संदर्भ
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने जैव विविधता अभिसमय (CBD) के निर्णय 15/6 के अनुसार, भारत की सातवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट (NR-7) प्रस्तुत की है।
जैव विविधता पर अभिसमय (CBD) के बारे में
- संदर्भ: जैव विविधता पर अभिसमय या UNCBD के नाम से भी जाना जाने वाला यह एक बहुपक्षीय संधि है, जिसका उद्देश्य जैविक विविधता का संरक्षण करना, इसके घटकों का सतत् उपयोग सुनिश्चित करना और आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से होने वाले लाभों का उचित बँटवारा सुनिश्चित करना है।
- CBD को 5 जून, 1992 को रियो डी जनेरियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षर के लिए उपलब्ध कराया गया था और यह आधिकारिक तौर पर 29 दिसंबर, 1993 को लागू हुआ।
- अनुमोदन: यह एक कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि है और 196 देशों द्वारा इसकी पुष्टि की जा चुकी है। उल्लेखनीय रूप से, संयुक्त राज्य अमेरिका एकमात्र संयुक्त राष्ट्र सदस्य देश है, जिसने इसकी पुष्टि नहीं की है।
- भारत भी इस सम्मेलन का एक पक्ष है।
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संबंधित तथ्य
- रिपोर्ट में पाया गया है कि कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढाँचे के साथ नीतिगत तालमेल के बावजूद, 23 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्यों में से केवल दो ही स्पष्ट रूप से सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
- 23 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्यों में से, केवल दो, NBT1 (जैव विविधता-समावेशी भूमि और समुद्री उपयोग योजना) और NBT2 (पारिस्थितिकी तंत्र बहाली), सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
भारत की सातवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट (NR-7) के बारे में
- परिचय: NR-7 भारत की अद्यतन राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (NBSAP 2024-2030) और कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढाँचा (KMGBF) के अनुरूप एक व्यापक, संकेतक-आधारित राष्ट्रीय मूल्यांकन प्रस्तुत करता है।
- संबंधित संस्था: यह रिपोर्ट पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 33 मंत्रालयों के सुझावों के साथ तैयार की गई थी, जिसका तकनीकी समन्वय राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा किया गया था।
- इसमें वैश्विक पर्यावरण सुविधा के तहत संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा सहायता प्रदान की गई थी और प्रगति की निगरानी भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा की गई थी।
- मापदंड: यह रिपोर्ट 23 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्यों (National Biodiversity Targets- NBTs) के संदर्भ में 142 राष्ट्रीय संकेतकों पर आधारित है।
- सरकारी दृष्टिकोण: यह भारत के जैव विविधता संरक्षण प्रयासों में लंबे समय से चली आ रही प्रथाओं को दर्शाते हुए, “समग्र सरकारी” और “समग्र सामाजिक” दृष्टिकोण पर बल देती है।
- प्रगति की निगरानी
- राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्य 1: यह जैव विविधता-समावेशी भूमि और समुद्री उपयोग नियोजन पर केंद्रित है, रिपोर्ट में इस दिशा में हुई निरंतर प्रगति का वर्णन किया गया है।
- नवीनतम आकलन के अनुसार, भारत का वन और वृक्ष आवरण अब 8,27,357 वर्ग किलोमीटर (वर्ग किमी.) है, जो देश के भौगोलिक क्षेत्रफल का 25.17 प्रतिशत है।
- वर्ष 2021 और वर्ष 2023 के बीच, वन और वृक्ष आवरण में 1,445.81 वर्ग किमी. की वृद्धि हुई।
- राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्य 2 (NBT 2): यह पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्स्थापन पर केंद्रित है, रिपोर्ट में मिश्रित निष्कर्ष सामने आए हैं।
- मरुस्थलीकरण और भूमि क्षरण एटलस के अनुसार, भारत के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 29.77 प्रतिशत, यानी लगभग 97 मिलियन हेक्टेयर, वर्तमान में क्षरण की चपेट में है।
- राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्य 3 (NBT 3): इसमें भूमि, अंतर्देशीय जल और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों में संरक्षण को शामिल किया गया है, जो वर्ष 2030 तक पृथ्वी के 30 प्रतिशत हिस्से के संरक्षण के वैश्विक “30×30” लक्ष्य के अनुरूप है।
- भारत अपने संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क के निरंतर विस्तार के साथ-साथ राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के लिए नियमित प्रबंधन प्रभावशीलता मूल्यांकन की रिपोर्ट करता है।
- वर्तमान में, भारत के भौगोलिक क्षेत्र का 5 प्रतिशत से थोड़ा अधिक हिस्सा औपचारिक रूप से संरक्षित क्षेत्रों के रूप में नामित है। अतिरिक्त वन श्रेणियाँ व्यापक संरक्षण कवरेज में योगदान करती हैं।
- वनों के बाहर के वृक्ष (TOF): यह कृषि और उत्पादन परिदृश्यों में जैव विविधता को एकीकृत करने में हुई प्रगति का विश्लेषण करता है।
- वनों के बाहर के वृक्ष (TOF) अब भारत के कुल वृक्ष आवरण का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं, जबकि कृषि वानिकी देश के भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 8.65 प्रतिशत भाग पर फैली हुई है।
- लगातार बढ़ते पारिस्थितिकी दबावों के बीच सुदृढ़ ढाँचा: भारत ने जैव विविधता संरक्षण के लिए एक मजबूत नीति और निगरानी ढाँचा विकसित किया है, साथ ही यह संरक्षित क्षेत्रों के बाहर भूमि क्षरण और जैव विविधता के नुकसान सहित पारिस्थितिकी तंत्रों पर लगातार पड़ रहे दबावों को भी स्वीकार करता है।
चुनौतियाँ
- वित्तीय और तकनीकी बाधाएँ: रिपोर्ट में अपर्याप्त वित्तपोषण और सीमित तकनीकी क्षमता को प्रमुख संरचनात्मक चुनौतियों के रूप में उजागर किया गया है, साथ ही बाढ़, सूखा और वन अग्नि जैसे जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को भी पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रमुखता दी गई है।
- कृषि और आक्रामक प्रजातियों से संबंधित कमियाँ: यद्यपि कृषि वानिकी देश के 8.65% हिस्से को कवर करती है, रिपोर्ट में कीटनाशकों के उपयोग, पोषक तत्वों के अपवाह और आक्रामक प्रजातियों के प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सीमित मात्रात्मक आकलन प्रस्तुत किया गया है, जो जैव विविधता के नुकसान का एक प्रमुख कारण हैं।
- जैव विविधता की निगरानी जटिल और महँगी है और कई नए संकेतकों के लिए अभी भी मानकीकृत प्रोटोकॉल का अभाव है।
- विभिन्न मंत्रालय अलग-अलग अंतरालों पर डेटा एकत्र करते हैं, जबकि उपग्रह प्रौद्योगिकी में तेजी से हो रहे सुधारों के कारण वर्षों के बीच तुलना करना कठिन हो जाता है।
- ये कारक डेटासेट की स्थिरता और रुझानों की दीर्घकालिक तुलनीयता को प्रभावित कर सकते हैं।
महत्त्व
- इस प्रस्ताव के माध्यम से, भारत सम्मेलन के तीन उद्देश्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है: जैविक विविधता का संरक्षण, इसके घटकों का सतत् उपयोग और आनुवंशिक संसाधनों से उत्पन्न होने वाले लाभों का निष्पक्ष और समान बँटवारा।
राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्य (National Biodiversity Targets- NBTs)
| NBT क्रमांक |
फोकस क्षेत्र |
प्रमुख उद्देश्य (भारत) |
| NBT 1 |
भूमि एवं समुद्री उपयोग योजना |
जैव विविधता को स्थानिक योजना में एकीकृत करें; पर्यावासों के क्षरण को कम करें। |
| NBT 2 |
पारिस्थितिकी तंत्र बहाली |
क्षतिग्रस्त पारिस्थितिकी तंत्रों का जीर्णोद्धार करें और पारिस्थितिक अखंडता को बढ़ाएँ। |
| NBT 3 |
संरक्षण (30×30) |
जैव विविधता संरक्षण के लिए संरक्षित क्षेत्रों और OECM का विस्तार करें। |
| NBT 4 |
प्रजाति पुनर्प्राप्ति |
विलुप्त होने से रोकें; संकटग्रस्त प्रजातियों की आबादी को पुनर्जीवित करें। |
| NBT 5 |
सतत् उपयोग |
वन्य प्रजातियों की कटाई और व्यापार को सतत् बनाएँ। |
| NBT 6 |
आक्रामक प्रजातियाँ |
आक्रामक विदेशी प्रजातियों को रोकें और नियंत्रित करें। |
| NBT 7 |
प्रदूषण न्यूनीकरण |
जैव विविधता के लिए हानिकारक प्रदूषण के स्तर को कम करें। |
| NBT 8 |
जलवायु-जैव विविधता संबंध |
जलवायु परिवर्तन के प्रति पारिस्थितिकी तंत्र की सहनशीलता बढ़ाएँ। |
| NBT 9 |
सतत् कृषि |
जैव विविधता के अनुकूल कृषि और वानिकी को बढ़ावा देना। |
| NBT 10 |
ब्लू अर्थव्यवस्था |
समुद्री और तटीय जैव विविधता का सतत् उपयोग। |
| NBT 11 |
पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ |
पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को बनाए रखना और बढ़ाना। |
| NBT 12 |
शहरी जैव विविधता |
शहरी नियोजन में जैव विविधता को एकीकृत करें। |
| NBT 13 |
पहुँच एवं लाभ साझाकरण |
आनुवंशिक संसाधनों से प्राप्त लाभों का उचित बँटवारा। |
| NBT 14 |
नीति एकीकरण |
सभी क्षेत्रों में जैव विविधता को मुख्यधारा में लाना। |
| NBT 15 |
व्यापारिक उत्तरदायित्व |
सतत कॉर्पोरेट प्रथाओं को प्रोत्साहित करें। |
| NBT 16 |
सतत् उपभोग |
जिम्मेदार उपभोग के तरीकों को बढ़ावा दें। |
| NBT 17 |
जैव सुरक्षा |
जैव प्रौद्योगिकी से जुड़े जोखिमों के नियमन को सुदृढ़ करें। |
| NBT 18 |
हानिकारक सब्सिडी |
जैव विविधता के लिए हानिकारक सब्सिडी कम करें। |
| NBT 19 |
वित्त जुटाना,
क्षमता निर्माण |
जैव विविधता संरक्षण के लिए निधि बढ़ाएँ। |
| NBT 20 |
क्षमता निर्माण |
तकनीकी और संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ करें। |
| NBT 21 |
डेटा एवं निगरानी |
जैव विविधता डेटा प्रणालियों और संकेतकों में सुधार करें। |
| NBT 22 |
भागीदारी |
समावेशी भागीदारी सुनिश्चित करें (स्थानीय समुदाय, महिलाएँ, युवा)। |
| NBT 23 |
शासन |
जैव विविधता शासन एवं कार्यान्वयन को सुदृढ़ करें। |