भारत में हीटवेव और ओजोन की संयुक्त चरम घटनाएँ तथा उनसे होने वाली मृत्यु दर

16 Jun 2026

संदर्भ

वर्ष 2004–2024 की अवधि को कवर करने वाले एक अग्रणी राष्ट्रव्यापी अध्ययन में पाया गया है कि तीव्र होती हीटवेव हानिकारक सतही ओजोन (O₃) के निर्माण को तेज करती हैं, जिससे भारत में हृदय संबंधी और श्वसन संबंधी मृत्यु के जोखिम में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

संबंधित तथ्य 

  • हीटवेव और ओजोन प्रदूषण का दोहरा बोझ: अध्ययन में पाया गया कि हीटवेव सतही ओजोन (O₃) के निर्माण को उल्लेखनीय रूप से तेज कर देती हैं, जिससे उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में ओजोन की सांद्रता बढ़कर 85–110 μg/m³ तक पहुँच जाती है।
    • ये स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित 70 μg/m³ के दिशा-निर्देश मान से काफी अधिक हैं, जो अत्यधिक गर्मी की घटनाओं के दौरान बढ़े हुए स्वास्थ्य जोखिमों को दर्शाते हैं।

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  • स्वास्थ्य पर प्रभाव: शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि सतही ओजोन के बढ़े हुए स्तरों के संपर्क में आने से हृदय एवं श्वसन संबंधी रोगों से जुड़ी मौसमी मृत्यु दर में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
    • वर्ष 2024 के हीटवेव दिनों के दौरान, इस्केमिक हृदय रोग (IHD) और क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) से होने वाली लगभग 26,500 मौतें ओजोन के संपर्क से संबंधित पाई गईं।
    • हीटवेव की परिस्थितियों से जुड़ी ओजोन वृद्धि के कारण सामान्य आधारभूत स्तर की तुलना में लगभग 830 अतिरिक्त मौतें होने का अनुमान लगाया गया है।
  • भौगोलिक हॉटस्पॉट: पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में सतही ओजोन की सांद्रता में दीर्घकालिक रूप से सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई।
    • वर्ष 2024 में इस क्षेत्र में ओजोन का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशा-निर्देश मान से लगभग 115% अधिक पाया गया, जिससे यह देश के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक बन गया।
  • जलवायु संबंध: अध्ययन अवधि के दौरान दर्ज की गई सबसे गंभीर हीटवेव–ओजोन घटनाएँ, जिनमें वर्ष 2010, वर्ष 2016, वर्ष 2019 तथा वर्ष  2024 की घटनाएँ शामिल हैं, प्रबल एल नीनो (El Niño) घटनाओं के बाद देखी गईं।
    • यह भारत में बड़े पैमाने की जलवायु परिवर्तनशीलता और अत्यधिक ओजोन प्रदूषण की घटनाओं के बीच घनिष्ठ संबंध का संकेत देता है।

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अध्ययन के बारे में 

  • संस्थागत संबद्धता एवं प्रकाशन: यह अध्ययन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर तथा केरल मत्स्य एवं महासागर अध्ययन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया था और इसे सहकर्मी-समीक्षित वैज्ञानिक पत्रिका ‘एनपीजे क्लीन एयर’ में प्रकाशित किया गया।
  • अध्ययन का दायरा: यह भारत में हीटवेव (लू) की परिस्थितियों के दौरान सतही ओजोन (O₃) में होने वाले परिवर्तनों का पहला व्यापक, दीर्घकालिक और देशव्यापी आकलन है। यह अध्ययन वर्ष 2004– वर्ष 2024 की अवधि को कवर करता है तथा 188 हीटवेव घटनाओं का विश्लेषण करता है।
  • कार्यप्रणाली: देश के अनेक क्षेत्रों में सतही ओजोन की निरंतर निगरानी के अभाव को देखते हुए, अध्ययन में सतही अवलोकनों, उपग्रह आँकड़ों, मौसम संबंधी पुनर्विश्लेषण उत्पादों तथा वायुमंडलीय मॉडलिंग तकनीकों का उपयोग कर सतही ओजोन सांद्रता एवं हीटवेव के दौरान उसके व्यवहार का अनुमान लगाया गया।
  • डेटा स्रोत: विश्लेषण में भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 20 वर्षों के तापमान अभिलेखों, उपग्रह अवलोकनों तथा वैश्विक वायुमंडलीय डेटासेटों को एकीकृत किया गया, ताकि हीटवेव, ओजोन निर्माण और उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों के बीच संबंधों का अध्ययन किया जा सके।

नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO) + वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs) + सूर्य का प्रकाश सतही ओजोन (O

  • महत्त्व: यह अध्ययन पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर प्रमाण प्रस्तुत करता है कि हीटवेव सतही ओजोन प्रदूषण को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा देती हैं, जिससे हीट-ओजोन (Heat–Ozone) का संयुक्त खतरा उत्पन्न होता है। इसका भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा तथा जलवायु अनुकूलन नीतियों के लिए गंभीर महत्त्व है।

ओजोन (O) के बारे में  

  • सतही ओजोन (ग्राउंड-लेवल ओजोन) एक द्वितीयक वायु प्रदूषक है, जो नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO) और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (VOCs) के मध्य सूर्य के प्रकाश तथा उच्च तापमान की उपस्थिति में होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं के परिणामस्वरूप बनता है। यह फोटोकेमिकल स्मॉग (Photochemical Smog) का एक प्रमुख घटक है और इसे अक्सर “खराब ओजोन” (Bad Ozone) कहा जाता है।  (UPSC CSE Mains 2022)
  • ओजोन की द्वैध प्रकृति
    • समतापमंडलीय ओजोन (‘अच्छी ओजोन’): समतापमंडलीय ओजोन ऊपरी वायुमंडल में ओजोन परत का निर्माण करती है और सूर्य से आने वाले हानिकारक पराबैंगनी (UV) विकिरण को अवशोषित करके पृथ्वी पर जीवों की रक्षा करती है।
    • क्षोभमंडलीय या सतही ओजोन (‘खराब ओजोन’): सतही ओजोन एक हानिकारक वायु प्रदूषक है, जो अल्पकालिक जलवायु प्रदूषक के रूप में कार्य करती है तथा मानव स्वास्थ्य, कृषि एवं पारितंत्रों के लिए महत्त्वपूर्ण जोखिम उत्पन्न करती है।

PWOnlyIAS विशेष: (UPSC CSE Prelims 2011) & (UPSC CSE Prelims 1998)

  • समतापमंडल पृथ्वी के वायुमंडल की दूसरी परत है, जो पृथ्वी की सतह से लगभग 12 किमी से 50 किमी. की ऊँचाई तक विस्तृत होती है।
  • इसमें ओजोन परत (Ozone Layer) स्थित होती है, जो सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों को अवशोषित करती है।
  • क्षोभमंडल के विपरीत, समतापमंडल में ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान भी बढ़ता है, क्योंकि ओजोन परत सौर विकिरण को अवशोषित करती है।
  • यहाँ की वायु शुष्क और स्थिर होती है तथा लगभग कोई बादल या मौसम संबंधी विक्षोभ नहीं पाए जाते। इसी कारण यह परत जेट विमानों और मौसम गुब्बारों के संचालन के लिए उपयुक्त मानी जाती है।

  • सतही ओजोन (O) के प्रमुख स्रोत: सतही ओजोन (O) एक द्वितीयक प्रदूषक है, जो नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO) और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (VOCs) के सूर्य के प्रकाश तथा उच्च तापमान की उपस्थिति में परस्पर अभिक्रिया करने से बनता है।
    • वाहन उत्सर्जन: विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में वाहनों से निकलने वाले  नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO) और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (VOCs) सतही ओजोन के प्रमुख स्रोत हैं।
    • तापीय विद्युत संयंत्र:  जीवाश्म ईंधनों के दहन के दौरान बड़ी मात्रा में NOₓ का उत्सर्जन करते हैं।
    • औद्योगिक गतिविधियाँ: रिफाइनरी, सीमेंट संयंत्र, इस्पात उद्योग तथा रासायनिक निर्माण इकाइयाँ ओजोन के प्रमुख प्रदूषकों का उत्सर्जन करती हैं।
    • बायोमास दहन:  फसल अवशेष जलाना, वनाग्नि तथा घरेलू ईंधन का दहन ओजोन निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है।
    • डीजल जनरेटर एवं निर्माण मशीनरी: विशेषकर शहरी और उपनगरीय क्षेत्रों में NOₓ उत्सर्जन को बढ़ाते हैं।
    • पेंट, सॉल्वेंट, चिपकाने वाले पदार्थ (Adhesives) एवं पेट्रोकेमिकल उत्पाद: ये वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (VOCs) का उत्सर्जन करते हैं, जो ओजोन निर्माण को प्रोत्साहित करते हैं।
    • प्राकृतिक वनस्पति: जैवजनित वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (VOCs) को उत्सर्जित करती है, जो अनुकूल परिस्थितियों में ओजोन निर्माण में योगदान दे सकते हैं।
    • हीटवेव, तीव्र सौर विकिरण एवं स्थिर वायुमंडलीय परिस्थितियाँ: ये गतिविधियाँ ओजोन के निर्माण और उसके संचय की प्रक्रिया को तीव्र करती हैं।
  • सतही ओजोन के प्रभाव
    • मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव: सतही ओजोन श्वसन तंत्र में जलन उत्पन्न करता है तथा फेफड़ों की कार्यक्षमता को कम करता है।
      • इसके दीर्घकालिक संपर्क से हृदय-वाहिका रोगों, अस्पताल में भर्ती होने की घटनाओं तथा समयपूर्व मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है।
    • कृषि पर प्रभाव: ओजोन पौधों के ऊतकों को क्षति पहुँचाता है तथा प्रकाश संश्लेषण की दक्षता को कम करता है।
      • गेहूँ, धान, सोयाबीन, कपास तथा दलहनों जैसी संवेदनशील फसलें विशेष रूप से इसके प्रति अधिक प्रभावित होती हैं।
    • पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव: सतही ओजोन पौधों की वृद्धि और उत्पादकता को कम करके वनों तथा प्राकृतिक वनस्पतियों को कमजोर बनाता है।
  • जलवायु पर प्रभाव: सतही ओजोन एक अल्पकालिक जलवायु प्रदूषक (SLCP) है, जो वैश्विक तापन में योगदान देता है।
    • यह वायुमंडल में ऊष्मा को रोककर तापवर्द्धक प्रभाव उत्पन्न करता है।
  • आर्थिक प्रभाव: ओजोन प्रदूषण स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाले व्यय को बढ़ाता है तथा श्रम उत्पादकता को कम करता है।

हीटवेव के बारे में

  • भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, हीटवेव (Heatwave) असामान्य रूप से उच्च तापमान की वह अवधि है, जिसका निर्धारण निरपेक्ष तापमान सीमाओं तथा सामान्य तापमान स्थितियों से विचलन दोनों के आधार पर किया जाता है।
    • सामान्यतः, हीटवेव घोषित करने के लिए अधिकतम तापमान को मैदानी क्षेत्रों में कम से कम 40°C, तटीय क्षेत्रों में 37°C तथा पर्वतीय क्षेत्रों में 30°C तक पहुँचना आवश्यक होता है। इसके साथ ही, तापमान में सामान्य स्तर से निर्धारित विचलन का होना भी आवश्यक है।

हीटवेव ओजोन निर्माण को क्यों बढ़ाती हैं

  • तीव्र प्रकाश-रासायनिक अभिक्रियाएँ: उच्च तापमान नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO) और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (VOCs) के मध्य होने वाली प्रकाश-रासायनिक अभिक्रियाओं को तीव्र कर देता है, जिससे सतही ओजोन (O) का निर्माण बढ़ जाता है।
  • सौर विकिरण में वृद्धि: हीटवेव की परिस्थितियों में तीव्र सौर विकिरण वायुमंडलीय प्रकाश-रासायनिक गतिविधियों को बढ़ाता है, जिससे ओजोन बनने की दर में वृद्धि होती है।
  • स्थिर वायुमंडलीय परिस्थितियाँ: हीटवेव अक्सर स्थिर वायु द्रव्यमानों और कम पवन वेग से जुड़ी होती हैं, जो प्रदूषकों के प्रसार को सीमित कर देती हैं तथा ओजोन की सांद्रता को पृथ्वी की सतह के निकट जमा होने देती हैं।
  • प्रदूषकों के प्राकृतिक निष्कासन में कमी: स्वच्छ आकाश, बादलों का सीमित आवरण और कम वर्षा वायुमंडल के प्राकृतिक रूप से स्वच्छ रहने की प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं, जिससे ओजोन और उसके पूर्ववर्ती प्रदूषक अधिक समय तक वातावरण में बने रहते हैं।
  • ओजोन-निर्माण की परिस्थितियों का लंबे समय तक बने रहना: लंबे समय तक चलने वाली हीटवेव उच्च तापमान और तीव्र सौर विकिरण की परिस्थितियों को बनाए रखती है, जिसके परिणामस्वरूप सतही ओजोन प्रदूषण के उच्च स्तर की घटनाएँ अधिक समय तक बनी रहती हैं।

आपदा प्रबंधन के संदर्भ में महत्त्व 

  • अधिसूचित आपदाओं में शामिल करने का प्रस्ताव: 16वें वित्त आयोग ने सिफारिश की है कि हीटवेव (लू) और आकाशीय बिजली को भारत के आपदा प्रबंधन ढाँचे के अंतर्गत अधिसूचित आपदाओं की सूची में शामिल करने पर विचार किया जाए।
  • आपदा निधियों तक बेहतर पहुँच: ऐसे समावेशन से राज्यों को इन खतरों से संबंधित तैयारी, शमन, प्रतिक्रिया और राहत उपायों के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) का अधिक प्रभावी उपयोग करने में सहायता मिलेगी।
  • आपदा तैयारी को सुदृढ़ करना: राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) संसाधनों तक पहुँच प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, जन-जागरूकता अभियानों, हीट एक्शन प्लान तथा अन्य निवारक हस्तक्षेपों के विकास को समर्थन प्रदान करेगी।
  • राहत एवं मुआवजा तंत्र में सुधार: अधिसूचित आपदाओं के रूप में मान्यता मिलने से प्रभावित व्यक्तियों और समुदायों के लिए राहत सहायता, मुआवजा तथा समर्थन अधिक व्यवस्थित ढंग से उपलब्ध कराया जा सकेगा।
  • उभरते जलवायु जोखिमों की पहचान: यह सिफारिश भारत में हीटवेव और आकाशीय बिजली की बढ़ती आवृत्ति, तीव्रता तथा मृत्यु-दर को देखते हुए उन्हें प्रमुख जलवायु-प्रेरित आपदाओं के रूप में संबोधित करने की आवश्यकता को दर्शाती है।

निष्कर्ष 

यह अध्ययन भारत में जलवायु परिवर्तन, हीटवेव और सतही ओजोन प्रदूषण के मध्य बढ़ते संबंध को रेखांकित करता है। वायु गुणवत्ता निगरानी, हीट-एक्शन प्लान तथा जलवायु-अनुकूल सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों को सुदृढ़ बनाना, हीट–ओजोन की चरम स्थितियों से उत्पन्न जोखिमों को कम करने के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण होगा।

भारत में हीटवेव और ओजोन की संयुक्त चरम घटनाएँ तथा उनसे होने वाली मृत्यु दर

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