संदर्भ
स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग ने हितधारकों से परामर्श हेतु राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान नीति, 2026 का प्रारूप/मसौदा जारी किया है।
संबंधित तथ्य
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान नीति, 2011 भारत में स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए वर्तमान रूपरेखा प्रदान करती है।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान नीति, 2026 का प्रारूप उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान करने तथा स्वदेशी नवाचार को प्रोत्साहित करते हुए इस रूपरेखा का आधुनिकीकरण करने का प्रयास करता है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान नीति, 2026 के प्रारूप के बारे में
- यह देश की प्रथम एकीकृत राष्ट्रीय नीति है, जो जैव-चिकित्सा विज्ञान, नैदानिक चिकित्सा, लोक स्वास्थ्य, महामारी विज्ञान, डिजिटल स्वास्थ्य, स्वास्थ्य प्रणाली, व्यवहार विज्ञान तथा उभरती प्रौद्योगिकियों सहित संपूर्ण स्वास्थ्य अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को समाहित करती है।
- उद्देश्य
- भारत में रोगों के वास्तविक भार एवं लोक स्वास्थ्य की प्राथमिकताओं के अनुरूप वैज्ञानिक अनुसंधान को समन्वित करना।
- स्वदेशी नवाचार को प्रोत्साहित करना।
- साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को सुदृढ़ करना।
- अनुसंधान में किए गए निवेश से मापन योग्य परिणाम सुनिश्चित करना।
प्रमुख प्रस्ताव
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान कार्यसूची: रोगों के बोझ, उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों, स्वास्थ्य प्रणाली की आवश्यकताओं, वैज्ञानिक अवसरों, स्वास्थ्य समानता, महामारी तैयारी तथा राष्ट्रीय सामरिक हितों के आधार पर समय-समय पर प्राथमिक अनुसंधान क्षेत्रों की पहचान करने हेतु राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान कार्यसूची तैयार करने का प्रस्ताव किया गया है।
- प्राथमिक अनुसंधान क्षेत्र: क्षयरोग, प्रतिजैविक प्रतिरोध, वाहक-जनित रोग, कैंसर, गैर-संचारी रोग, मानसिक स्वास्थ्य, रक्ताल्पता, बाल कुपोषण, महिला स्वास्थ्य, मातृ एवं नवजात मृत्यु, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा तथा आपातकालीन चिकित्सा को प्रमुख अनुसंधान क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया है।
| स्तर |
भूमिका |
| राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान संचालन समिति |
समग्र सामरिक समन्वय |
| स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग |
नोडल कार्यान्वयन एजेंसी |
| भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद |
वैज्ञानिक एवं तकनीकी नेतृत्व |
शासन व्यवस्था: त्रि-स्तरीय शासन संरचना
- विनियामक एवं नैतिक सुधार: बहु-केंद्रीय अध्ययनों के लिए नैतिक अनुमोदन की प्रक्रिया को सरल बनाने, राष्ट्रीय अनुसंधान सत्यनिष्ठा कार्यालय की स्थापना, स्वास्थ्य अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग तथा अनुसंधान सत्यनिष्ठा, साइबर सुरक्षा, आँकड़ों का उचित प्रबंधन एवं सामुदायिक सहभागिता पर अधिक बल देने का प्रस्ताव किया गया है।
- अनुसंधान मूल्यांकन रूपरेखा: अनुसंधान के मूल्यांकन को प्रकाशनों, उद्धरणों एवं पेटेंटों तक सीमित रखने के बजाय लोक नीति, नैदानिक अभ्यास, स्वास्थ्य कार्यक्रमों, स्वदेशी प्रौद्योगिकियों, संस्थागत क्षमता, समानता तथा सामाजिक कल्याण पर उसके वास्तविक प्रभाव के आधार पर करने का प्रस्ताव है। इसके अंतर्गत भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद अनुसंधान एवं नवाचार प्रभाव मापनी के व्यापक उपयोग पर भी बल दिया गया है।
- अनुसंधान निवेश में वृद्धि: सकल घरेलू उत्पाद के 0.024% से बढ़ाकर वर्ष 2037 तक 0.072% तथा वर्ष 2047 तक 0.15% सार्वजनिक व्यय स्वास्थ्य अनुसंधान पर करने का चरणबद्ध प्रस्ताव किया गया है।
- दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्य: अनुसंधान निवेश, चिकित्सा विज्ञान में पीएचडी, वैज्ञानिक प्रकाशनों, पेटेंटों तथा अनुमोदित स्वदेशी स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों के लिए मापन योग्य लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
नीति की आवश्यकता
- अव्यवस्थित अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र: स्वास्थ्य अनुसंधान विभिन्न संस्थानों में विखंडित है तथा उसमें समन्वय एवं सामरिक दिशा का अभाव है।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं के साथ असंगति: अनुसंधान में भारत के उच्च रोग भार, स्वास्थ्य प्रणाली की कमियों, समानता संबंधी चिंताओं तथा उभरती लोक स्वास्थ्य चुनौतियों को पर्याप्त प्रतिबिंबित नहीं किया जाता है।
- निम्न सार्वजनिक निवेश: स्वास्थ्य अनुसंधान पर सार्वजनिक व्यय वैश्विक मानकों की तुलना में काफी कम है, जिससे अनुसंधान क्षमता एवं नवाचार प्रभावित होते हैं।
- क्षेत्रीय असमानताएँ: अनुसंधान अवसंरचना, वित्तपोषण एवं वैज्ञानिक क्षमता कुछ चुनिंदा संस्थानों एवं राज्यों तक सीमित है, जबकि अनेक चिकित्सा महाविद्यालयों का अनुसंधान उत्पादन अत्यंत सीमित है।
- व्यवहार में सीमित अनुप्रयोग: वैज्ञानिक निष्कर्षों का स्वास्थ्य सेवा, नीति निर्माण तथा नैदानिक अभ्यास में उपयोग अपेक्षाकृत धीमी गति से होता है।
- प्रशासनिक एवं विनियामक से संबंधित बाधाएँ: अनुमोदन प्रक्रियाओं में अत्यधिक समय लगना तथा प्रक्रियागत विलंब समयबद्ध अनुसंधान एवं नवाचार में बाधा उत्पन्न करते हैं।
भारत में स्वास्थ्य अनुसंधान के बारे में
- इसमें जैव-चिकित्सा विज्ञान, नैदानिक चिकित्सा, लोक स्वास्थ्य, महामारी विज्ञान, डिजिटल स्वास्थ्य, स्वास्थ्य प्रणाली, व्यवहार विज्ञान तथा उभरती प्रौद्योगिकियाँ सम्मिलित हैं।
- प्रमुख संस्थान: भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एवं अन्य प्रमुख चिकित्सा संस्थान तथा राष्ट्रीय पोषण संस्थान, हैदराबाद।
- भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद: यह जैव-चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में सर्वोच्च संस्था तथा देश का प्रमुख चिकित्सा अनुसंधान संगठन है।
- स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग: यह स्वास्थ्य अनुसंधान से संबंधित नीतियों के निर्माण, समन्वय एवं प्रोत्साहन के लिए उत्तरदायी नोडल विभाग है।
- अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एवं अन्य प्रमुख चिकित्सा संस्थान: ये उन्नत चिकित्सा शिक्षा, नैदानिक अनुसंधान तथा वैज्ञानिक खोजों को व्यावहारिक उपचार एवं स्वास्थ्य सेवाओं में रूपांतरित (रूपांतरणीय स्वास्थ्य अनुसंधान) करने संबंधी अनुसंधान करते हैं।
- राष्ट्रीय पोषण संस्थान (NIN), हैदराबाद: पोषण अनुसंधान, खाद्य सुरक्षा तथा जनसंख्या के पोषण स्तर में सुधार और पोषण-संबंधी रोगों की रोकथाम (लोक स्वास्थ्य पोषण) हेतु कार्यरत प्रमुख संस्थान।