संदर्भ
वर्ष 2026 के 20वें राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस (29 जून) के अवसर पर, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने संयुक्त राष्ट्र के सतत् विकास लक्ष्यों (SDGs) की दिशा में भारत की प्रगति का आकलन करने वाले महत्त्वपूर्ण प्रकाशनों की एक शृंखला जारी की।
संबंधित तथ्य
- राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस प्रतिवर्ष 29 जून को प्रो. प्रशांत चंद्र महालनोबिस की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य भारत में आर्थिक नियोजन एवं सांख्यिकीय विकास के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान का सम्मान करना है।

जारी किए गए प्रमुख प्रकाशन
- SDG–राष्ट्रीय संकेतक रूपरेखा (NIF) प्रगति रिपोर्ट, 2026: यह रिपोर्ट भारत के राष्ट्रीय SDG संकेतकों से संबंधित नवीनतम समय-शृंखला (Time-Series) संबंधी आँकड़े प्रस्तुत करती है तथा सभी 17 सतत् विकास लक्ष्यों (SDGs) के अंतर्गत हुई प्रगति की निगरानी करती है। यह नीति-निर्माण, कार्यक्रम कार्यान्वयन, योजना निर्माण तथा अनुसंधान के लिए एक महत्त्वपूर्ण साक्ष्य-आधारित दस्तावेज प्रदान करती है।
- SDG–NIF प्रगति रिपोर्ट, 2026 : डेटा स्नैपशॉट: यह प्रगति रिपोर्ट का हैंडबुक संस्करण है, जिसमें राष्ट्रीय स्तर के SDG संकेतकों से संबंधित आँकड़ों को संक्षिप्त एवं उपयोगकर्ता-अनुकूल प्रारूप में त्वरित संदर्भ के लिए प्रस्तुत किया गया है।
- सतत् विकास लक्ष्य–राष्ट्रीय संकेतक रूपरेखा, 2026 (मेटाडाटा सहित): इस प्रकाशन में सभी 277 राष्ट्रीय SDG संकेतकों के साथ उनकी विस्तृत मेटाडेटा जानकारी दी गई है, जिसमें प्रत्येक संकेतक की परिभाषा, कार्यप्रणाली, आँकड़ों के स्रोत तथा अद्यतन की आवृत्ति (Periodicty) शामिल है।
- ट्रांसफॉर्मिंग लाइव्स : SDGs के ‘पीपुल’ (People) आयाम के अंतर्गत भारत की उपलब्धियाँ: यह विषयगत बुलेटिन SDG 1 से SDG 5 के अंतर्गत भारत की प्रगति को रेखांकित करता है। इसमें गरीबी उन्मूलन, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं लैंगिक समानता से संबंधित प्रमुख नीतिगत पहलों को प्रदर्शित किया गया है तथा ‘लीव नो वन बिहाइंड’ (Leave No One Behind) की भारत की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट किया गया है।
राष्ट्रीय संकेतक रूपरेखा (NIF) की प्रमुख विशेषताएँ
- व्यापक निगरानी ढाँचा: राष्ट्रीय संकेतक रूपरेखा (NIF) का विकास सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा नीति आयोग, संबंधित मंत्रालयों, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों तथा अन्य हितधारकों के परामर्श से किया गया है, ताकि सतत् विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति की दिशा में भारत की प्रगति की निगरानी की जा सके।
- संकेतकों का व्यापक कवरेज: NIF 2026 में सभी 17 सतत् विकास लक्ष्यों (SDGs) को सम्मिलित करते हुए 277 राष्ट्रीय संकेतक शामिल हैं, जो एक मानकीकृत राष्ट्रीय निगरानी ढाँचा प्रदान करते हैं।
- साक्ष्य-आधारित सुशासन: यह रूपरेखा विश्वसनीय, आवधिक एवं तुलनीय आँकड़े उपलब्ध कराकर योजना निर्माण, कार्यान्वयन तथा मूल्यांकन के लिए डेटा-आधारित नीति-निर्माण को समर्थन प्रदान करती है।
- वार्षिक मूल्यांकन: MoSPI प्रत्येक वर्ष 29 जून (राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस) के अवसर पर SDG–NIF प्रगति रिपोर्ट जारी करता है, जिसके माध्यम से भारत के SDGs के प्रदर्शन का समय-समय पर मूल्यांकन किया जाता है।

SDG–NIF प्रगति रिपोर्ट, 2026 की प्रमुख उपलब्धियाँ
- सामाजिक सुरक्षा का विस्तार: सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों के अंतर्गत आने वाली जनसंख्या का अनुपात वर्ष 2016 के 22% से बढ़कर वर्ष 2026 में 65.3% हो गया।

- आनुवंशिक संसाधनों का संरक्षण: पौधों, पशुओं एवं मत्स्य से संबंधित आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो खाद्य एवं कृषि जैव विविधता संरक्षण में निरंतर प्रगति को दर्शाती है।

- मातृ स्वास्थ्य में सुधार: मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) वर्ष 2015–17 में 122 से घटकर वर्ष 2022–24 में प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 87 हो गया।
- लैंगिक समानता की दिशा में प्रगति: जन्म के समय लिंगानुपात प्रति 1,000 पुरुष जीवित जन्मों पर 896 महिलाओं से बढ़कर 918 महिलाओं हो गया, जबकि पेशेवर एवं तकनीकी कर्मियों में महिला-पुरुष अनुपात 48.7% से बढ़कर 51.3% हो गया।

- नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार: स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता वर्ष 2014–15 में प्रति व्यक्ति 64.04 वाट से बढ़कर वर्ष 2025–26 में प्रति व्यक्ति 193.36 वाट हो गई।
- रोजगार में सुधार: बेरोजगारी दर वर्ष 2017–18 के 6.1% से घटकर वर्ष 2025 में 3.1% हो गई।
- अपशिष्ट प्रबंधन को सुदृढ़ करना: अपशिष्ट पुनर्चक्रण संयंत्रों की संख्या 829 से बढ़कर 3,236 हो गई।
- आर्द्रभूमि संरक्षण में वृद्धि: रामसर स्थलों के रूप में अधिसूचित आर्द्रभूमि क्षेत्र का अनुपात 4.15% से बढ़कर 8.66% हो गया।

- डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार: इंटरनेट सदस्यताओं की कुल संख्या वर्ष 2015 के 302.36 मिलियन से बढ़कर वर्ष 2025 में 969.10 मिलियन हो गई।
प्रकाशनों का महत्त्व
- SDGs की निगरानी को सुदृढ़ करना: ये प्रकाशन सतत् विकास लक्ष्यों (SDGs) की दिशा में भारत की प्रगति की निगरानी के लिए एक सुदृढ़ सांख्यिकीय रूपरेखा प्रदान करते हैं।
- साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण को बढ़ावा देना: ये सरकारों को विश्वसनीय एवं नियमित रूप से अद्यतन किए गए सांख्यिकीय साक्ष्यों के आधार पर लक्षित नीतियाँ तैयार करने में सक्षम बनाते हैं।
- पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व में वृद्धि: SDG संकेतकों का समय-समय पर प्रकाशन विकास योजना निर्माण तथा परिणामों के मूल्यांकन में पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करता है।
- अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं की पूर्ति: यह रूपरेखा सतत् विकास हेतु संयुक्त राष्ट्र के वर्ष 2030 एजेंडा के अंतर्गत भारत की रिपोर्टिंग संबंधी प्रतिबद्धताओं के निर्वहन में सहायक है।
- डेटा-संचालित सुशासन को प्रोत्साहन: ये रिपोर्टें योजना निर्माण, कार्यक्रम कार्यान्वयन तथा प्रदर्शन मूल्यांकन में आधिकारिक सांख्यिकी के प्रभावी उपयोग को सुदृढ़ बनाती हैं।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय संकेतक रूपरेखा (NIF) प्रगति रिपोर्ट, 2026 सतत् विकास लक्ष्यों (SDGs) की दिशा में भारत की प्रगति का व्यापक मूल्यांकन प्रस्तुत करते हुए साक्ष्य-आधारित सुशासन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करती है। सांख्यिकीय प्रणालियों को और मजबूत बनाना तथा डेटा-संचालित नीति-निर्माण को बढ़ावा देना वर्ष 2030 तक समावेशी, सतत् एवं लचीले (Resilient) विकास के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण होगा।