संदर्भ
हाल ही में प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की अपनी राजकीय यात्रा के दौरान ‘स्टेट हाउस’ में सेशेल्स के राष्ट्रपति ‘पैट्रिक हर्मिनी’ के साथ प्रतिनिधिमंडल-स्तर की वार्ता की।
संबंधित तथ्य
- इस यात्रा ने सुरक्षा, स्थिरता और साझा समृद्धि पर आधारित ‘अवसर के महासागर’ (Ocean of Opportunity) के रूप में हिंद महासागर के प्रति भारत के दृष्टिकोण को रेखांकित किया।
- सेशेल्स आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढाँचे के लिए गठबंधन (Coalition for Disaster Resilient Infrastructure- CDRI) में शामिल हुआ।
- सेशेल्स के 50वें राष्ट्रीय दिवस समारोह में भारतीय भागीदारी:-
- दोनों देशों के मध्य मजबूत रक्षा और समुद्री साझेदारी को दर्शाते हुए, भारत ने असम रेजिमेंट, भारतीय नौसेना के मार्चिंग दस्ते और सैन्य बैंड के माध्यम से सेशेल्स के स्वर्ण जयंती स्वतंत्रता समारोह में भाग लिया।
- ‘गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ पुरस्कार
- सेशेल्स ने पर्यावरण संरक्षण, सतत् विकास और वैश्विक जलवायु कार्रवाई में योगदान को मान्यता देते हुए प्रधानमंत्री मोदी को अपने विशेष राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित किया।
यात्रा के मुख्य परिणाम
- विकास संबंधी सहायता
- सेशेल्स सरकार को एक ‘फास्ट पेट्रोल वेसल’ उपहार के रूप में देना।
- सेशेल्स रक्षा बल को 10 ‘यूटिलिटी व्हीकल्स’ और ‘लेजर रेडियल क्लास बोट्स’ के 5 सेट सौंपना।
- सेशेल्स सरकार को 6 एंबुलेंस सौंपना।
- सेशेल्स सरकार को 500 मीट्रिक टन चावल सौंपना।
- सेशेल्स सरकार को 8500 मीट्रिक टन सीमेंट सौंपना।
- प्रमुख घोषणाएँ
- भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक प्रतीक चिह्न का शुभारंभ किया गया।

चुनौतियाँ
- चीन की भू-राजनीतिक बढ़त: हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) महाशक्तियों की प्रतिस्पर्द्धा का एक प्राथमिक केंद्र बन गया है। चीन, सेशेल्स के 1.3 मिलियन वर्ग किलोमीटर में फैले विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) पर भू-सामरिक बढ़त हासिल करने के लिए प्रयासरत है।
- चीन की “स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स” रणनीति और उसका आक्रामक बुनियादी ढाँचा वित्तपोषण (इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग) विक्टोरिया को एक संवेदनशील भू-राजनीतिक संतुलन बनाने के लिए मजबूर करता है, जो इस क्षेत्र में प्राथमिक सुरक्षा प्रदाता के रूप में भारत की पारंपरिक स्थिति को सीधे चुनौती देता है।
- अजंपशन द्वीप (Assumption Island) संप्रभुता विवाद: सबसे महत्त्वपूर्ण राजनयिक बाधा सेशेल्स के अजंपशन द्वीप पर अवरुद्ध हुई संयुक्त परियोजनाएँ है।
- शुरुआत में वर्ष 2015 में हस्ताक्षरित, समुद्री बुनियादी ढाँचे के निर्माण की भारत की योजना को सेशेल्स की संप्रभुता खोने के डर से सेशेल्स के भीतर गंभीर घरेलू राजनीतिक विरोध और प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा।
- संयुक्त प्रबंधन पर जोर देने के लिए भारत द्वारा समझौते में परिवर्तन किए जाने के बावजूद, विदेशी सैन्य उपस्थिति को लेकर स्थानीय संवेदनशीलता अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है।
- घरेलू राजनीतिक उतार-चढ़ाव और राष्ट्रवाद: सेशेल्स में राजनीतिक परिवर्तन द्विपक्षीय संबंधों को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।
- राष्ट्रवादी भावनाएँ और ‘सभी महाशक्तियों से समान दूरी’ (Equal distance from all superpowers) के राजनीतिक विचार का तात्पर्य है कि भारत के साथ रणनीतिक समझौते गहन घरेलू जाँच के दायरे में रहते हैं।
- राजनीतिक नेतृत्व में परिवर्तन से नीतिगत बदलाव या परियोजनाओं में देरी हो सकती है, यदि मौजूदा सरकार पर यह सिद्ध करने का दबाव हो कि वह भारत पर अत्यधिक निर्भर नहीं है।
- सीमित आर्थिक और व्यापारिक जुड़ाव: मजबूत राजनीतिक संबंधों के बावजूद, सेशेल्स की छोटी आबादी, सीमित घरेलू बाजार और भौगोलिक बाधाओं के कारण आर्थिक सहयोग अपनी क्षमता से कम बना हुआ है।
- पर्यटन, मत्स्यपालन, नवीकरणीय ऊर्जा और बुनियादी ढाँचे जैसे क्षेत्रों में भारत के निर्यात, निवेश और निजी क्षेत्र की भागीदारी का और अधिक विस्तार किया जा सकता है।
- उदाहरण के लिए: भारत ने भारतीय निर्यात-आयात बैंक (एक्जिम बैंक) के माध्यम से प्रदान की गई ‘लाइन ऑफ क्रेडिट’ जैसी वित्तीय सहायता के जरिए सेशेल्स का समर्थन किया है, लेकिन रणनीतिक सहयोग की तुलना में वाणिज्यिक जुड़ाव सीमित बना हुआ है।
- समुद्री सुरक्षा और सीमापार अपराध: सेशेल्स के जलक्षेत्र की विशालता इसे गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनाती है।
- ‘हॉर्न ऑफ अफ्रीका’ के पास समुद्री डकैती के पुनरुत्थान के साथ-साथ परिष्कृत मादक पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क, हथियारों की तस्करी, और अवैध, गैर-पंजीकृत और अनियमित (Illegal, Unreported, and Unregulated-IUU) मत्स्यन जैसी गतिविधियाँ संयुक्त गश्त पर अत्यधिक बोझ डालती हैं।
- इतने विशाल समुद्री क्षेत्र की निगरानी के लिए निरंतर और संसाधन-सघन समन्वय की आवश्यकता होती है।
- जलवायु परिवर्तन और पारिस्थितिकी चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता: एक छोटे द्वीप विकासशील देश (SIDS) के रूप में, सेशेल्स को बढ़ते समुद्र के जलस्तर, प्रवाल विरंजन और तीव्र होते चक्रवातों से अस्तित्व का खतरा है।
- भारत के नेतृत्व में किसी भी संयुक्त रणनीतिक या बुनियादी ढाँचा परियोजना को पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव और संवेदनशील, जैव-विविधता वाले द्वीप पारिस्थितिकी तंत्र को होने वाले संभावित नुकसान के संबंध में अत्यधिक स्थानीय जाँच का सामना करना पड़ता है।
- विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी: भारत ने ऐतिहासिक रूप से इस क्षेत्र में एक “वितरण घाटे” (डिलीवरी डेफिसिट) का सामना किया है, जहाँ नौकरशाही की बाधाएँ हाई-प्रोफाइल बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को पूरा करने में देरी का कारण बनती हैं।
- हालाँकि भारत ने ‘लाइन्स ऑफ क्रेडिट’ और अनुदान के माध्यम से अपने क्रियान्वयन समय में काफी सुधार किया है, लेकिन किसी भी देरी से चीन या संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे प्रतिस्पर्द्धियों को कदम बढ़ाने और इस शून्यता को भरने का अवसर मिलने का जोखिम रहता है।
- असममित शक्ति गतिशीलता और खतरे की धारणा: एक प्रमुख भू-राजनीतिक शक्ति भारत और एक द्वीपीय देश सेशेल्स के मध्य एक स्वाभाविक विषमता मौजूद है। यह शक्ति असंतुलन कभी-कभी स्थानीय आबादी के बीच “बिग ब्रदर” जैसे व्यवहार के प्रति एक अंतर्निहित खतरे की भावना को जन्म दे सकता है।
- भारत को अपनी कूटनीति को लगातार इस तरह से समायोजित करना होगा, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि उसकी ‘सागर’ (SAGAR – Security and Growth for All in the Region) नीति को बाध्यकारी के बजाय सहयोगात्मक रूप में देखा जाए।
भारत के लिए सेशेल्स का महत्त्व
- रणनीतिक समुद्री स्थिति: सेशेल्स पश्चिमी हिंद महासागर में अवस्थित है, जो एशिया, अफ्रीका और यूरोप को जोड़ने वाले प्रमुख समुद्री संचार मार्गों (Sea Lanes of Communication- SLOCs) के निकट है। इसकी स्थिति भारत को हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में समुद्री जागरूकता और स्थिरता बनाए रखने में सहायता करती है।
- समुद्री सुरक्षा भागीदार: सेशेल्स समुद्री डकैती, अवैध शिकार (मछली पकड़ने), मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य समुद्री अपराधों के विरुद्ध भारत के प्रयासों का समर्थन करता है। भारत ने रक्षा सहयोग और निगरानी सहायता के माध्यम से सेशेल्स की समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने में मदद की है।
- विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की निगरानी बढ़ाना: सेशेल्स का एक विशाल विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) है, जो समुद्री निगरानी को महत्त्वपूर्ण बनाता है। भारत ने EEZ की निगरानी और तटीय सुरक्षा के लिए संपत्तियों तथा सहयोग के माध्यम से सेशेल्स का समर्थन किया है।
- उदाहरण के लिए: भारत ने रडार-आधारित निगरानी प्रणालियों सहित तटीय निगरानी सहयोग को संचालित करने में सहायता की।
- ‘सागर’ (SAGAR) दृष्टिकोण को मजबूत करना: सेशेल्स, भारत की ‘सागर’ (Security and Growth for All in the Region – क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) पहल में एक महत्त्वपूर्ण भागीदार है, जो एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और समृद्ध हिंद महासागर को बढ़ावा देती है।
- उदाहरण के लिए: भारत ने इस दृष्टिकोण के तहत सेशेल्स को समुद्री संपत्तियों और क्षमता निर्माण सहायता प्रदान की है।
- बाहरी रणनीतिक प्रभाव का मुकाबला करना: भारत-सेशेल्स मजबूत संबंध, हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को बढ़ाते हैं और बढ़ते भू-राजनीतिक संप्रदायों के मध्य एक संतुलित क्षेत्रीय व्यवस्था का समर्थन करते हैं। सेशेल्स के साथ भारत का रक्षा सहयोग एक विश्वसनीय समुद्री भागीदार के रूप में उसकी भूमिका को दर्शाता है।
- ब्लू इकोनॉमी (नीली अर्थव्यवस्था) सहयोग: दोनों देश मत्स्यपालन, महासागर (MAHASAGAR) विकास और समुद्री संरक्षण सहित समुद्री संसाधनों के संधारणीय (सतत्) उपयोग में सहयोग करते हैं। यह सतत् समुद्री विकास पर भारत के व्यापक ध्यान का समर्थन करता है।
- जलवायु परिवर्तन साझेदारी: एक छोटे द्वीपीय विकासशील देश (SIDS) के रूप में, सेशेल्स को समुद्र के बढ़ते जलस्तर और जलवायु परिवर्तन से खतरों का सामना करना पड़ रहा है। भारत की साझेदारी जलवायु लचीलेपन, नवीकरणीय ऊर्जा और सतत् विकास लक्ष्यों का समर्थन करती है।
- ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और द्वीपीय कूटनीति: सेशेल्स के साथ भारत का जुड़ाव ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और भारत-प्रशांत दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो विकास सहायता, क्षमता निर्माण और पारस्परिक विश्वास पर केंद्रित है।
- उदाहरण: भारत ने सेशेल्स की क्षमताओं को मजबूत करने के लिए गश्ती जहाजों और अन्य उपकरणों सहित मानवीय और रक्षा सहायता प्रदान की है।
आगे की राह
- संयुक्त पारदर्शिता के माध्यम से बुनियादी ढाँचे का पुनर्गठन: अजंपशन द्वीप के गतिरोध को दूर करने के लिए, भारत को एकतरफा कार्यान्वयन मॉडलों से बचना चाहिए।
- भावी रणनीतिक बुनियादी ढाँचे को एक सह-प्रबंधित ढाँचे के तहत विकसित किया जाना चाहिए, जो स्पष्ट रूप से सेशेल्स की नागरिक और आर्थिक आवश्यकताओं (जैसे- तटीय रक्षक पुलिसिंग, पर्यावरण-पर्यटन संरक्षण और वैज्ञानिक अनुसंधान) को प्राथमिकता दे।
- ब्लू इकोनॉमी (नीली अर्थव्यवस्था) सहयोग का विस्तार: भारत को पारंपरिक सहायता से आगे बढ़कर सेशेल्स की आर्थिक जीवनरेखा यानी समुद्र का लाभ उठाना चाहिए। टिकाऊ मत्स्यपालन, समुद्री जैव प्रौद्योगिकी और गहरे समुद्र की खोज में संयुक्त उद्यम आपसी विकास को गति दे सकते हैं।
- सिर्फ कच्चे माल का निर्यात करने के बजाय समुद्री संसाधनों के स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण के लिए बुनियादी ढाँचा तैयार करने में सेशेल्स की सहायता करके भारत एक आत्मनिर्भर ब्लू इकोनॉमी साझेदारी को बढ़ावा दे सकता है।
- डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) को बढ़ावा देना: अपने डिजिटल स्टैक के निर्यात में भारत की सफलता राजनयिक प्रभाव के लिए एक बड़ा अवसर प्रदान करती है।
- सेशेल्स में UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) की शुरुआत के बाद, भारत को विक्टोरिया के सार्वजनिक प्रशासन को डिजिटल बनाने में मदद करनी चाहिए।
- ई-गवर्नेंस, डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियों और सुरक्षित फिनटेक नेटवर्क पर सहयोग करने से भारतीय तकनीक सेशेल्स के दैनिक जीवन में शामिल हो जाएगी, जिससे गहरे संस्थागत अंतर्संबंध बनेंगे।
- प्रत्यक्ष जलवायु परिवर्तन और लचीलापन सहायता: चूँकि सेशेल्स बढ़ते समुद्र के जलस्तर के अस्तित्वगत खतरे से जूझ रहा है, इसलिए भारत को जलवायु अनुकूलन के लिए स्वयं को प्रमुख भागीदार के रूप में स्थापित करना चाहिए।
- इसमें आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढाँचे के लिए गठबंधन (CDRI) के माध्यम से तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करना, नवीकरणीय ऊर्जा समाधान (जैसे सौर माइक्रोग्रिड) तैनात करना और कमजोर द्वीपीय समुदायों की सुरक्षा के लिए जलवायु-अनुकूल तटीय बुनियादी ढाँचे को वित्तपोषित करना शामिल है।
- “दाता” से “वाणिज्यिक भागीदार” के रूप में परिवर्तन: सीमित व्यापारिक गहराई को दूर करने के लिए, भारत को अपने निजी क्षेत्र को सेशेल्स के प्रमुख विकास क्षेत्रों, जैसे कि पर्यावरण-पर्यटन, आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी) और स्वास्थ्य सेवा में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
- सेशेल्स की वस्तुओं को तरजीही बाजार पहुँच प्रदान करना और एक लक्षित द्विपक्षीय निवेश मंच स्थापित करना एकतरफा “दाता-प्राप्तकर्ता” संबंध को एक सक्रिय, वाणिज्यिक व्यापार साझेदारी में परिवर्तित करने में सहायता करेगा।
- मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (MDA) को बढ़ाना: विशुद्ध रूप से भौतिक सैन्य उपस्थिति पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, भारत को तकनीकी और खुफिया सहयोग को दोगुना करना चाहिए।
- इनफॉरमेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) के प्रभाव का विस्तार करने और वास्तविक समय (रियल-टाइम) के उपग्रह डेटा को साझा करने से सेशेल्स को अवैध, गैर-पंजीकृत और अनियमित (IUU) मछली पकड़ने, मादक पदार्थों की तस्करी और समुद्री डकैती से निपटने में सहायता मिलेगी।
- यह भारत को एक अपरिहार्य, गैर-हस्तक्षेपकारी सुरक्षा प्रदाता के रूप में स्थापित करता है।
- ‘वितरण घाटे’ (डिलीवरी डेफिसिट) पर नियंत्रण पाना: भारत को अपनी प्रतिज्ञाबद्ध विकास परियोजनाओं का तीव्र गति से क्रियान्वयन सुनिश्चित करना चाहिए।
- लाइन ऑफ क्रेडिट (LoC) के तहत वित्तपोषित परियोजनाओं के लिए सख्त, समयबद्ध वितरण तंत्र लागू करने से चीन या संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्द्धियों को देरी का लाभ उठाने से रोका जा सकेगा। लगातार समय पर कार्य पूरा करना भारत को एक अत्यधिक विश्वसनीय और मजबूत भागीदार के रूप में स्थापित करता है।
- सॉफ्ट पावर और ‘पीपुल-टू-पीपुल’ संबंध: “बिग ब्रदर” वाली किसी भी चिंता का मुकाबला करने के लिए, भारत को अपनी सॉफ्ट पॉवर और सांस्कृतिक कूटनीति में सक्रिय रूप से निवेश करना चाहिए।
- भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (ITEC) छात्रवृत्तियों का विस्तार करना, सेशेल्स के लोक सेवकों के लिए विशेष प्रशिक्षण आयोजित करना और सेशेल्स में जीवंत भारतीय प्रवासियों के साथ संबंधों को मजबूत करना जमीनी स्तर पर अपार सद्भावना उत्पन्न करेगा।
- आपसी सम्मान और साझा समुद्री विरासत पर जोर देने के लिए कूटनीति को समायोजित करना यह सुनिश्चित करता है कि साझेदारी गहराई से लोकतांत्रिक और राजनीतिक परिवर्तनों के प्रति लचीली बनी रहे।
सेशेल्स के बारे में
अवस्थिति एवं भूगोल
- सेशेल्स पश्चिमी हिंद महासागर में स्थित एक द्वीपीय देश है, जो मेडागास्कर के उत्तर-पूर्व और मुख्य भूमि अफ्रीका के पूर्व में है।
- इसमें लगभग 115 द्वीप शामिल हैं, जिसकी राजधानी विक्टोरिया (माहे द्वीप पर) है।
- जलवायु परिवर्तन के प्रति अपनी संवेदनशीलता के कारण यह एक महत्त्वपूर्ण छोटा द्वीपीय विकासशील देश (SIDS) है।
रणनीतिक महत्त्व
- यह एशिया, अफ्रीका और यूरोप को जोड़ने वाले प्रमुख समुद्री संचार मार्गों (SLOCs) के निकट अवस्थित है।
- इसकी स्थिति इसे हिंद महासागर की समुद्री सुरक्षा, निगरानी और व्यापार मार्गों के लिए महत्त्वपूर्ण बनाती है।
|
निष्कर्ष
भारत-सेशेल्स संबंध हिंद महासागर क्षेत्र के लिए भारत के एक सुरक्षित, समावेशी और सतत् दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो आर्थिक विकास और जलवायु सहयोग के साथ समुद्री सुरक्षा को जोड़ता है।