संदर्भ
सारनाथ को जुलाई 2026 में दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र के दौरान यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची (World Heritage List) में आधिकारिक रूप से शामिल किया गया है।
‘सारनाथ’ स्थल के बारे में
- उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के निकट स्थित सारनाथ का प्राचीन बौद्ध स्थल भारत का 45वाँ नवीनतम यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल बन गया है।
- यह ताजमहल, आगरा का किला तथा फतेहपुर सीकरी के बाद उत्तर प्रदेश का चौथा विश्व धरोहर स्थल है।
- यह बौद्ध धर्म के सबसे महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थलों में से एक है, क्योंकि यहीं गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के पश्चात् अपना प्रथम उपदेश, धर्मचक्रप्रवर्तन सूत्र (Dhammacakkappavattana Sutta), दिया था, जिससे धर्मचक्र प्रवर्तन का प्रारंभ हुआ।

- सारनाथ स्थल की खोज
- आकस्मिक खोज (1794): वाराणसी के दीवान जगत सिंह ने निर्माण सामग्री प्राप्त करने के लिए धर्मराजिका स्तूप को ध्वस्त कराया। इस दौरान मानव अस्थियों एवं स्वर्ण आभूषणों से युक्त एक अवशेष-पात्र की खोज ने विद्वानों का ध्यान सारनाथ की ओर आकर्षित किया।
- प्रथम व्यवस्थित उत्खनन (1835–1836): बाद में भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) के प्रथम महानिदेशक बने अलेक्जेंडर कनिंघम ने धमेख स्तूप के आस-पास उत्खनन कर बौद्ध मूर्तियों एवं विहारों के अवशेषों का अनावरण किया।
- प्रमुख पुरातात्त्विक उपलब्धि (1904–1905): एफ. ओ. ओर्टेल ने मुख्य मंदिर परिसर के आस-पास व्यापक उत्खनन करवाया तथा अशोक के ‘सिंह शीर्ष’ (Lion Capital) की खोज की, जिसे बाद में भारत का राष्ट्रीय प्रतीक बनाया गया।
- अन्य खोजें: ओर्टेल ने एकाश्म अशोक स्तंभ तथा 475 से अधिक प्राचीन बौद्ध मूर्तिकला अवशेषों की भी खोज की, जिससे सारनाथ की एक प्रमुख बौद्ध विरासत केंद्र के रूप में महत्ता स्थापित हुई।
- प्रमुख संरचनाएँ
- धमेख स्तूप: यह विशाल बेलनाकार स्तूप परंपरागत रूप से बुद्ध के प्रथम उपदेश स्थल से संबद्ध माना जाता है तथा इस पर उत्कृष्ट पुष्पीय एवं ज्यामितीय अलंकरण अंकित हैं।
- चौखंडी स्तूप: यह स्तूप उस स्थान को चिह्नित करता है, जहाँ सारनाथ आगमन पर बुद्ध की अपने प्रमुख शिष्यों से भेंट हुई थी।
- अशोक स्तंभ: सम्राट अशोक के शासनकाल में स्थापित इस स्तंभ का सिंह शीर्ष भारत का राष्ट्रीय प्रतीक बना तथा यह भारत की बौद्ध विरासत का प्रतीक है।
- विहारों के अवशेष: प्राचीन विहारों के पुरातात्त्विक अवशेष सारनाथ के बौद्ध शिक्षा एवं मठवासी जीवन के एक प्रमुख केंद्र होने का प्रमाण प्रस्तुत करते हैं।
बुद्ध के जीवन से संबंधित अन्य प्रमुख बौद्ध स्थल
| स्थल |
स्थान |
महत्त्व |
प्रमुख तथ्य |
| लुंबिनी |
रूपंदेही जिला, नेपाल |
भगवान बुद्ध का जन्मस्थल (623 ईसा पूर्व) |
इसे वर्ष 1997 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया। |
| महाबोधि मंदिर |
बोधगया, बिहार |
भगवान बुद्ध को ज्ञान (बोधि) की प्राप्ति का स्थल |
मूल मंदिर का निर्माण सम्राट अशोक द्वारा (तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व) कराया गया था; उस काल से केवल वज्रासन (डायमंड थ्रोन) सुरक्षित है; वर्तमान मंदिर संरचना गुप्तकाल (छठी शताब्दी ईस्वी) की है; यह पहले से ही यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
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| कुशीनगर |
उत्तर प्रदेश |
भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण का स्थल |
यहाँ महापरिनिर्वाण मंदिर (शयन मुद्रा में बुद्ध की प्रतिमा) तथा रामभर स्तूप (दाह-संस्कार स्थल) स्थित हैं; वर्ष 1876 में अलेक्जेंडर कनिंघम एवं कार्लाइल द्वारा प्रथम उत्खनन किया गया; ऐतिहासिक रूप से यह मल्ल महाजनपद की राजधानी थी।
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यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों के बारे में
- यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल ऐसी सांस्कृतिक, प्राकृतिक अथवा मिश्रित संपत्ति है, जिसे असाधारण सार्वभौमिक मूल्य के लिए समस्त मानवता के हित में संरक्षित करने योग्य माना जाता है।
- उद्भव: सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत के संरक्षण, पहचान तथा संवर्द्धन के लिए अंतरराष्ट्रीय ढाँचा स्थापित करने हेतु यूनेस्को (UNESCO) ने विश्व धरोहर अभिसमय को वर्ष 1972 में अपनाया।

- श्रेणियाँ
- सांस्कृतिक स्थल: इनमें स्मारक, पुरातात्त्विक स्थल, ऐतिहासिक नगर तथा स्थापत्य समूह शामिल होते हैं, जो असाधारण मानवीय सृजनात्मकता अथवा ऐतिहासिक महत्त्व का प्रदर्शन करते हैं।
- प्राकृतिक स्थल: इनमें असाधारण प्राकृतिक सौंदर्य, भू-वैज्ञानिक महत्त्व, पारिस्थितिकी प्रक्रियाओं अथवा जैव विविधता संरक्षण के लिए आवश्यक आवास वाले क्षेत्र सम्मिलित होते हैं।
- मिश्रित स्थल: इनमें सांस्कृतिक तथा प्राकृतिक दोनों प्रकार के महत्त्वपूर्ण मूल्य विद्यमान होते हैं, जो यूनेस्को के प्रासंगिक मानदंडों को पूरा करते हैं।
- चयन के मानदंड: किसी संपत्ति को असाधारण सार्वभौमिक मूल्य (OUV) प्रदर्शित करना आवश्यक होता है तथा उसे यूनेस्को के दस चयन मानदंडों में से न्यूनतम एक को पूरा करना होता है। इनमें मानवीय सृजनात्मक प्रतिभा, सभ्यतागत परंपराएँ, इतिहास के महत्त्वपूर्ण चरण, असाधारण प्राकृतिक घटनाएँ, भू-वैज्ञानिक प्रक्रियाएँ तथा जैव विविधता संरक्षण जैसे पहलू सम्मिलित हैं।
- भारत के अंतिम पाँच यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (जुलाई 2026 तक कुल 45) (UPSC प्रारंभिक परीक्षा 2026)
- प्राचीन बौद्ध स्थल, सारनाथ, उत्तर प्रदेश (2026)
- भारत की मराठा सैन्य वास्तुकला एवं दुर्ग शृंखला , महाराष्ट्र एवं तमिलनाडु (2025)
- अहोम वंश की ऐतिहासिक -समाधि संरचना एवं स्थापत्य कला मोइदाम, असम (2024)
- होयसलों के पवित्र स्थापत्य समूह, कर्नाटक (2023)
- शांतिनिकेतन, पश्चिम बंगाल (2023)
विश्व धरोहर सूची में शामिल होने से किसी स्थल को अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त होती है, संरक्षण को प्रोत्साहन मिलता है, सतत् पर्यटन को बढ़ावा मिलता है तथा संबंधित देश की सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत वैश्विक स्तर पर अधिक प्रमुखता प्राप्त करती है।