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RTE अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में आरक्षण

30 Apr 2026

संदर्भ

लखनऊ पब्लिक स्कूल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के मामले में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए अनिवार्य प्रवेश को बरकरार रखा, जिससे निजी स्व-वित्तपोषित विद्यालयों में 25% आरक्षण के प्रावधान को और अधिक सुदृढ़ किया गया।

सर्वोच्च न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियाँ

  • मौलिक अधिकार की प्रवर्तनीयता: सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्धारित किया कि पात्र बच्चों को प्रवेश से वंचित करना अनुच्छेद 21A का उल्लंघन है; इससे शिक्षा का अधिकार केवल एक आकांक्षा (Aspiration) मात्र न रहकर, एक कानूनी रूप से प्रवर्तनीय अधिकार बन गया है।
  • निजी स्कूलों पर बाध्यकारी दायित्व: निजी स्व-वित्तपोषित ‘नेबरहुड स्कूल’ (Neighborhood Schools) राज्य द्वारा आवंटित छात्रों को प्रवेश देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं; वे पात्रता के संबंध में सक्षम प्राधिकारियों द्वारा लिए गए निर्णयों की वैधता को चुनौती नहीं दे सकते हैं।
  • RTE एक राष्ट्रीय मिशन के रूप में: सर्वोच्च न्यायालय ने RTE के कार्यान्वयन को एक राष्ट्रीय मिशन के रूप में वर्णित किया, जो सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा और समावेशी विकास प्राप्त करने के लिए आवश्यक है।
  • अनुपालन न करने पर चेतावनी: स्कूलों द्वारा प्रवेश में किसी भी प्रकार का इनकार या विलंब शिक्षा के अधिकार को एक ‘खोखला वादा’ बना देगा, जिससे इस संवैधानिक गारंटी का मूल उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।

निजी स्कूलों में आरक्षण से संबंधित प्रमुख RTE प्रावधान

  • धारा 12(1)(C) के तहत 25% आरक्षण: निजी स्व-वित्तपोषित विद्यालय के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) और वंचित समूहों के बच्चों के लिए 25% सीटें आरक्षित करना अनिवार्य है।
  • राज्य की जिम्मेदारी और प्रतिपूर्ति: राज्य प्रति बच्चे के खर्च के आधार पर विद्यालयों को प्रतिपूर्ति करता है, जिससे सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच साझा जिम्मेदारी सुनिश्चित होती है।
  • पड़ोस के विद्यालय की अवधारणा: प्रत्येक बच्चे (6-14 वर्ष) को प्राथमिक शिक्षा पूर्ण होने तक पास के विद्यालय में निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है।

25% आरक्षण के पीछे का तर्क

  • सामाजिक एकीकरण को बढ़ावा देना: समावेशी कक्षाएँ बनाकर सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के लोगों के मध्य संवाद स्थापित करना और बचपन से ही समानता को बढ़ावा देना।
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच बढ़ाना: वंचित बच्चों को निजी स्कूलों में उपलब्ध बेहतर बुनियादी ढाँचे और सीखने के वातावरण तक पहुँच प्रदान करना।
  • वास्तविक समानता को आगे बढ़ाना: औपचारिक समानता से आगे बढ़कर समाज में संरचनात्मक असमानताओं को दूर करते हुए सभी के लिए समान अवसर प्रदान करना।

शिक्षा के अधिकार (RTE) का विकास 

  • संवैधानिक आधार: शिक्षा के अधिकार का आधार राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों (DPSP) में निहित है, जहाँ अनुच्छेद-45 प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को अनिवार्य बनाता है और अनुच्छेद-39(एफ) बाल विकास और गरिमा पर जोर देता है।
    • इस दृष्टिकोण को उन्नीकृष्णन बनाम आंध्र प्रदेश राज्य मामले में न्यायिक रूप से सुदृढ़ किया गया, जहाँ सर्वोच्च न्यायालय ने यह व्यवस्था दी कि शिक्षा का अधिकार, अनुच्छेद-21 के तहत प्रदत्त ‘जीवन के अधिकार’ का ही एक अभिन्न अंग है।
  • 86वाँ संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2002: इस संशोधन ने अनुच्छेद-21A को जोड़कर शिक्षा को एक मौलिक अधिकार में परिवर्तित कर दिया, जो 6-14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देता है।
    • इसने अनुच्छेद-51A(k) के तहत मौलिक कर्तव्य भी जोड़ा, जो माता-पिता या अभिभावकों पर बच्चों को शैक्षिक अवसर प्रदान करने का कर्तव्य डालता है।
  • शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009: RTE अधिनियम ने ‘नेबरहुड स्कूल्स’ में निःशुल्क और अनिवार्य प्रारंभिक शिक्षा का प्रावधान कर अनुच्छेद 21A को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया है।
    • इस अधिनियम में निजी स्कूलों में वंचित समूहों के लिए 25% आरक्षण, अनुत्तीर्ण परीक्षा नीति और बुनियादी ढाँचे, शिक्षकों की योग्यता और विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात के लिए मानदंड जैसे महत्त्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए।
  • RTE (संशोधन) अधिनियम, 2019: वर्ष 2019 के संशोधन ने ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ में बदलाव करते हुए कक्षा 5 और 8 के लिए नियमित परीक्षा आयोजित करने का प्रावधान किया। इसके तहत, राज्यों को उन छात्रों को अनुत्तीर्ण करने का अधिकार दिया गया जो उपचारात्मक अधिगम के बाद भी निर्धारित अधिगम परिणामों को प्राप्त करने में विफल रहते हैं।

निष्कर्ष

यह निर्णय जवाबदेही लागू करके, निजी भागीदारी सुनिश्चित करके और शिक्षा के अधिकार ढाँचे के सार्थक कार्यान्वयन के माध्यम से समानता को आगे बढ़ाकर समावेशी शिक्षा को मजबूत करता है।

RTE अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में आरक्षण

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