकृत रुख प्रदर्शित होता है।
- संसाधन और खनिज सुरक्षा: ब्राजील हाइड्रोकार्बन और खनिजों का एक महत्त्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता है। यह लीथियम की विश्वसनीय आपूर्ति प्रदान करता है, जो भारत के इलेक्ट्रिक वाहन (EV) लक्ष्य (2030 तक 30%) के लिए अपरिहार्य है।
भारत और ब्राजील के बीच द्विपक्षीय संबंधों में चुनौतियाँ
राजनयिक सौहार्द के बावजूद, कई संरचनात्मक और भू-राजनीतिक बाधाएँ बनी हुई हैं:
- व्यापारिक प्रतिस्पर्द्धा और संघर्ष: दोनों देश चीनी और मांस जैसी कृषि वस्तुओं के प्रमुख निर्यातक हैं, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्द्धा होती है।
- संघर्ष का एक महत्त्वपूर्ण बिंदु भारत द्वारा गन्ने पर दी जाने वाली सब्सिडी के संबंध में विश्व व्यापार संगठन (WTO) में ब्राजील की शिकायत है, जिसके बारे में ब्राजील का तर्क है कि यह वैश्विक मूल्य समानता को असंतुलित करती है।
- इसके अलावा, भारत और ब्राजील दोनों ही अमेरिका द्वारा सबसे अधिक कर लगाए जाने वाले देश थे और दोनों को ब्रिक्स संबंधों, ईरान व्यापार तथा रूसी तेल आयात को लेकर आगे एवं टैरिफ लगाए जाने की आशंका थी।
- बाजार पहुँच और व्यापार बाधाएँ: व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का अभाव विकास को सीमित करता है।
- वर्ष 2030 तक 30 अरब अमेरिकी डॉलर के व्यापार लक्ष्य को प्राप्त करना गैर-टैरिफ बाधाओं (NTBs) के कारण बाधित है, जैसे कि भारतीय बासमती चावल को प्रभावित करने वाली कठोर पादप स्वच्छता आवश्यकताएँ और औद्योगिक वस्तुओं पर एंटी-डंपिंग शुल्क।
- “चीन कारक”: चीन, ब्राजील का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार और प्राथमिक अवसंरचना निवेशक बना हुआ है।
- यह गहन आर्थिक जुड़ाव कभी-कभी भारत के हिंद-प्रशांत उन्मुखीकरण के साथ ब्राजील के रणनीतिक संरेखण को सीमित कर सकता है, क्योंकि ब्राजील दक्षिण अटलांटिक क्षेत्र पर अत्यधिक केंद्रित है।
- लॉजिस्टिकल “दूरी कर”: सीधे शिपिंग मार्गों की कमी और अटलांटिक महासागर के पार अपर्याप्त समुद्री संपर्क के कारण माल ढुलाई लागत अधिक होती है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार क्षेत्रीय विकल्पों की तुलना में कम प्रतिस्पर्द्धी हो जाता है।
- अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा खतरे: दोनों नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद पर गंभीर चिंता व्यक्त की, विशेष रूप से पहलगाम और नई दिल्ली में वर्ष 2025 की आतंकी घटनाओं का उल्लेख किया।
- इसके अतिरिक्त, अवैध खनन और वन्यजीवों की तस्करी जैसे पर्यावरणीय अपराध उनके विशाल विविधतापूर्ण पारिस्थितिकी तंत्रों के लिए एक बढ़ता खतरा पैदा कर रहे हैं।
भारत-मर्कोसुर तरजीही व्यापार समझौता (PTA) के बारे में
- भारत-मर्कोसुर तरजीही व्यापार समझौता (PTA) पर वर्ष 2004 में हस्ताक्षर किए गए थे और यह वर्ष 2009 से प्रभावी है।
- इसमें दोनों पक्षों की ओर से दी गई रियायतों के साथ लगभग 450 से अधिक टैरिफ लाइनें शामिल हैं।
- प्रमुख व्यापारिक वस्तुएँ
- भारत का निर्यात: फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, मशीनरी, वस्त्र।
- भारत का आयात: खाद्य तेल, चमड़ा, लौह अयस्क और खनिज।
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आगे की राह
इस साझेदारी को एक लचीले ‘विवादास्पद वार्ताकार गुट’ में बदलने के लिए, निम्नलिखित कदम आवश्यक हैं:
- भारत-मर्कोसुर PTA का विस्तार: वर्ष 2004 के तरजीही व्यापार समझौते (PTA) को एक व्यापक आर्थिक साझेदारी में परिवर्तित करने से उच्च मूल्य वाले विनिर्माण के लिए बाजार पहुँच बढ़ेगी, जो तेल और सोया जैसी वस्तुओं के साधारण आदान-प्रदान से कहीं आगे जाएगी।
- रक्षा और अंतरिक्ष संबंधों को मजबूत करना: प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सह-उत्पादन के माध्यम से सहयोग को गहन (जिसका उदाहरण स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों के रखरखाव के लिए वर्ष 2026 का त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन है) करना, क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान देगा और पश्चिमी रक्षा निर्माताओं पर निर्भरता को कम करेगा।
- खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा को संस्थागत बनाना: वर्ष 2025-26 के टैरिफ युद्धों जैसे वैश्विक झटकों से दोनों देशों को बचाने के लिए आवश्यक वस्तुओं (खाद्य तेल, दालें और ईंधन) के लिए एक स्थिर आपूर्ति शृंखला तंत्र स्थापित करना।
- कनेक्टिविटी और सॉफ्ट पॉवर को बढ़ाना
- शैक्षिक गतिशीलता: मैत्री 2.0 क्रॉस-इनक्यूबेशन प्रोग्राम और 10 वर्षीय पारस्परिक वीजा वैधता का लाभ उठाकर IIIT-बंगलूरू जैसे संस्थानों और ब्राजीलियाई विश्वविद्यालयों के बीच अकादमिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना।
- सांस्कृतिक कूटनीति: बॉलीवुड और योग (जो अब ब्राजील के सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल हैं) की लोकप्रियता का उपयोग करके आम नागरिकों के मध्य संबंधों को मजबूत करना।
निष्कर्ष
नई दिल्ली शिखर सम्मेलन 2026 ने भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को “उच्च उद्देश्यों वाली साझेदारी” के रूप में स्थापित किया। शांति और समानता पर आधारित यह साझेदारी सतत् विकास लक्ष्य (SDG-7) (स्वच्छ ऊर्जा) और सतत् विकास लक्ष्य (SDG-17) (वैश्विक साझेदारी) को बढ़ावा देती है, जिसमें DPI, महत्त्वपूर्ण खनिजों और शासन सुधारों में सहयोग शामिल है, जो एक बहुध्रुवीय, मानव-केंद्रित वैश्विक दक्षिण व्यवस्था की ओर अग्रसर होने का संकेत देता है।