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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) 2.0

4 May 2026

संदर्भ

हाल ही में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) 2.0 संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए, जिनका उद्देश्य बाल स्वास्थ्य स्क्रीनिंग को सुदृढ़ करना है, जिसमें विस्तारित सीमा, डिजिटल उपकरण और जीवन-चक्र आधारित देखभाल शामिल हैं। 

RBSK 2.0 के बारे में

  • RBSK 2.0 एक उन्नत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य स्क्रीनिंग (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) और प्रारंभिक हस्तक्षेप कार्यक्रम है, जो जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों को लक्षित करता है। 

दिशा-निर्देशों के प्रमुख बिंदु

  • विस्तारित 4Ds ढाँचा: 4Ds (जन्मजात दोष, रोग, कमी, विकासात्मक विलंब) के दायरे को बढ़ाकर इसमें असंक्रामक रोग, मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार संबंधी समस्याएँ शामिल की गई हैं।
  • मधुमेह पर विशेष ध्यान: सभी बच्चों (0–18 वर्ष) की स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से मधुमेह की जाँच की जाएगी।
    • ‘4Ts’ लक्षणों की पहचान पर ध्यान: Toilet (बार-बार पेशाब आना), Thirsty (अत्यधिक प्यास), Tired (अत्यधिक थकान), और Thinner (वजन कम होना)
    • इसके बाद तत्काल रक्त ग्लूकोज परीक्षण किया जाएगा।
  • जीवन-चक्र आधारित देखभाल की निरंतरता: शैशवावस्था से किशोरावस्था तक सभी चरणों में निवारक, प्रोत्साहक और उपचारात्मक सेवाएँ सुनिश्चित की जाएँगी।
  • डिजिटल स्वास्थ्य एकीकरण: डिजिटल स्वास्थ्य कार्ड, रियल-टाइम डेटा प्रणाली और ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म की शुरुआत, जिससे प्रभावी निगरानी तथा सेवा वितरण सुनिश्चित हो सके।
  • सुदृढ़ स्क्रीनिंग एवं रेफरल प्रणाली: मोबाइल स्वास्थ्य टीमों की पहुँच को बढ़ाते हुए, पहचान से उपचार तक निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत रेफरल तंत्र विकसित किया गया है।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के बारे में

  • राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK), राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य बच्चों में चयनित स्वास्थ्य स्थितियों की प्रारंभिक पहचान और हस्तक्षेप सुनिश्चित करना है, ताकि समुदाय-आधारित समग्र देखभाल प्रदान की जा सके।
  • उद्गम: RBSK को फरवरी 2013 में भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (जो अब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में समाहित है) के तहत प्रारंभ किया गया।
  • उद्देश्य: स्वास्थ्य स्थितियों की प्रारंभिक पहचान, हस्तक्षेप और प्रबंधन सुनिश्चित करना, जिससे केवल जीवित रहने के बजाय समग्र विकास को बढ़ावा दिया जा सके।
  • नोडल निकाय: इसका कार्यान्वयन स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा शिक्षा और बाल विकास प्रणालियों के समन्वय में किया जाता है।

प्रमुख स्क्रीनिंग तंत्र

  • नवजात की समग्र स्क्रीनिंग: जन्म के समय ही जन्म दोष और जन्मजात स्थितियों की शीघ्र पहचान के लिए प्रसव केंद्रों पर की जाती है।
  • समुदाय-आधारित स्क्रीनिंग: मोबाइल स्वास्थ्य टीमों (MHTs) द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों और सरकारी स्कूलों में की जाती है, जिसमें शैशवावस्था से किशोरावस्था तक के बच्चों को शामिल कर रोगों और विकासात्मक समस्याओं की प्रारंभिक पहचान की जाती है।

प्रबंधन और रेफरल प्रणाली

  • जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र (DEICs): पहचाने गए बच्चों के लिए एक ही स्थान पर निदान, उपचार और पुनर्वास सेवाएँ प्रदान करते हैं।
  • उच्च संस्थानों को रेफरल: जिन मामलों में उन्नत देखभाल की आवश्यकता होती है, उन्हें तृतीयक स्वास्थ्य संस्थानों में भेजा जाता है, जहाँ शल्य चिकित्सा हस्तक्षेप और ‘कॉक्लियर इंप्लांट’ जैसी विशेष सेवाएँ प्रदान की जाती हैं।
  • RBSK स्क्रीनिंग से लेकर उपचार तक निरंतर देखभाल सुनिश्चित करता है, जिससे रोग भार में कमी आती है और समग्र बाल विकास को समर्थन मिलता है।

महत्त्व

  • प्रारंभिक पहचान और हस्तक्षेप: स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान को सुगम बनाता है, जिससे दीर्घकालिक रोग भार में कमी आती है।
  • समग्र बाल विकास: शारीरिक, मानसिक और विकासात्मक स्वास्थ्य को संबोधित करता है, जिससे समग्र कल्याण सुनिश्चित होता है।
  • बेहतर स्वास्थ्य शासन: डिजिटल प्रणालियाँ जवाबदेही, दक्षता और साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण को सुदृढ़ करती हैं।
  • बहु-क्षेत्रीय अभिसरण: स्वास्थ्य, शिक्षा और ICDS प्रणालियों के बीच समन्वय को मजबूत करता है, जिससे एकीकृत सेवा वितरण सुनिश्चित होता है।

निष्कर्ष 

यह संरचित सुधार RBSK 2.0 को एक समग्र बाल स्वास्थ्य ढाँचे के रूप में स्थापित करता है, जो भारत की विकसित होती सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं और जनसांख्यिकीय आवश्यकताओं के अनुरूप है।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) 2.0

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