| पहलें |
विवरण एवं महत्त्व |
| राष्ट्रीय सहकारिता नीति, 2025 |
राष्ट्रीय सहकारिता नीति, 2025 आगामी दो दशकों (2025–2045) के दौरान सहकारी क्षेत्र के रूपांतरण, आधुनिकीकरण एवं व्यावसायिक प्रबंधन हेतु एक नवीन रूपरेखा है।
यह वैश्वीकरण एवं आधुनिक प्रौद्योगिकी से उत्पन्न नई चुनौतियों एवं अवसरों का समाधान करने के लिए राष्ट्रीय सहकारिता नीति, 2002 का स्थान लेती है। |
| आदर्श बहुराज्यीय सहकारी समितियाँ (संशोधन) अधिनियम, 2023 |
इसमें पारदर्शिता, निर्वाचन संबंधी उत्तरदायित्व, शिकायत निवारण, सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण, सहकारी लोकपाल की स्थापना तथा सहकारी समितियों के पुनर्वास से संबंधित प्रावधान सम्मिलित किए गए हैं। |
| विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना (2023) |
प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के माध्यम से वैज्ञानिक भंडारण विकसित कर कटाई उपरांत हानि घटाने, खाद्य सुरक्षा बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि के लिए शुरू की गई।
सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना को 31 मई, 2023 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया था तथा इसकी पायलट परियोजना 24 फरवरी, 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभकी गई थी। |
| PACS का कंप्यूटरीकरण |
63,000 से अधिक प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) का डिजिटलीकरण किया जा रहा है, जिससे सुशासन, पारदर्शिता, लेखांकन, ऋण प्रसंस्करण एवं ग्रामीण सदस्यों को सेवा वितरण में सुधार किया जा सके। |
| सामान्य सेवा केंद्र (CSCs) के रूप में प्राथमिक कृषि ऋण समिति( PACS) |
PACS को डिजिटल शासन सेवाएँ, बैंकिंग, बीमा, उपयोगिता भुगतान तथा अन्य नागरिक-केंद्रित सेवाएँ प्रदान कर बहु-सेवा संस्थानों के रूप में विकसित किया जा रहा है। |
| PACS की गतिविधियों का विस्तार |
आदर्श उपविधियों के माध्यम से PACS को डेयरी, मत्स्य पालन, भंडारण, एलपीजी वितरण, खुदरा विक्रय केंद्र, कस्टम हायरिंग केंद्र तथा जलापूर्ति सहित 25 से अधिक व्यावसायिक गतिविधियों में विविधीकरण की अनुमति दी गई है, जिससे उनकी वित्तीय व्यवहार्यता सुदृढ़ होती है। |
| राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस |
सभी सहकारी समितियों का व्यापक डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है, जिससे साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण, पारदर्शिता तथा बेहतर निगरानी सुनिश्चित की सके। |
| राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) में सुधार |
कृषि, डेयरी, मत्स्यपालन, भंडारण एवं ग्रामीण उद्योगों से संबंधित सहकारी समितियों को वित्तीय सहायता एवं परियोजना वित्तपोषण को सुदृढ़ किया गया है, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता एवं अवसंरचना में सुधार हो सके। |
| सहकारी समितियों हेतु कर सुधार |
केंद्रीय बजट के माध्यम से सहकारी समितियों पर अधिभार में कमी की गई है तथा अनेक क्षेत्रों में उन्हें कॉर्पोरेट कराधान के समकक्ष लाभ प्रदान किए गए हैं, जिससे उनकी प्रतिस्पर्द्धात्मकता बढ़े तथा औपचारीकरण को प्रोत्साहन मिले। |
| राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL) |
सहकारी संस्थाओं द्वारा उत्पादित कृषि एवं संबद्ध उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया, जिससे लघु उत्पादकों को वैश्विक बाजारों तक पहुँच एवं आय वृद्धि सुनिश्चित हो सके। |
| राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL) |
सहकारी संस्थाओं के माध्यम से जैविक उत्पादों के उत्पादन, ब्रांडिंग, प्रमाणीकरण एवं विपणन को बढ़ावा देने हेतु स्थापित किया गया, जिससे सतत् कृषि को प्रोत्साहन मिलता है। |
| भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL) |
गुणवत्तापूर्ण बीजों के उत्पादन, क्रय, प्रसंस्करण एवं वितरण में सहकारी संस्थाओं की भागीदारी सुदृढ़ करने हेतु स्थापित किया गया, जिससे बीज सुरक्षा एवं कृषि उत्पादकता में वृद्धि की जा सके। |
| राष्ट्रीय बहुराज्यीय सहकारी बीज समिति |
सहकारी नेटवर्क के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के अनुसंधान, विकास एवं वितरण को प्रोत्साहित करती है, जिससे देशभर में प्रमाणित बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। |