संदर्भ
हाल ही में, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) रिपोर्ट 2022–23 एवं 2023–24 जारी की है।
AISHE, 2022–23 एवं 2023–24 की प्रमुख विशेषताएँ
- सकल नामांकन अनुपात (GER): सकल नामांकन अनुपात (GER) की गणना उच्च शिक्षा में नामांकित विद्यार्थियों की संख्या तथा वर्ष 2011 की जनसंख्या के आधार पर 18–23 वर्ष आयु वर्ग की कुल जनसंख्या के अनुपात के रूप में की जाती है।
- समग्र प्रवृत्ति: GER वर्ष 2014–15 में 23.7 से बढ़कर 2022–23 में 29.5 तथा वर्ष 2023–24 में 30.0 हो गया, जो उच्च शिक्षा तक पहुँच में निरंतर विस्तार को दर्शाता है।
- महिला GER: महिलाओं का GER वर्ष 2014–15 में 22.9 से बढ़कर 2022–23 में 30.2 तथा 2023–24 में 31.2 हो गया, जो उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को प्रतिबिंबित करता है।
- अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति का GER: अनुसूचित जातियों (SCs) का GER वर्ष 2014–15 में 18.9 से बढ़कर 2023–24 में 27.8 हो गया, जबकि अनुसूचित जनजातियों (STs) का GER इसी अवधि में 13.5 से बढ़कर 22.8 हो गया, जो वंचित समुदायों की शैक्षिक पहुँच में सुधार को दर्शाता है।

- लैंगिक समानता सूचकांक (GPI): लैंगिक समानता सूचकांक (GPI) की गणना महिला GER तथा पुरुष GER के अनुपात के रूप में की जाती है और यह उच्च शिक्षा में महिलाओं की सापेक्ष भागीदारी को मापता है।
- प्रदर्शन: वर्ष 2023–24 में GPI 1.08 रहा तथा लगातार सात वर्षों से 1.0 से अधिक बना हुआ है, जो पुरुषों की तुलना में महिलाओं की निरंतर अधिक भागीदारी को दर्शाता है।
- उच्च शिक्षा में नामांकन: कुल नामांकन वर्ष 2014–15 में 3.42 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2022–23 में 4.46 करोड़ तथा वर्ष 2023–24 में 4.50 करोड़ हो गया, जो पिछले एक दशक में 31.5% की वृद्धि को दर्शाता है।
- महिला नामांकन: महिला नामांकन वर्ष 2014–15 में 1.57 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2022–23 में 2.18 करोड़ तथा वर्ष 2023–24 में 2.24 करोड़ हो गया, जिससे 42.2% की वृद्धि दर्ज की गई, जो समग्र वृद्धि दर से अधिक है।
- अनुसूचित जाति नामांकन: अनुसूचित जातियों (SCs) का नामांकन वर्ष 2014–15 में 46.07 लाख से बढ़कर वर्ष 2023–24 में 69.72 लाख हो गया, जो 51.4% की वृद्धि को दर्शाता है।
- अनुसूचित जनजाति नामांकन: अनुसूचित जनजातियों (STs) का नामांकन वर्ष 2014–15 में 16.41 लाख से बढ़कर वर्ष 2023–24 में 28.83 लाख हो गया, जो 75.7% की वृद्धि को दर्शाता है।
- अन्य पिछड़ा वर्ग नामांकन: अन्य पिछड़ा वर्ग (OBCs) का नामांकन वर्ष 2014–15 में 1.13 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2023–24 में 1.80 करोड़ हो गया, जो 60.2% की वृद्धि को दर्शाता है।
- विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी एवं गणित (STEM) शिक्षा: विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी एवं गणित (STEM) क्षेत्रों में नामांकन वर्ष 2014–15 में 91.5 लाख से बढ़कर वर्ष 2023–24 में 1.02 करोड़ हो गया, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शिक्षा पर बढ़ते बल को दर्शाता है।
- STEM में महिलाओं की भागीदारी: STEM में महिला विद्यार्थियों की हिस्सेदारी वर्ष 2014–15 में 38.4% से बढ़कर वर्ष 2023–24 में 44% हो गई, जो वैज्ञानिक एवं तकनीकी शिक्षा में बढ़ती लैंगिक समावेशिता को दर्शाती है।
- शिक्षकों की संख्या: वर्ष 2023–24 में शिक्षकों की कुल संख्या बढ़कर 17.32 लाख हो गई।
- लैंगिक संरचना: कुल शिक्षण कार्यबल में पुरुष शिक्षकों की भागीदारी 55.1%, जबकि महिला शिक्षकों की भागीदारी 44.9% रही।
- महिला शिक्षकों की वृद्धि: महिला शिक्षकों की संख्या वर्ष 2014–15 में 5.69 लाख से बढ़कर वर्ष 2022–23 में 7.37 लाख तथा वर्ष 2023–24 में 7.78 लाख हो गई।
अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) के बारे में
अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) का आरंभ वर्ष 2011 में शिक्षा मंत्रालय (तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्रालय) द्वारा किया गया था। यह शिक्षा मंत्रालय द्वारा प्रतिवर्ष संचालित राष्ट्रीय सर्वेक्षण है, जिसका उद्देश्य भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र से संबंधित व्यापक आँकड़ों का संकलन करना है।
- उद्देश्य: यह उच्च शिक्षा से संबंधित आधिकारिक सांख्यिकीय आँकड़ों का प्रमुख स्रोत है तथा नीति-निर्माण, योजना निर्माण, निगरानी, संसाधन आवंटन एवं साक्ष्य-आधारित निर्णय-निर्माण में सहायता प्रदान करता है।
- कार्य-क्षेत्र: यह सर्वेक्षण देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों (HEIs), जिनमें विश्वविद्यालय, महाविद्यालय तथा स्वतंत्र संस्थान सम्मिलित हैं, को शामिल करता है।
- आँकड़ा संकलन: जानकारी वेब-आधारित ‘डेटा कैप्चर फॉर्मेट’ (DCF) के माध्यम से एकत्र की जाती है, जिसके अंतर्गत उच्च शिक्षण संस्थान (HEIs) AISHE पोर्टल पर विद्यार्थी नामांकन, शिक्षकों एवं कर्मचारियों, अवसंरचना, परीक्षा परिणाम तथा संस्थागत विशेषताओं से संबंधित आँकड़े अपलोड करते हैं।
- संस्थागत सहभागिता: वर्ष 2022–23 में पंजीकृत 60,380 उच्च शिक्षण संस्थानों (HEIs) में से 56,180 ने तथा वर्ष 2023–24 में पंजीकृत 64,756 संस्थानों में से 59,533 ने सर्वेक्षण में भाग लिया, जिससे दोनों सर्वेक्षण वर्षों में 90% से अधिक की सहभागिता दर दर्ज की गई।
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निष्कर्षों का महत्त्व
- उच्च शिक्षा का विस्तार: सकल नामांकन अनुपात (GER) एवं कुल नामांकन में निरंतर वृद्धि देशभर में उच्च शिक्षा तक पहुँच के सतत् विस्तार को दर्शाती है।
- लैंगिक समावेशन में सुधार: महिलाओं के GER में वृद्धि, लैंगिक समानता सूचकांक (GPI) का लगातार 1.0 से अधिक बने रहना तथा महिला नामांकन में वृद्धि उच्च शिक्षा में लैंगिक समानता की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाती है।
- सामाजिक समावेशन को बढ़ावा: अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) तथा अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के विद्यार्थियों के नामांकन एवं GER में वृद्धि ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों के लिए बेहतर शैक्षिक अवसरों को प्रतिबिंबित करती है।
- STEM पारिस्थितिकी तंत्र का सुदृढ़ीकरण: विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी एवं गणित (STEM) में, विशेषकर महिलाओं के नामांकन में वृद्धि, उभरती प्रौद्योगिकियों तथा ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए कुशल मानव संसाधन विकसित करने के भारत के उद्देश्य को समर्थन प्रदान करती है।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को समर्थन: इसके निष्कर्ष राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 के उद्देश्यों, विशेषकर उच्च शिक्षा तक पहुँच का विस्तार, समानता को बढ़ावा, गुणवत्ता में सुधार तथा बहुविषयक एवं तकनीकी शिक्षा में भागीदारी बढ़ाने की दिशा में निरंतर प्रगति को दर्शाते हैं।
- साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण: अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) शैक्षिक योजना निर्माण, संसाधन आवंटन, नीति मूल्यांकन तथा उच्च शिक्षा सुधारों की निगरानी के लिए एक सुदृढ़ आँकड़ा-आधार उपलब्ध कराता है।
निष्कर्ष
अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) 2022–23 एवं 2023–24 की रिपोर्टें भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र के निरंतर विस्तार एवं बढ़ती समावेशिता को प्रतिबिंबित करती हैं। सकल नामांकन अनुपात (GER), लैंगिक समानता, वंचित वर्गों के नामांकन, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी एवं गणित (STEM) में भागीदारी तथा शिक्षकों की संख्या में सुधार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों की दिशा में स्थिर प्रगति को दर्शाते हैं तथा समावेशी, कुशल एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्द्धी ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के निर्माण की आधारशिला को सुदृढ़ करते हैं।