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राज्यों में बढ़ता सब्सिडी बोझ: CAG वित्त वर्ष 2025 रिपोर्ट

19 Jun 2026

संदर्भ

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने राज्य वित्त पर अपनी वित्त वर्ष 2025 रिपोर्ट जारी की है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • असंगत वृद्धि: पिछले दशक (वित्त वर्ष 2016 से वित्त वर्ष 2025) में 28 राज्यों का कुल सब्सिडी व्यय ₹1.4 लाख करोड़ से बढ़कर ₹4.4 लाख करोड़ हो गया, जो तीन गुना वृद्धि को दर्शाता है। यह वृद्धि कुल राजकोषीय व्यय की तुलना में कहीं अधिक है, जो केवल 2.3 गुना बढ़ा है।

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  • समष्टि-राजकोषीय तनाव संकेतक: राज्यों की सब्सिडी वित्त वर्ष 2025 में पहली बार दो अंकों में पहुँच गई और यह कुल राजस्व व्यय का 10.2% तथा भारत के कुल सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का 7.7% से बढ़कर महत्त्वपूर्ण स्तर पर पहुँच गई।
  • क्षेत्रीय प्रभुत्व: राजकोषीय बोझ मुख्यतः दो क्षेत्रों में केंद्रित है:-
    • ऊर्जा (मुख्यतः विद्युत सब्सिडी) का हिस्सा 43% है, जबकि कृषि (मूल्य समर्थन, बीज/उर्वरक वितरण और ऋण माफी) का हिस्सा 30% है।
  • अत्यधिक क्षेत्रीय संकेंद्रण: राजकोषीय असमानता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जहाँ केवल पाँच राज्य (महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान) कुल राष्ट्रीय सब्सिडी का 54% (₹2.3 लाख करोड़) खर्च करते हैं।
    • कर्नाटक, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और पंजाब शीर्ष खर्च करने वाले राज्य रहे, जहाँ सब्सिडी उनके कुल बजट का 13.5% से अधिक है।
  • कम खर्च वाले क्षेत्र: छह पूर्वोत्तर राज्य (अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, नागालैंड, मेघालय, त्रिपुरा, असम) अपने कुल बजट का 1% से भी कम सब्सिडी पर खर्च करते हैं, जबकि केरल और उत्तराखंड 2% से कम खर्च करते हैं।
    • CAG के अनुसार, इसका कारण छोटा उपभोक्ता आधार, कम औद्योगिक घनत्व और कम जल-आधारित कृषि है।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के बारे में

  • यह एक संवैधानिक प्राधिकरण है, जो केंद्र और राज्य स्तर पर सरकार के वित्तीय कार्यों के ऑडिट तथा रिपोर्टिंग के लिए उत्तरदायी होता है।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद-148 के तहत स्थापित, CAG शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

CAG के प्रमुख कार्य

  • सरकारी लेखाओं का ऑडिट: केंद्र और राज्य सरकारों की प्राप्तियों तथा व्यय का ऑडिट करता है, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSUs) भी शामिल होते हैं।
  • विधायिका को रिपोर्टिंग: ऑडिट रिपोर्ट, राष्ट्रपति (केंद्र के लिए) या राज्यपाल (राज्य के लिए) को प्रस्तुत की जाती है, जिसे बाद में संसद या राज्य विधानसभाओं में रखा जाता है।
  • सार्वजनिक उद्यमों का ऑडिट: सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन की जाँच करता है।
  • संचित निधि का संरक्षक: यह सुनिश्चित करता है कि भारत या राज्यों की संचित निधि (Consolidated Fund) से निकासी केवल विधायी अनुमोदन के साथ ही की जाए।
  • विशेष ऑडिट: राष्ट्रपति या राज्यपाल के अनुरोध पर विशेष ऑडिट करता है, विशेषकर अनियमितताओं के मामलों में।

राज्यों में बढ़ता सब्सिडी बोझ: CAG वित्त वर्ष 2025 रिपोर्ट

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