संदर्भ
हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने देशभर की स्कूली शिक्षा प्रणालियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन एवं मानकीकरण करने हेतु वर्ष 2025–26 के लिए राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों हेतु प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक 2.0 (PGI-S) तथा जिलों हेतु प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक (PGI-D) जारी किया है।
प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक (PGI) के बारे में
- प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक (PGI) शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा विकसित एक समग्र मूल्यांकन ढाँचा है, जिसका उद्देश्य राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों एवं जिलों के स्कूली शिक्षा संबंधी प्रदर्शन का मूल्यांकन करना है।
- उद्देश्य: यह ग्रेडिंग-आधारित प्रणाली के माध्यम से शैक्षिक प्रदर्शन का आकलन करता है, जिससे सरकारों को प्रगति की निगरानी, कमियों की पहचान तथा साक्ष्य-आधारित नीतिगत हस्तक्षेप करने में सहायता मिलती है।
- दृष्टिकोण: पारंपरिक रैंकिंग प्रणाली के विपरीत, PGI एक ही प्रदर्शन ग्रेड में एक से अधिक राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों अथवा जिलों को स्थान देता है, जिससे निरंतर सुधार, स्वस्थ प्रतिस्पर्द्धा तथा सहकारी अधिगम को प्रोत्साहन मिलता है।

राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों हेतु प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक 2.0 (PGI-S) के बारे में
- उद्देश्य: PGI-S राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के स्कूली शिक्षा संबंधी समग्र प्रदर्शन का मूल्यांकन करता है तथा नीतिगत एवं प्रशासनिक सुधारों की आवश्यकता वाले क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता करता है।

- रूपरेखा: इस रूपरेखा का कुल भारांक 1,000 अंक है, जो 70 प्रदर्शन संकेतकों में विभाजित है।
- इन संकेतकों को दो व्यापक श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
- क्षेत्र: संकेतकों को छह क्षेत्रों में व्यवस्थित किया गया है:
- अधिगम परिणाम एवं गुणवत्ता: विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन, आधारभूत अधिगम तथा शिक्षा की समग्र गुणवत्ता का आकलन करता है।
- पहुँच: नामांकन, प्रतिधारण, संक्रमण तथा स्कूली शिक्षा में भागीदारी का मूल्यांकन करता है।
- अवसंरचना एवं सुविधाएँ: कक्षाओं, पेयजल, शौचालय, विद्युत तथा अन्य आवश्यक विद्यालयी सुविधाओं की उपलब्धता का आकलन करता है।
- समानता: वंचित एवं संवेदनशील समूहों के लिए शिक्षा में समावेशिता एवं समान अवसरों का मूल्यांकन करता है।
- शासन प्रक्रियाएँ: प्रशासनिक दक्षता, संस्थागत प्रबंधन तथा शैक्षिक नीतियों के क्रियान्वयन का आकलन करता है।
- शिक्षक शिक्षा एवं प्रशिक्षण: शिक्षकों की उपलब्धता, व्यावसायिक विकास तथा क्षमता निर्माण पहलों का मूल्यांकन करता है।
- आँकड़ों के स्रोत: मूल्यांकन निम्नलिखित स्रोतों से प्राप्त आँकड़ों पर आधारित है:
- एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली प्लस (UDISE+)
- परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण (PRS) 2024
- पीएम पोषण पोर्टल
- प्रबंध पोर्टल
- विद्यांजलि पोर्टल
- प्रमुख प्रदर्शन
- सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनकर्ता: चंडीगढ़ PGI 2.0 (2025–26) में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य/केंद्रशासित प्रदेश रहा तथा ‘उत्तम-3’ ग्रेड प्राप्त करने वाला एकमात्र राज्य/केंद्रशासित प्रदेश बना।
- द्वितीय सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनकर्ता: पंजाब, केरल, दिल्ली तथा दादरा एवं नागर हवेली और दमन एवं दीव को राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के बीच द्वितीय सर्वोच्च प्रदर्शन श्रेणी में स्थान दिया गया।
- उच्चतम ग्रेड अप्राप्त रहे: किसी भी राज्य अथवा केंद्रशासित प्रदेश ने ‘उत्कर्ष’, ‘उत्तम-1’ या ‘उत्तम-2’ ग्रेड प्राप्त नहीं किया, जो स्कूली शिक्षा के परिणामों में सुधार की पर्याप्त संभावनाओं को दर्शाता है।
- न्यूनतम प्रदर्शन श्रेणियाँ: किसी भी राज्य अथवा केंद्रशासित प्रदेश को ‘आकांक्षी-1’ या ‘आकांक्षी-2’ श्रेणी में स्थान नहीं दिया गया।
- ग्रेडिंग दृष्टिकोण: प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक (PGI) 2.0 रैंकिंग के स्थान पर ग्रेडिंग प्रणाली के माध्यम से राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों का मूल्यांकन करता है, जिससे एक ही प्रदर्शन श्रेणी में एक से अधिक राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को स्थान दिया जा सकता है तथा निरंतर सुधार को प्रोत्साहन मिलता है।
- ग्रेडिंग संरचना: PGI 2.0 की ग्रेडिंग रूपरेखा में उत्कर्ष (90% से अधिक), उत्तम-1 (81–90%), उत्तम-2 (71–80%), उत्तम-3 (61–70%), प्रचेष्टा-1 (51–60%), प्रचेष्टा-2 (41–50%), प्रचेष्टा-3 (31–40%), आकांक्षी-1 (21–30%), आकांक्षी-2 (11–20%) तथा आकांक्षी-3 (10% तक) सम्मिलित हैं।

जिलों हेतु प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक (PGI-D) के बारे में
- जिलों हेतु प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक (PGI-D) प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक का जिला स्तर तक विस्तार है, जिसका उद्देश्य शिक्षा नीतियों के जमीनी स्तर पर प्रभाव का आकलन करने पर विशेष बल देते हुए जिलों के शैक्षिक प्रदर्शन का एक समान मानकों के आधार पर मूल्यांकन करना है।
- रूपरेखा: इस रूपरेखा का कुल भारांक 600 अंक है, जो 70 संकेतकों में विभाजित है।
- इन संकेतकों को छह व्यापक श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
- परिणाम
- प्रभावी कक्षा शिक्षण
- अवसंरचना, सुविधाएँ एवं छात्र अधिकार
- विद्यालय सुरक्षा एवं बाल संरक्षण
- डिजिटल अधिगम
- शासन प्रक्रिया
- क्षेत्र: मूल्यांकन ग्यारह क्षेत्रों को सम्मिलित करता है:
- अधिगम परिणाम एवं गुणवत्ता (LOQ): विद्यार्थियों की अधिगम उपलब्धियों तथा शिक्षा की समग्र गुणवत्ता का आकलन करता है।
- पहुँच संबंधी परिणाम (AO): नामांकन, उपस्थिति, प्रतिधारण तथा संक्रमण दर का मूल्यांकन करता है।
- शिक्षकों की उपलब्धता एवं व्यावसायिक विकास परिणाम (TAPDO): शिक्षकों की पर्याप्तता, तैनाती तथा व्यावसायिक विकास का आकलन करता है।
- अधिगम प्रबंधन (LM): कक्षा शिक्षण प्रक्रियाओं, पाठ्यक्रम क्रियान्वयन तथा शैक्षणिक प्रबंधन का मूल्यांकन करता है।
- अधिगम संवर्द्धन गतिविधियाँ (LEA): सह-पाठ्यचर्या गतिविधियों एवं अधिगम अनुभवों को सुदृढ़ करने वाली पहलों का आकलन करता है।
- अवसंरचना, सुविधाएँ एवं छात्र अधिकार (IF&SE): विद्यालयी अवसंरचना, विद्यार्थी सुविधाओं तथा अधिकारों के वितरण का मूल्यांकन करता है।
- विद्यालय सुरक्षा एवं बाल संरक्षण (SS&CP): सुरक्षित, समावेशी एवं बाल-अनुकूल विद्यालयी वातावरण सुनिश्चित करने वाले उपायों का आकलन करता है।
- डिजिटल अधिगम (DL): डिजिटल अवसंरचना की उपलब्धता एवं प्रौद्योगिकी-सक्षम शिक्षा के प्रभावी उपयोग का मूल्यांकन करता है।
- निधियों का अभिसरण एवं उपयोग (FCU): वित्तीय संसाधनों के प्रभावी अभिसरण, आवंटन एवं उपयोग का आकलन करता है।
- उपस्थिति निगरानी प्रणाली (AMS): विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की उपस्थिति निगरानी प्रणालियों का मूल्यांकन करता है।
- विद्यालय नेतृत्व विकास (SLD): नेतृत्व क्षमता, संस्थागत योजना तथा विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणालियों का आकलन करता है।

- आँकड़ों के स्रोत: मूल्यांकन निम्नलिखित स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है:
- एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली प्लस (UDISE+)
- परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण (PRS) 2024
- प्रबंध पोर्टल
- प्रमुख प्रदर्शन
- उच्चतम ग्रेड प्रदर्शन: वर्ष 2025–26 में कोई भी जिला ‘उत्कर्ष’ ग्रेड प्राप्त नहीं कर सका, जो यह दर्शाता है कि शैक्षिक प्रदर्शन का सर्वोच्च स्तर अभी प्राप्त किया जाना शेष है।
- ‘उत्तम-1’ प्रदर्शन: वर्ष 2025–26 में केवल एक जिले ने ‘उत्तम-1’ ग्रेड प्राप्त किया।
- ‘उत्तम-2’ श्रेणी में वृद्धि: ‘उत्तम-2’ ग्रेड प्राप्त करने वाले जिलों की संख्या वर्ष 2024–25 के 16 से बढ़कर वर्ष 2025–26 में 19 हो गई, जो जिला स्तर पर शैक्षिक प्रदर्शन में क्रमिक सुधार को दर्शाती है।
- परिणाम अंकों में सुधार: कुल 462 जिलों ने परिणाम (Outcome) श्रेणी में अपने अंकों में सुधार किया, जिनमें से 50 जिले उच्चतर प्रदर्शन ग्रेड में पहुँच गए।
- उच्चतर ग्रेड की ओर संक्रमण: ‘उत्तम-3’ श्रेणी में जिलों की संख्या 75 से बढ़कर 97 हो गई, जबकि ‘प्रचेष्टा-1’ श्रेणी में जिलों की संख्या 332 से घटकर 325 रह गई, जो जिला प्रदर्शन में समग्र सुधार को दर्शाती है।

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- सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिले: ‘उत्तम-2’ श्रेणी में स्थान प्राप्त 19 जिलों में पंजाब के 7, दिल्ली के 4, केरल के 3, महाराष्ट्र के 2, तथा चंडीगढ़, दीव एवं हमीरपुर (हिमाचल प्रदेश) के एक-एक जिले सम्मिलित हैं।
- समग्र आकलन: रिपोर्ट के अनुसार ‘उत्कर्ष’ श्रेणी में किसी भी जिले का न होना तथा ‘उत्तम-1’ श्रेणी में केवल एक जिले का होना इस बात का संकेत है कि अधिगम परिणामों एवं शासन व्यवस्था में व्यापक सुधार की अभी पर्याप्त संभावनाएँ विद्यमान हैं।
महत्त्व
- परिणामोन्मुख मूल्यांकन: यह रूपरेखा केवल शैक्षिक निवेशों के आकलन तक सीमित न रहकर अधिगम परिणामों, शासन की गुणवत्ता तथा नीतियों के क्रियान्वयन के मूल्यांकन पर बल देती है।
- साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण: यह सरकारों को विश्वसनीय शैक्षिक आँकड़ों के आधार पर प्रदर्शन संबंधी कमियों की पहचान करने तथा लक्षित नीतिगत हस्तक्षेप तैयार करने में सक्षम बनाती है।
- जवाबदेही का सुदृढ़ीकरण: समय-समय पर किया जाने वाला मूल्यांकन राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों एवं जिलों में स्कूली शिक्षा के परिणामों में सुधार हेतु अधिक जवाबदेही को प्रोत्साहित करता है।
- सहकारी संघवाद को बढ़ावा: ग्रेडिंग प्रणाली स्वस्थ प्रतिस्पर्द्धा को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों एवं जिलों के बीच श्रेष्ठ प्रथाओं के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देती है।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को समर्थन: यह रूपरेखा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समानता, शिक्षक विकास, डिजिटल अधिगम तथा शासन सुधारों को प्रोत्साहित करती है।
निष्कर्ष
राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों हेतु प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक (PGI-S) तथा जिलों हेतु प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक (PGI-D) स्कूली शिक्षा के प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए एक सुदृढ़ रूपरेखा प्रदान करते हैं। आँकड़ा-आधारित शासन, जवाबदेही तथा निरंतर सुधार को बढ़ावा देकर ये राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों की प्राप्ति तथा भारत में शैक्षिक परिणामों के सुधार में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं।