| पहलू |
DPI 1.0 |
DPI 2.0 (2025–2035) |
DPI 3.0 (2035–2047) |
| मुख्य
फोकस |
डिजिटल समावेशन |
उत्पादकता और आजीविका-आधारित वृद्धि। |
व्यापक समृद्धि और उन्नत अर्थव्यवस्था। |
| उद्देश्य |
बुनियादी डिजिटल सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित करना। |
दक्षता, आय और रोजगार को बढ़ाना। |
उच्च-आय, नवाचार-संचालित अर्थव्यवस्था प्राप्त करना। |
| प्रमुख
दृष्टिकोण |
आधारभूत डिजिटल ढाँचा विकसित करना। |
आर्थिक क्षेत्रों में DPI का विस्तार करना। |
उन्नत प्रौद्योगिकियों को व्यापक स्तर पर एकीकृत करना। |
| प्रमुख घटक |
पहचान, भुगतान, बुनियादी डेटा साझाकरण |
क्षेत्र-विशिष्ट DPI (कृषि, MSMEs, स्वास्थ्य, शिक्षा) |
सभी क्षेत्रों में उन्नत डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र |
| प्रमुख प्लेटफॉर्म |
आधार (Aadhaar), यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) |
क्षेत्रीय प्लेटफॉर्म + AI-सक्षम प्रणालियाँ |
AI-संचालित, इंटरऑपरेबल, इंटेलिजेंट सिस्टम |
| प्रौद्योगिकी की भूमिका |
पहुँच और समावेशन को सक्षम करना। |
AI और डेटा का उपयोग करके उत्पादकता में सुधार। |
नवाचार, स्वचालन और वैश्विक नेतृत्व को बढ़ावा देना। |
| प्रभाव का पैमाना |
वित्तीय समावेशन, DBT वितरण |
आजीविका, MSME विकास, सेवा दक्षता |
अर्थव्यवस्था आधारित परिवर्तन और समृद्धि |
| शासन मॉडल |
केंद्रीकृत कार्यान्वयन |
जिला-आधारित, विकेंद्रीकृत कार्यान्वयन |
अत्यधिक अनुकूलनीय, पारिस्थितिकी तंत्र-संचालित शासन |
| प्रमुख चालक |
पहचान + भुगतान + कनेक्टिविटी |
AI + डेटा + उद्यमिता |
अग्रणी तकनीक (AI, Web3, उन्नत विश्लेषण) |
| परिणाम |
समावेशन (बैंकिंग, कल्याणकारी पहुँच) |
उत्पादकता, रोजगार, आय में बढोतरी |
विकसित भारत – उच्च जीवन स्तर और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था। |