संदर्भ
सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (Civil Registration System-CRS) रिपोर्ट 2024 दर्शाती है कि भारत ने 99.1% जन्म पंजीकरण और 99.4% मृत्यु पंजीकरण हासिल कर लिया है, जो नागरिक पंजीकरण की पूर्णता में एक महत्त्वपूर्ण सुधार को दर्शाता है।
- यह रिपोर्ट कई राज्यों में जन्म के समय लिंगानुपात (Sex Ratio at Birth- SRB) में क्रमिक सुधार का भी संकेत देती है, हालाँकि क्षेत्रीय असमानताएँ अभी भी बनी हुई हैं।

CRS रिपोर्ट, 2024 की मुख्य बिंदु
- लगभग सार्वभौमिक पंजीकरण: जन्म पंजीकरण 99.1% और मृत्यु पंजीकरण 99.4% तक पहुँच गया है।
- पंजीकृत जन्मों में वृद्धि: जन्म पंजीकरण 252.1 लाख (वर्ष 2023) से बढ़कर 254.7 लाख (वर्ष 2024) हो गया है, जो प्रजनन क्षमता में तीव्र वृद्धि के बजाय पंजीकरण के बेहतर कवरेज को दर्शाता है।
- पंजीकृत मौतों में वृद्धि: पंजीकृत मौतें 86.6 लाख (वर्ष 2023) से बढ़कर 89.4 लाख (वर्ष 2024) हो गईं, जिसका मुख्य कारण बेहतर रिपोर्टिंग और पंजीकरण है।
- राज्य-स्तरीय उच्च कवरेज: 13 राज्यों ने 90% से अधिक जन्म पंजीकरण हासिल किया, जबकि 15 राज्यों ने 90% से अधिक मृत्यु पंजीकरण दर्ज किया।
- मृत जन्म (स्टिल बर्थ): भारत में वर्ष 2024 में 81,117 मृत जन्म दर्ज किए गए, जिनमें से लगभग 69% शहरी क्षेत्रों में हुए, जो मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने की आवश्यकता को दर्शाता है।
जन्म के समय लिंगानुपात (Sex Ratio at Birth- SRB)
- जन्म के समय लिंगानुपात (SRB): जन्म के समय लिंगानुपात प्रति 1,000 जीवित पुरुष जन्मों पर जीवित महिला जन्मों की संख्या को मापता है और यह लैंगिक समानता एवं लिंग-चयनात्मक प्रथाओं के प्रचलन के एक महत्त्वपूर्ण संकेतक के रूप में कार्य करता है।
- राष्ट्रीय औसत: भारत में जन्म के समय लिंगानुपात (SRB) 917 महिलाएँ प्रति 1,000 पुरुष है, जो क्रमिक सुधार को दर्शाता है, लेकिन प्राकृतिक जैविक सीमा से नीचे बना हुआ है।
- सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य/केंद्रशासित प्रदेश: अरुणाचल प्रदेश (1050), अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह (984), मेघालय (974), मिजोरम (972) और केरल (970) में जन्म के समय सबसे अधिक लिंगानुपात दर्ज किया गया।
- सबसे कम प्रदर्शन करने वाले राज्य/केंद्रशासित प्रदेश: नागालैंड (865), लक्षद्वीप (865) और झारखंड (890) में जन्म के समय सबसे कम लिंगानुपात दर्ज किया गया।
सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (Civil Registration System-CRS) के बारे में
- सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) जन्म, मृत्यु और मृत जन्म (स्टिल बर्थ) के पंजीकरण के लिए भारत की एक सतत् और अनिवार्य प्रणाली है, जो शासन और नीति नियोजन के लिए महत्त्वपूर्ण आँकड़े एकत्रित करती है।
- कानूनी आधार: यह जन्म और मृत्यु पंजीकरण (RBD) अधिनियम, 1969 के तहत संचालित होता है, जो देश भर में सभी जन्मों और मौतों के पंजीकरण को अनिवार्य बनाता है।
- नोडल प्राधिकरण: यह केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के तहत भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त के कार्यालय (ORGI) द्वारा प्रशासित होता है, और राज्य सरकारों तथा स्थानीय रजिस्ट्रारों द्वारा इसका कार्यान्वयन किया जाता है।
- उद्देश्य: यह कानूनी पहचान प्रदान करता है, विश्वसनीय महत्त्वपूर्ण आँकड़े (जन्म दर, मृत्यु दर, जन्म के समय लिंगानुपात, प्रजनन क्षमता और मृत्यु दर) प्रस्तुत करता है और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण एवं कल्याणकारी योजनाओं के वितरण में सहायता करता है।
- हालिया सुधार: जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2023 एक राष्ट्रीय डिजिटल डेटाबेस स्थापित करता है ताकि सरकारी डेटाबेस में रिकॉर्ड को सुचारू रूप से अपडेट किया जा सके और डिजिटल गवर्नेंस में सुधार किया जा सके।
- महत्त्व: CRS स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक कल्याण, जनसंख्या प्रबंधन और आपदा प्रतिक्रिया में नियोजन का समर्थन करता है, साथ ही SDG 3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण), SDG 5 (लैंगिक समानता) और SDG 16.9 (सभी के लिए कानूनी पहचान) में योगदान देता है।
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सिविल पंजीकरण में सुधार का महत्त्व
- साक्ष्य-आधारित शासन (Evidence-Based Governance): विश्वसनीय पंजीकरण डेटा स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, पोषण, सामाजिक सुरक्षा और जनसंख्या प्रबंधन में सूचित नीति निर्माण का समर्थन करता है।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य को मजबूत करना: सटीक जन्म और मृत्यु पंजीकरण रोग की निगरानी, मृत्यु दर के आकलन और मातृ-शिशु स्वास्थ्य नियोजन में सुधार करता है।
- जनसांख्यिकीय संक्रमण की निगरानी: व्यापक पंजीकरण से प्रजनन क्षमता, मृत्यु दर, आयु संरचना और जनसंख्या की गतिशीलता की स्पष्ट समझ प्राप्त होती है।
- कानूनी पहचान: जन्म पंजीकरण किसी व्यक्ति की कानूनी पहचान स्थापित करता है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सामाजिक कल्याण और नागरिकता से जुड़ी सेवाओं तक पहुँच आसान हो जाती है।
- सतत् विकास लक्ष्यों (SDGs) की निगरानी: सिविल पंजीकरण डेटा SDG 3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण), SDG 5 (लैंगिक समानता) और SDG 16.9 (सभी के लिए कानूनी पहचान) की निगरानी में योगदान देता है।
पंजीकरण में सुधार के लिए योगदान देने वाले कारक
- डिजिटल गवर्नेंस: ऑनलाइन पंजीकरण प्रणालियों के विस्तार और डिजिटलीकरण ने पंजीकरण प्रक्रियाओं को सरल बनाया है और पहुँच में सुधार किया है।
- प्रशासनिक सुधार: पंजीकरण फॉर्मों के सरलीकरण और बेहतर संस्थागत समन्वय ने अनुपालन (Compliance) को बढ़ाया है।
- संस्थागत प्रसव (Institutional Deliveries) में सुधार: संस्थागत प्रसव में वृद्धि ने स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से समय पर जन्म पंजीकरण को मजबूत किया है।
- अधिक सार्वजनिक जागरूकता: पंजीकरण के कानूनी और कल्याणकारी लाभों के बारे में बढ़ती जागरूकता ने जनता की भागीदारी में सुधार किया है।
रिपोर्ट द्वारा उजागर की गई चुनौतियाँ
- लगातार बना हुआ लैंगिक पूर्वाग्रह (Gender Bias): कुछ क्षेत्रों में लड़कों को प्राथमिकता देना और लिंग-चयनात्मक प्रथाएँ जन्म के समय असंतुलित लिंगानुपात में योगदान करती हैं।
- क्षेत्रीय असमानताएँ: महत्त्वपूर्ण अंतर-राज्यीय भिन्नताएँ लिंग-संवेदनशील नीतियों और पंजीकरण प्रणालियों के असमान कार्यान्वयन को दर्शाती हैं।
- शहरी क्षेत्रों में मृत जन्मों का संकेंद्रण: शहरी क्षेत्रों में मृत जन्मों की अत्यधिक उच्च हिस्सेदारी बेहतर मातृ स्वास्थ्य सेवा, प्रसवपूर्व सेवाओं और गुणवत्तापूर्ण प्रसूति देखभाल की आवश्यकता की माँग करती है।
- पंजीकरण की गुणवत्ता: हालाँकि कवरेज में सुधार हुआ है, लेकिन सिविल पंजीकरण की समयबद्धता, सटीकता और पूर्णता सुनिश्चित करना एक निरंतर चुनौती बनी हुई है।
सिविल पंजीकरण और लैंगिक संतुलन का समर्थन करने वाली सरकारी पहलें:
- जन्म और मृत्यु पंजीकरण (RBD) अधिनियम, 1969: जन्म और मृत्यु के पंजीकरण को अनिवार्य बनाता है, जो सिविल पंजीकरण प्रणाली (CRS) के लिए वैधानिक ढाँचा प्रदान करता है।
- जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2023: बेहतर शासन और सार्वजनिक सेवा वितरण की सुविधा के लिए जन्म और मृत्यु के लिए एक एकल डिजिटल डेटाबेस की शुरुआत की।
- सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS): जन्म, मृत्यु और मृत जन्म के निरंतर रिकॉर्डिंग के लिए भारत के आधिकारिक तंत्र के रूप में कार्य करता है।
- बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (BBBP): बाल लिंगानुपात में सुधार करने, लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने और लैंगिक भेदभाव को दूर करने का प्रयास करता है।
- गर्भाधान-पूर्व और प्रसव-पूर्व निदान तकनीक (PCPNDT) अधिनियम, 1994: गर्भाधान से पहले या बाद में लिंग चयन को प्रतिबंधित करता है और कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए नैदानिक तकनीकों को विनियमित करता है।
संवैधानिक और नीतिगत परिप्रेक्ष्य
- अनुच्छेद-14: कानून के समक्ष समानता की गारंटी देता है, जो लैंगिक परिप्रेक्ष्य के इतर समान अधिकारों और अवसरों को सुदृढ़ करता है।
- अनुच्छेद-15: लिंग के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित करता है, जो लैंगिक समानता की पहलों के लिए संवैधानिक आधार तैयार करता है।
- अनुच्छेद 21: जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार कानूनी पहचान, स्वास्थ्य सेवा और आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँच को शामिल करता है, ये सभी जन्म पंजीकरण द्वारा सुगम बनते हैं।
- SDG 16.9: सिविल पंजीकरण प्रणालियों को मजबूत करके, जन्म पंजीकरण सहित सभी के लिए कानूनी पहचान प्रदान करने का आह्वान करता है।
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आगे की राह
- सार्वभौमिक पंजीकरण हासिल करना: जन्म और मृत्यु का 100% समय पर पंजीकरण हासिल करने के लिए कम सेवा वाले और दूरदराज के क्षेत्रों में पहुँच को मजबूत करना।
- जन्म के समय लिंगानुपात में सुधार: PCPNDT अधिनियम के प्रवर्तन को तीव्र करना, लिंग-संवेदनशील जागरूकता अभियानों को बढ़ावा देना और बालिकाओं का समर्थन करने वाली योजनाओं को मजबूत करना।
- मातृ स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करना: मृत जन्म और मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए प्रसवपूर्व देखभाल, संस्थागत प्रसव और नवजात सेवाओं में सुधार करना।
- डिजिटल एकीकरण को बढ़ाना: सुचारू सेवा वितरण के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण डेटाबेस के साथ सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम को एकीकृत करना।
- डेटा गुणवत्ता को बढ़ावा देना: मजबूत साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के लिए सिविल पंजीकरण डेटा के सत्यापन, समय पर रिपोर्टिंग और इंटरऑपरेबिलिटी (परस्पर सुयोग्यता) में सुधार करना।
निष्कर्ष
भारत में जन्म और मृत्यु का लगभग सार्वभौमिक पंजीकरण जनसंख्या डेटा प्रणालियों और सार्वजनिक प्रशासन को मजबूत करने में एक बड़ा मील का पत्थर है। हालाँकि, जन्म के समय लिंगानुपात में सुधार करने, लैंगिक पूर्वाग्रह को समाप्त करने और यह सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है कि उच्च गुणवत्ता वाला सिविल पंजीकरण बेहतर शासन, समावेशी विकास और सार्वजनिक सेवाओं तक न्यायसंगत पहुँच में परिवर्तित हो सके।