NASA का आर्टेमिस II मिशन

8 Apr 2026

संदर्भ

नासा का आर्टेमिस II मिशन (Artemis II Mission), जो चंद्रमा के सुदूर क्षेत्र की यात्रा कर रहा है, ने पृथ्वी से मनुष्यों द्वारा तय की गई सबसे अधिक दूरी का एक नया रिकॉर्ड बनाया है।

संबंधित तथ्य

  • चार अंतरिक्ष यात्रियों को ले जा रहे ओरियन (Orion) अंतरिक्ष यान ने चंद्रमा के सुदूर क्षेत्र की उड़ान के दौरान पृथ्वी से लगभग 2,52,752 मील की दूरी तय की, जिसने वर्ष 1970 में अपोलो 13 द्वारा बनाए गए 2,48,655 मील के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।
    • चार अंतरिक्ष यात्री हैं: अमेरिकी रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडाई जेरेमी हैनसेन।

आर्टेमिस II मिशन के बारे में

आर्टेमिस II, नासा के नेतृत्व वाले आर्टेमिस प्रोग्राम के तहत पहला चालक दल वाला मिशन है, जो पृथ्वी की निचली कक्षा से परे गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण में मानवता की वापसी का प्रतीक है।

मुख्य विशेषताएँ

  • शामिल संगठन: नासा (NASA) और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी (CSA)।
  • ‘फ्री-रिटर्न’ प्रक्षेपवक्र: यह मिशन एक फ्री-रिटर्न प्रक्षेपवक्र का पालन करेगा, जो पृथ्वी और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बलों का उपयोग करके बड़े प्रणोदन के बिना सुरक्षित वापसी का मार्ग सुनिश्चित करेगा।
  • डीप स्पेस टेस्टिंग: आर्टेमिस II गहरे अंतरिक्ष वातावरण में जीवन रक्षक प्रणाली, नेविगेशन, संचार, विकिरण सुरक्षा और मैनुअल पायलटिंग सहित महत्त्वपूर्ण प्रणालियों का व्यापक परीक्षण करेगा।

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  • उपलब्धि: अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा पृथ्वी से 2,30,000 मील से अधिक की यात्रा करने का अनुमान है, जो अंतरिक्ष में मनुष्यों द्वारा तय की गई अब तक की सबसे लंबी दूरी होगी।
  • मिशन की अवधि और रिकवरी: इस मिशन की योजना लगभग 10 दिनों के लिए बनाई गई है, जिसका समापन, चालक दल की रिकवरी के लिए प्रशांत महासागर में नियंत्रित स्प्लैशडाउन (Splashdown) के साथ होगा।
    • स्प्लैशडाउन (Splashdown) अंतरिक्ष यान की पृथ्वी पर वापसी के दौरान समुद्र या महासागर में सुरक्षित लैंडिंग की एक तकनीक है।
  • ‘लूनर फ्लाईबाई’ (Lunar Flyby): इस मिशन में बिना लैंडिंग के चंद्रमा के पास से उड़ान भरना शामिल है।
  • चालक दल वाला मिशन: यह अपोलो के बाद पृथ्वी की निचली कक्षा से परे पहला मानव मिशन है।
  • प्रक्षेपण वास्तुकला और प्रणोदन प्रणाली: इस मिशन में स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) का उपयोग किया गया। यह लगभग 8.8 मिलियन पाउंड थ्रस्ट उत्पन्न करने में सक्षम है, जो इसे अपोलो के दौरान उपयोग किए गए सैटर्न V (Saturn V) से लगभग 15% अधिक शक्तिशाली बनाता है।
  • AVATAR प्रयोग: ‘ए वर्चुअल एस्ट्रोनॉट टिश्यू एनालॉग रिस्पॉन्स’ (A Virtual Astronaut Tissue Analog Response- AVATAR) प्रयोग में ‘ऑर्गन-ऑन-अ-चिप’ (Organ-on-a-chip) नामक उन्नत तकनीक का उपयोग करता है, जिसमें गहरे अंतरिक्ष के विकिरण और सूक्ष्म-गुरुत्वाकर्षण के प्रभावों का अध्ययन करने के लिए चालक दल की जीवित और व्यक्तिगत रक्त कोशिकाएँ शामिल होती हैं।
  • वैश्विक भागीदारी: यह मिशन मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग को दर्शाता है, जिसमें जर्मनी, अर्जेंटीना, दक्षिण कोरिया और सऊदी अरब के क्यूबसैट (CubeSats) शामिल हैं, जिन्हें विकिरण सुरक्षा और अंतरिक्ष मौसम पर प्रयोग करने के लिए तैनात किया जा रहा है।

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