UPSC PYQs

Prelims, Mains & Optional PYQs

UPSC Notes

Comprehensive & Short Notes

चिकित्सीय उदासीनता

6 May 2026

संदर्भ

हाल ही में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि चिकित्सीय उदासीनता (Medical Negligence) से संबंधित दावों में, चिकित्सक की मृत्यु के बाद भी उसकी संपत्ति के माध्यम से क्षतिपूर्ति प्राप्त की जा सकती है, परंतु उसके व्यक्तिगत उत्तराधिकारियों के विरुद्ध यह प्रभावी नहीं होते।

  • यह निर्णय वर्ष 1997 में दायर एक याचिका से संबंधित है, जिसमें वर्ष 1990 की शल्य चिकित्सा के बाद एक महिला की दाहिनी आँख की दृष्टि चली जाने पर कथित चिकित्सीय उदासीनता का आरोप लगाया गया था। याचिका में उपचार व्यय एवं मानसिक पीड़ा के लिए क्षतिपूर्ति की माँग की गई थी।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की प्रमुख विशेषताएँ

  • कानूनी उत्तराधिकारियों को पक्षकार बनाना: न्यायालय ने कहा कि चिकित्सक की मृत्यु के बाद कार्यवाही जारी रखने हेतु उसके कानूनी उत्तराधिकारियों को पक्षकार बनाया जा सकता है।
  • दायित्व केवल संपत्ति तक सीमित: न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उत्तराधिकारी व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी नहीं होंगे; क्षतिपूर्ति केवल मृत चिकित्सक से प्राप्त संपत्ति तक सीमित रहेगी।
    • भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 (धारा 306) के अंतर्गत
      • व्यक्तिगत दावे सामान्यतः मृत्यु के बाद समाप्त हो जाते हैं।
      • किंतु संपत्ति से जुड़े वित्तीय दावे जारी रह सकते हैं।
  • दावे को सिद्ध करने का भार: निर्णय में यह भी रेखांकित किया गया कि किसी भी दायित्व के निर्धारण से पूर्व दावेदार को साक्ष्यों के माध्यम से चिकित्सीय उदासीनता सिद्ध करनी होगी।
  • नीतिगत विमर्श: सर्वोच्च न्यायालय ने सुझाव दिया कि उत्तराधिकार कानूनों पर पुनर्विचार कर अपकृत्य संबंधी दावों की व्यापक निरंतरता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

चिकित्सीय उदासीनता के बारे में

  • चिकित्सीय उदासीनता तब होती है, जब कोई स्वास्थ्य पेशेवर स्वीकृत देखभाल मानक का उल्लंघन करता है, जिससे किसी कार्य अथवा कर्तव्य की उपेक्षा के कारण रोगी को चोट या मृत्यु होती है।
  • इसमें देखभाल का दायित्व, उस दायित्व का उल्लंघन तथा उससे उत्पन्न हानि शामिल होती है, जिसके कारण यह दीवानी एवं आपराधिक कानून के अंतर्गत वाद योग्य बनती है।
  • चिकित्सीय उदासीनता सिद्ध करने हेतु आवश्यक तत्त्व (“4 Ds”)
    • दायित्व: चिकित्सक एवं रोगी के बीच देखभाल का वैधानिक दायित्व विद्यमान होना चाहिए।
    • कर्तव्य उल्लंघन: चिकित्सक अपेक्षित देखभाल मानक का पालन करने में विफल रहता है।
    • प्रत्यक्ष कारणता: कर्तव्य उल्लंघन प्रत्यक्ष रूप से हानि का कारण बनता है।
    • हानि: रोगी को वास्तविक चोट अथवा नुकसान होता है।
  • चिकित्सीय उदासीनता से संबंधित कानून
    • आपराधिक दायित्व: पूर्व में इसका संचालन भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत होता था तथा अब यह भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अंतर्गत विनियमित है।
      • धारा 106 उदासीनता से हुई मृत्यु से संबंधित है।
      • इसके लिए केवल सामान्य उदासीनता नहीं, बल्कि गंभीर उदासीनता सिद्ध होना आवश्यक है।
    • दीवानी दायित्व (अपकृत्य विधि): रोगी कर्तव्य उल्लंघन के कारण क्षतिपूर्ति हेतु दीवानी संबंधी वाद दायर कर सकते हैं।
      • इसका उद्देश्य दंड नहीं, बल्कि आर्थिक क्षतिपूर्ति प्रदान करना होता है।
    • उपभोक्ता संरक्षण ढाँचा
      • चिकित्सीय सेवाएँ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अंतर्गत आती हैं।
      • रोगियों को उपभोक्ता माना जाता है तथा वे सेवा में कमी के विरुद्ध उपभोक्ता न्यायालयों में जा सकते हैं।
      • यह निजी एवं सरकारी दोनों अस्पतालों पर लागू होता है, पूर्णतः निःशुल्क सेवाओं के।
    • व्यावसायिक कदाचार (नियामकीय कार्रवाई): इसका विनियमन राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2020 के अंतर्गत किया जाता है।
      • इसके अंतर्गत चिकित्सक का पंजीकरण निलंबित अथवा समाप्त किया जा सकता है।
  • महत्त्वपूर्ण न्यायिक निर्णय
    • आपराधिक उदासीनता का मानदंड (जैकब मैथ्यू बनाम पंजाब राज्य, 2005): आपराधिक दायित्व हेतु केवल निर्णय में त्रुटि नहीं, बल्कि गंभीर उदासीनता आवश्यक है।
    • उपभोक्ता संरक्षण में समावेशन (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन बनाम वी.पी. शांथा, वर्ष 1995): चिकित्सीय सेवाओं को उपभोक्ता कानून के अंतर्गत माना गया, जिससे क्षतिपूर्ति दावों का मार्ग प्रशस्त हुआ।

निष्कर्ष 

चिकित्सीय उदासीनता कानून को रोगी सुरक्षा एवं चिकित्सकों के संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना चाहिए, ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो सके तथा अत्यधिक अपराधीकरण से बचा जा सके, जो स्वास्थ्य सेवा प्रदाय एवं पेशेवर निर्णय-निर्माण को प्रभावित कर सकता है।

चिकित्सीय उदासीनता

Explore UPSC Foundation Batches

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Free Counselling for UPSC Aspirants

Connect with our experts and take the right next step.

Expert Guidance
Personalized Strategy
100% Free

Book Your Free Session

NEED ASSISTANCE?

Request a Callback

Our counsellor will connect with you and help you choose the right course and centre.

  • Expert Guidance
  • Course & Fee Information
  • Quick Callback Support

Request a Callback

Books
UPSC PYQs
UPSC Notes
Current Affairs
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.