संदर्भ
केंद्र ने नागरिकता (संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं, जिनमें OCI पंजीकरण और नागरिकता प्रक्रियाओं के लिए डिजिटल सुधार तथा नए अनुपालन प्रावधान शामिल किए गए हैं।
नागरिकता (संशोधन) नियम, 2026 की प्रमुख विशेषताएँ
- OCI सेवाओं का डिजिटलीकरण: गृह मंत्रालय ने OCI पंजीकरण और OCI के त्याग के लिए पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रियाएँ शुरू की हैं।
- अब आवेदन आधिकारिक OCI पोर्टल के माध्यम से ही प्रस्तुत किए जाएँगे, जिससे मैनुअल प्रक्रियाओं का स्थान ले लिया गया है।
- e-OCI और पेपरलेस दस्तावेजीकरण की शुरुआत: नई इलेक्ट्रॉनिक OCI (e-OCI) प्रणाली के तहत डिजिटल या भौतिक OCI कार्ड जारी किए जा सकते हैं।
- दस्तावेजों को दो प्रतियों में जमा करने की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है, जिससे कार्यक्षमता में वृद्धि हुई है।
- नाबालिग आवेदकों के लिए अनुपालन नियम: कोई भी नाबालिग एक साथ भारतीय और विदेशी पासपोर्ट नहीं रख सकता है।
- यह भारत के एकल नागरिकता सिद्धांत को और अधिक स्पष्ट करता है।
- प्रक्रियात्मक सुरक्षा और अपील तंत्र: अब आवेदकों को अस्वीकृति या समीक्षा की स्थिति में सुने जाने का अधिकार प्राप्त है।
- अपीलों का निपटान एक स्तर उच्च प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा, जिससे निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।
OCI और NRI के बीच अंतर
| मुख्य बिंदु |
OCI (ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया) |
NRI (अनिवासी भारतीय) |
| नागरिकता की स्थिति |
विदेशी नागरिक, जिन्हें OCI का दर्जा प्राप्त है; भारतीय नागरिक नहीं होते हैं। |
भारतीय नागरिक, जो विदेश में निवास करते हैं। |
| राजनीतिक अधिकार |
मतदान का अधिकार नहीं, चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। |
पूर्ण राजनीतिक अधिकार, जिसमें मतदान (पंजीकरण होने पर) शामिल है। |
| रोजगार |
सरकारी नौकरियाँ या संवैधानिक पद धारण नहीं कर सकते हैं। |
अधिकांश नौकरियों के लिए पात्र, कुछ प्रतिबंधित क्षेत्रों को छोड़कर। |
| आर्थिक अधिकार |
निवेश कर सकते हैं, संपत्ति रख सकते हैं (कृषि भूमि को छोड़कर)। |
निवासी भारतीयों के समान पूर्ण आर्थिक अधिकार। |
| पासपोर्ट |
विदेशी पासपोर्ट रखते हैं। |
भारतीय पासपोर्ट रखते हैं। |
भारत में नागरिकता के बारे में
- संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद-5–11)
- संविधान का भाग-II संविधान के प्रारंभ के समय नागरिकता को परिभाषित करता है।
- अनुच्छेद-5–8: निवास, प्रवासन और वंश के आधार पर नागरिकता से संबंधित हैं।
- अनुच्छेद-9: स्वेच्छा से विदेशी नागरिकता प्राप्त करने पर भारतीय नागरिकता समाप्त हो जाती है।
- अनुच्छेद-11: संसद को नागरिकता संबंधी कानूनों को विनियमित करने का अधिकार प्रदान करता है।
- नागरिकता अधिनियम, 1955
- 26 जनवरी, 1950 के बाद नागरिकता के ग्रहण और समाप्त को विनियमित करता है।
- ग्रहण करने के तरीके: जन्म, वंश, पंजीकरण, प्राकृतिककरण (देशीयकरण) और क्षेत्र के समावेशन द्वारा।
- नागरिकता समाप्त होना: त्याग, समाप्ति और वंचन।
- अधिनियम में प्रमुख संशोधन
- वर्ष 1986 का संशोधन: जन्म से नागरिकता को सीमित किया; कम-से-कम एक अभिभावक का भारतीय होना आवश्यक किया।
- वर्ष 2003 का संशोधन: OCI योजना की शुरुआत और अवैध प्रवासन के विरुद्ध कड़े प्रावधान लागू किए।
- वर्ष 2005 का संशोधन: अधिकांश देशों के भारतीय मूल के व्यक्तियों (PIOs) के लिए OCI पात्रता का विस्तार किया।
- वर्ष 2015 का संशोधन: PIO और OCI योजनाओं का विलय कर एकल OCI ढाँचा बनाया।
- वर्ष 2019 संशोधन (CAA): पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से उत्पीड़ित गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए नागरिकता का मार्ग प्रदान किया गया।
निष्कर्ष
समग्र रूप से, वर्ष 2026 के संशोधन भारत के नागरिकता ढाँचे में डिजिटलीकरण, पारदर्शिता और सुव्यवस्थित शासन की दिशा में परिवर्तन को दर्शाते हैं, साथ ही एकल नागरिकता के सिद्धांत को सुदृढ़ करते हैं।