नीति आयोग का DPI@2047 रोडमैप

29 Apr 2026

संदर्भ

हाल ही में नीति आयोग ने भारत के डिजिटल परिवर्तन के अगले चरण के लिए ‘डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर’ (DPI)@2047 रोडमैप लॉन्च किया है।

संबंधित तथ्य

  • इस रोडमैप का उद्देश्य समावेशी और उत्पादकता-आधारित विकास के लिए डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) का लाभ उठाते हुए विकसित भारत 2047 के विजन को प्राप्त करना है।

डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर क्या है?

  • परिभाषा: डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) आधारभूत डिजिटल प्रणालियों का एक समूह है, जो आधुनिक समाजों के डिजिटल आधार का निर्माण करता है।
    • यह एक डिजिटल पब्लिक गुड्स (Digital Public Good) के रूप में कार्य करता है क्योंकि इसे व्यापक सुलभता, समावेशिता और विभिन्न क्षेत्रों में बहु-आयामी सेवाओं के समर्थन हेतु डिजाइन किया गया है। ।
  • उद्देश्य: DPI लोगों, व्यवसायों और सरकारों के मध्य सुरक्षित और निर्बाध संवाद को सक्षम बनाता है।

DPI के मुख्य स्तंभ

  • डिजिटल आइडेंटिटी लेयर’ (Digital Identity Layer): ‘डिजिटल आइडेंटिटी लेयर’ व्यक्तियों के सटीक सत्यापन को सक्षम बनाती है ताकि सेवाओं एवं अन्य सुविधाओं का लाभ इच्छित लाभार्थियों तक पहुँच सके।
  • डिजिटल डॉक्यूमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर (Digital Document Infrastructure): डिजिटल डॉक्यूमेंट लेयर’ आधिकारिक दस्तावेजों के भंडारण, पहुँच और सत्यापन की अनुमति देती है, जिससे भौतिक रूप से कागजी कार्रवाई पर निर्भरता कम हो जाती है।

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  • डेटा एक्सचेंज एंड ‘कंसेंट लेयर’ (Data Exchange and Consent Layer): डेटा एक्सचेंज लेयर, डेटा के सुरक्षित और सहमति-आधारित साझाकरण को सक्षम बनाती है, जो उपयोगकर्ता की स्वायत्तता की रक्षा करते हुए सेवा दक्षता में सुधार करती है।
  • डिजिटल पेमेंट लेयर (Digital Payments Layer): ‘डिजिटल पेमेंट लेयर’ तीव्र, कम लागत वाले और सुरक्षित वित्तीय लेन-देन को सक्षम बनाती है, जो वित्तीय समावेशन और औपचारीकरण का समर्थन करते हैं।
  • इंटरऑपरेबल प्लेटफॉर्म’ (Interoperable Platforms): इंटरऑपरेबिलिटी (अंतःक्रियाशीलता) यह सुनिश्चित करती है कि कई सेवा प्रदाता बिना किसी बाधा या पृथक प्रणाली विकसित किए, सामान्य डिजिटल आधारभूत ढाँचे पर एप्लिकेशन विकसित कर सकें।

DPI@2047 रोडमैप के बारे में

  • यह एक रणनीतिक रोडमैप है, जो भारत की डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) यात्रा के अगले चरण को समावेशी, गैर-रैखिक (Non-linear) और उत्पादकता-आधारित विकास के चालक के रूप में रेखांकित करता है।
  • संस्थागत सहयोग: यह रोडमैप एकस्टेप फाउंडेशन’ (EkStep Foundation) और डेलॉयट’ (Deloitte) के साथ साझेदारी में विकसित किया गया है।
  • द्विचरणीय रणनीति: यह भारत के डिजिटल परिवर्तन के लिए दो चरणों वाला मार्ग निर्धारित करता है:
    • DPI 2.0 (2025–2035): बड़े पैमाने पर आजीविका-आधारित वृद्धि को गति देने के लिए।
    • DPI 3.0 (2035–2047): व्यापक समृद्धि को सक्षम बनाने के लिए।

डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर 2.0 (DPI 2.0) के बारे में

  • डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर 2.0 (DPI 2.0) भारत के डिजिटल परिवर्तन के अगले चरण को संदर्भित करता है, जो DPI 1.0 की आधारभूत प्रणालियों पर आधारित है और क्षेत्र-विशिष्ट अनुप्रयोगों तथा समावेशी विकास पर केंद्रित है।
  • DPI 2.0 के तहत, रोडमैप विभिन्न क्षेत्रों में संरचनात्मक बाधाओं को दूर करने के लिए आठ क्षेत्रक परिवर्तनों की पहचान करता है, जैसे:-
    • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs)
    • कृषि
    • शिक्षा एवं कौशल
    • स्वास्थ्य सेवाएँ
    • वित्त एवं ऋण
    • ऊर्जा और वहनीयता
    • न्याय और विधिक सेवाएँ
    • लॉजिस्टिक्स और मोबिलिटी 
  • इस रोडमैप से संबंधित उद्देश्यों को परिणामों में परिवर्तित करने के लिए, यह चार निष्पादन अनिवार्यताओं की रूपरेखा तैयार करता है:
    • जिला-आधारित माँग एकत्रीकरण (District-led Demand Aggregation)
    • प्रौद्योगिकी उद्यमिता का विस्तार (Scaling Technology Entrepreneurship)
    • AI का लाभ उठाना
    • AI का लाभ उठाना और बेहतर डेटा उपयोग, डिजिटल लेन-देन, सुदृढ़ मानवीय क्षमता एवं AI के लोकतंत्रीकरण के माध्यम से क्रॉस-सेक्टर अनलॉक्स’ (Cross-sector unlocks) की रणनीति को लागू करना।
      • क्रॉस-सेक्टर अनलॉक्स’ का सामान्य अर्थ है ऐसी बाधाओं को दूर करना या ऐसे समाधान खोजना, जो किसी एक क्षेत्र तक सीमित न रहकर कई क्षेत्रों में एक साथ प्रगति के द्वार खोल दें।

DPI@2047 रोडमैप में चुनौतियाँ

  • डेटा गोपनीयता और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ बढ़ाता है: DPI में डेटा का बड़े पैमाने पर उपयोग डेटा उल्लंघन, निगरानी और व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग से जुड़े जोखिम उत्पन्न करता है। साथ ही डेटा सुरक्षा मानदंडों के कमजोर प्रवर्तन से जनता के विश्वास में कमी आ सकती है।
  • डिजिटल विभाजन (Digital Divide) बना रहता है: इंटरनेट कनेक्टिविटी, डिजिटल उपकरणों और डिजिटल साक्षरता तक असमान पहुँच DPI की पहुँच को सीमित करती है। सामाजिक-आर्थिक रूप से हाशिए पर रहने वाले समूह, ग्रामीण आबादी और वृद्ध नागरिक पीछे छूट सकते हैं।
    • दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट की सीमित पहुँच ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ (UPI) जैसे प्लेटफॉर्मों के प्रभावी उपयोग को प्रतिबंधित करती है।
  • जिला स्तर पर प्रक्रियात्मक बाधाओं का सामना करना पड़ता है: सफल कार्यान्वयन स्थानीय प्रशासनिक क्षमता पर निर्भर करता है, जो सभी जिलों में असमान बनी हुई है। प्रशिक्षित कर्मियों की कमी और संस्थागत तैयारी की कमी अपनाने की गति को धीमा कर सकती है।
    • जिला स्तर के अधिकारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण के बिना डेटा-संचालित शासन उपकरणों को लागू करने में कठिनाई हो सकती है।
  • AI परिनियोजन में नियामक चुनौतियों का सामना: AI के तेजी से एकीकरण से नैतिक शासन, जवाबदेही और एल्गोरिथमिक पूर्वाग्रह (Algorithmic Bias) संबंधी मुद्दे उभरकर सामने आ रहे हैं।
    • एक व्यापक नियामक ढाँचे की अनुपस्थिति से दुरुपयोग या अनपेक्षित परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।
  • तकनीक-निर्भरता के कारण बहिष्करण का जोखिम: डिजिटल प्रणालियों पर अत्यधिक निर्भरता उन लोगों को बाहर कर सकती है, जिनके पास पहुँच या कौशल नहीं है, जिससे डिजिटल बहिष्करण और असमानता उत्पन्न होती है। डिजिटल प्रणाली की विफलता या प्रमाणीकरण (Authentication) संबंधी समस्याएँ आवश्यक सेवाओं को बाधित कर सकती हैं।
    • उदाहरण के लिए: आधार में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण विफलताओं के कारण कभी-कभी कल्याणकारी लाभों से वंचित होना पड़ा है।

DPI@2047 रोडमैप का महत्त्व

  • उत्पादकता-आधारित विकास को बढ़ावा देता है: यह रोडमैप केवल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) विस्तार से ध्यान हटाकर उत्पादकता बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण रोजगार और आय के स्तर में सुधार पर केंद्रित है।
    • MSMEs और कृषि जैसे क्षेत्रों में DPI का लाभ उठाकर, इसका लक्ष्य दक्षता और बाजार तक पहुँच में सुधार करना है।
    • यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर बने डिजिटल प्लेटफॉर्म वित्तीय लेन-देन को तेजी से सक्षम बनाते हैं, जिससे लागत कम होती है और व्यावसायिक उत्पादकता बढ़ती है।
  • जनसंख्या-स्तर (Population-Scale) के नवाचार को सक्षम बनाता है: DPI ‘डिजिटल रेल्स’ के रूप में कार्य करता है, जिससे विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों और क्षेत्रों में नवाचारों को तेजी से विस्तार करने की अनुमति मिलती है।
    • यह ओपन एंड इंटरऑपरेबल इन्फ्रास्ट्रक्चर’ प्रदान करके स्टार्ट-अप्स और नवप्रवर्तकों के लिए प्रवेश बाधाओं को कम करता है।
    • AI-DPI समन्वय को मजबूत करता है: DPI के साथ AI का एकीकरण एक डेटा-समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करता है, जो निर्णय लेने और सेवा वितरण को बेहतर बनाता है। भारत वैश्विक AI प्रतिस्पर्द्धा में निम्नलिखित के माध्यम से बढ़त हासिल करता है:
      • बड़े पैमाने पर सार्वजनिक डेटासेट की उपलब्धता
      • डिजिटल बुनियादी ढाँचे की प्रभाशीलता
      • स्थानिक भाषायी (Vernacular) और समावेशी पहुँच।
  • समावेशी विकास को आगे बढ़ाता है: DPI सेवाओं और अवसरों तक समान पहुँच सुनिश्चित करके संरचनात्मक असमानताओं को कम करता है। यह निम्नलिखित के बीच के अंतर को पाटने में मदद करता है:-
    • ग्रामीण-शहरी विभाजन
    • डिजिटल विभाजन
    • आय असमानता।
  • सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को मजबूत करता है: यह रोडमैप लचीले और अनुकूलनीय डिजिटल ढाँचे प्रदान करके राज्यों को सशक्त बनाता है।
    • यह राज्य के नेतृत्व वाले नवाचार और स्थानीय कार्यान्वयन रणनीतियों को प्रोत्साहित करता है।
    • स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में DPI-आधारित प्लेटफॉर्मों के अनुकूलन से, राज्य मूलभूत स्तर पर शासन व्यवस्था को बेहतर बना सकते हैं।

पहलू  DPI 1.0 DPI 2.0 (2025–2035) DPI 3.0 (2035–2047)
मुख्य 

फोकस

डिजिटल समावेशन उत्पादकता और आजीविका-आधारित वृद्धि। व्यापक समृद्धि और उन्नत अर्थव्यवस्था।
उद्देश्य बुनियादी डिजिटल सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित करना। दक्षता, आय और रोजगार को बढ़ाना। उच्च-आय, नवाचार-संचालित अर्थव्यवस्था प्राप्त करना।
प्रमुख 

दृष्टिकोण

आधारभूत डिजिटल ढाँचा विकसित करना। आर्थिक क्षेत्रों में DPI का विस्तार करना। उन्नत प्रौद्योगिकियों को व्यापक स्तर पर एकीकृत करना।
प्रमुख घटक पहचान, भुगतान, बुनियादी डेटा साझाकरण क्षेत्र-विशिष्ट DPI (कृषि, MSMEs, स्वास्थ्य, शिक्षा) सभी क्षेत्रों में उन्नत डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र
प्रमुख प्लेटफॉर्म आधार (Aadhaar), यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) क्षेत्रीय प्लेटफॉर्म + AI-सक्षम प्रणालियाँ AI-संचालित, इंटरऑपरेबल, इंटेलिजेंट सिस्टम
प्रौद्योगिकी की भूमिका पहुँच और समावेशन को सक्षम करना। AI और डेटा का उपयोग करके उत्पादकता में सुधार। नवाचार, स्वचालन और वैश्विक नेतृत्व को बढ़ावा देना।
प्रभाव का पैमाना वित्तीय समावेशन, DBT वितरण आजीविका, MSME विकास, सेवा दक्षता अर्थव्यवस्था आधारित परिवर्तन और समृद्धि
शासन मॉडल केंद्रीकृत कार्यान्वयन जिला-आधारित, विकेंद्रीकृत कार्यान्वयन अत्यधिक अनुकूलनीय, पारिस्थितिकी तंत्र-संचालित शासन
प्रमुख चालक पहचान + भुगतान + कनेक्टिविटी AI + डेटा + उद्यमिता अग्रणी तकनीक (AI, Web3, उन्नत विश्लेषण)
परिणाम समावेशन (बैंकिंग, कल्याणकारी पहुँच) उत्पादकता, रोजगार, आय में  बढोतरी विकसित भारत – उच्च जीवन स्तर और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था।

आगे की राह: DPI 2.0 के लिए अनुशंसित कार्य योजना

  • राज्यों के नेतृत्व में विकेंद्रीकृत कार्यान्वयन: DPI 2.0 को प्राथमिक कार्यान्वयनकर्ताओं के रूप में राज्यों द्वारा संचालित किया जाना चाहिए, जो प्रासंगिक समाधान सुनिश्चित करेंगे।
    • अंतिम मील तक सेवाओं की पहुँच (Last-mile delivery) सुनिश्चित करने हेतु उत्तरदायित्व और स्वामित्व, राज्यों में निहित होना चाहिए।
    • भारत सरकार और नीति आयोग उत्प्रेरक और सहायक के रूप में कार्य करेंगे। इनके द्वारा प्रदान की गई सहायता में शामिल होना चाहिए:-
      • वित्तीय सहायता और प्रोत्साहन
      • नीतिगत मार्गदर्शन और मानक-निर्धारण
      • अंतर-राज्य समन्वय और ज्ञान साझाकरण
      • पारिस्थितिकी तंत्र सहयोग (स्टार्ट-अप, निजी क्षेत्र, नागरिक समाज)।
  • परिवर्तनों के लिए 2-वर्षीय सहयोगी और पुनरावर्ती चक्रों को अपनाना: 2-वर्षीय पुनरावृत्ति चक्र, जिसमें प्रत्येक चक्र क्षेत्रीय परिवर्तनों के एक विशिष्ट समूह पर केंद्रित होगा।
    • चयनित सुधारों के लिए ‘लाइटहाउस पायलट’ मॉडल को लागू करने हेतु पहले वर्ष में कुछ अग्रणी राज्यों के साथ सहयोग किया जाएगा, जिससे सफलता के प्रतिमान (Exemplar Pathways) स्थापित हों और ठोस प्रभाव दिखाई दे।
    • दूसरा वर्ष डिजिटल इकोसिस्टम की क्षमता निर्माण और पहले वर्ष में तैयार किए गए सफलता के मार्गों (Exemplar Pathways) को अन्य राज्यों में व्यापक रूप से अपनाने पर केंद्रित होगा।
  • वैश्विक जुड़ाव के लिए तटस्थ पारिस्थितिकी तंत्र निकाय (Neutral Ecosystem Body): एक तटस्थ और बहु-हितधारक ढाँचे के तहत, वर्ष 2027 तक एक वैश्विक स्तर की पहल स्थापित करने का लक्ष्य रखना।
    • अंतरराष्ट्रीय भागीदारों, बहुपक्षीय संस्थानों और उद्योग हितधारकों के सहयोग से विकास करना।
  • डेटा गवर्नेंस और गोपनीयता को मजबूत करना: भारत को प्राइवेसी-बाय-डिजाइन’ दृष्टिकोण अपनाने, प्रवर्तन तंत्र को सुदृढ़ करने और विश्वास पुनर्स्थापन व व्यक्तिगत डेटा के दुरुपयोग को रोकने हेतु स्वतंत्र निरीक्षण (Independent Oversight) स्थापित करके डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना चाहिए।
  • डिजिटल विभाजन को पाटना: सरकार को ग्रामीण और हाशिए पर रहने वाली आबादी के लिए समान पहुँच सुनिश्चित करने हेतु सस्ते उपकरणों, डिजिटल साक्षरता और समावेशी डिजाइन (स्थानीय भाषा और ध्वनि-आधारित इंटरफेस) को बढ़ावा देते हुए भारतनेट जैसी पहलों के माध्यम से कनेक्टिविटी में तेजी लानी चाहिए।
  • स्थानीय क्षमता और संस्थागत तत्परता बढ़ाना: डिजिटल प्रशासन, डेटा एनालिटिक्स और AI टूल में अधिकारियों को प्रशिक्षित करके जिला-स्तरीय प्रशासनिक और तकनीकी क्षमता में वृद्धि की आवश्यकता है, साथ ही जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन तथा नवाचार का समर्थन करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देना चाहिए।

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