पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) 2.0

30 Apr 2026

संदर्भ

पंचायती राज मंत्रालय (भारत सरकार) ने मूलभूत स्तर पर शासन का आकलन करने के लिए वित्त वर्ष 2023-24 के लिए पंचायत उन्नति सूचकांक (Panchayat Advancement Index- PAI) 2.0 रिपोर्ट जारी की।

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पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) 2.0 के प्रमुख निष्कर्ष

  • उच्च राष्ट्रीय भागीदारी: 97.3% भागीदारी हासिल की गई, जिसमें 2.59 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों ने मान्य डेटा प्रस्तुत किया।
    • PAI 1.0 के 80.79% की तुलना में यह एक उल्लेखनीय सुधार है, जो बेहतर संस्थागत स्वीकृति (Institutional Acceptance) को दर्शाता है। 
  • पंचायतों का प्रदर्शन वितरण: 1,18,824 पंचायतें (लगभग 45.7%) उत्कृष्ट प्रदर्शनकर्ता (B) श्रेणी में आती हैं।
    • 3,635 पंचायतें अग्रणी (A) श्रेणी में हैं। 
    • बहुत कम पंचायतों ने शीर्ष A+ (उपलब्धि प्राप्त करने वाली) श्रेणी प्राप्त की है।
  • आजीविका और स्वास्थ्य में मजबूत प्रगति: ‘गरीबी मुक्त एवं उन्नत आजीविका’ और ‘स्वस्थ पंचायत’ विषयों में उच्च प्रदर्शन।
    • 3,300 से अधिक पंचायतों ने आजीविका संकेतकों में A+ श्रेणी प्राप्त की है।
  • बेहतर डेटा प्रबंधन: एकल डेटा प्रविष्टि प्रपत्र, ग्राम सभा सत्यापन और वास्तविक समय डैशबोर्ड की शुरुआत।
    • क्रॉस-वैलिडेशन तंत्रों के माध्यम से पारदर्शिता, जवाबदेही और सटीकता में वृद्धि।
  • संकेतक ढाँचा तर्कसंगत बनाया गया: संकेतकों की संख्या 516 (PAI 1.0) से घटाकर 150 कर दी गई है, जिससे उपयोगिता और नीतिगत संरेखण में सुधार हुआ है।
    • इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और शासन जैसे- 9 LSDG विषयों को शामिल किया गया है।

पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) के बारे में

  • PAI ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी डेटा-आधारित ढाँचा है।
    • यह जमीनी स्तर के शासन के लिए एक “रिपोर्ट कार्ड” का कार्य करता है।
  • जारीकर्ता: पंचायती राज मंत्रालय (भारत सरकार)।
  • क्षेत्र: PAI 2.0 में भारत भर में 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है।
    • वर्ष 2025 में जारी PAI 1.0 में 2.16 लाख ग्राम पंचायतों के डेटा को शामिल और संसाधित किया गया था।
  • ढाँचे का आधार: सतत् विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (LSDG) पर आधारित।
  • उपयोग किए गए संकेतक: 150 संकेतकों और 230 डेटा बिंदुओं पर आधारित।
    • इन विषयों में गरीबी, स्वास्थ्य, बाल कल्याण, जल, पर्यावरण, अवसंरचना, सामाजिक न्याय, शासन और महिला सशक्तीकरण शामिल हैं।
  • ग्राम पंचायतों का वर्गीकरण: उनके समग्र PAI स्कोर के आधार पर पाँच प्रदर्शन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:-
    • अग्रणी/फ्रंट रनर (A): 75–89
    • बेहतर प्रदर्शन/परफार्मर (B): 60–74
    • आकांक्षी (Aspirant) (C): 40–59
    • आरंभिक स्‍तर पर/बिगनर (D): 40 से कम।

PAI 2.0 का महत्त्व

  • साक्ष्य-आधारित योजना: ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDPs) को तैयार करने के लिए विस्तृत, डेटा-आधारित जानकारी प्रदान करती है, जिससे लक्षित नीतिगत हस्तक्षेप संभव हो पाते हैं।
  • स्थानीय शासन को सुदृढ़ बनाना: ग्राम सभा सत्यापन के माध्यम से पारदर्शिता, जवाबदेही और सहभागी शासन को बढ़ावा देती है।
    • पंचायती राज संस्थाओं (PRI) की क्षमता का निर्माण करती है।
  • प्रतिस्पर्धी संघवाद को बढ़ावा देना: पंचायतों के मध्य रैंकिंग और बेंचमार्किंग स्थापित करती है।
    • सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को अनुकरण के लिए मॉडल के रूप में पहचानती है।

निष्कर्ष

PAI 2.0 जमीनी स्तर के प्रदर्शन को राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों से जोड़कर, ‘विकसित ग्राम पंचायतों’ और समावेशी ग्रामीण परिवर्तन की परिकल्पना को साकार करते हुए, डेटा-संचालित व विकेंद्रीकृत शासन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन का प्रतीक है।

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