मुक्त व्यापार समझौते (FTAs) और भारत

9 Jun 2026

संदर्भ 

भारत–ओमान समझौते के 1 जून से प्रभावी होने के साथ, भारत के पास अब 27 देशों को शामिल करने वाले कुल 15 मुक्त व्यापार समझौते (FTAs) हैं।

संबंधित तथ्य

  • अन्य 9 समझौते 42 देशों के साथ अंतिम चरण में हैं। इनके पूर्ण होने पर भारत के FTA भागीदार देशों की संख्या 69 हो जाएगी तथा ये देश के लगभग 75% निर्यात का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।

मुक्त व्यापार समझौते (FTAs) के बारे में

  • मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दो या अधिक देशों के बीच किया गया एक व्यापार समझौता होता है, जिसका उद्देश्य वस्तुओं एवं सेवाओं पर शुल्क, कोटा तथा अन्य व्यापार बाधाओं को कम या समाप्त करना होता है, ताकि व्यापार एवं निवेश प्रवाह को बढ़ावा दिया जा सके।
  • भारत के FTA के उदाहरण
    • भारत–मॉरीशस FTA (2021): इसने भारत के हालिया व्यापार समझौतों के विस्तार की शुरुआत को चिह्नित किया।
    • भारत–UAE CEPA (मई 2022): इसने UAE के साथ व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी को सुदृढ़ किया।
    • भारत–ऑस्ट्रेलिया ECTA (दिसंबर 2022): इसने बाजार पहुँच तथा आर्थिक सहयोग को बढ़ाया।
    • EFTA TEPA (मार्च 2024 में हस्ताक्षरित, अक्टूबर 2025 से प्रभावी): इसने भारत के यूरोपीय साझेदारों के साथ जुड़ाव का विस्तार किया।
    • भारत–UK CETA (जुलाई 2025) तथा भारत–ओमान CEPA (दिसंबर 2025): इन समझौतों ने भारत की व्यापार साझेदारियों को और व्यापक बनाया।
    • भारत–न्यूजीलैंड FTA (दिसंबर 2025) तथा भारत–EU FTA (जनवरी 2026): इनसे प्रमुख अर्थव्यवस्थाएँ भारत के व्यापार नेटवर्क में शामिल हुईं।
    • भारत–US अंतरिम समझौता ढाँचा (फरवरी 2026): इसने भारत की वैश्विक व्यापार उपस्थिति को सुदृढ़ किया।

FTAs की प्रमुख विशेषताएँ

  • टैरिफ में कमी: सदस्य देश आपस में व्यापार किए जाने वाले उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी को कम या समाप्त करते हैं, जिससे आयात-निर्यात सस्ता होता है।
  • बाजार पहुँच: मुक्त व्यापार समझौते साझेदार देशों के व्यवसायों को एक-दूसरे के बाजारों में आसान पहुँच प्रदान करते हैं।
  • उत्पत्ति के नियम: उत्पादों को प्राथमिकता शुल्क लाभ प्राप्त करने के लिए निर्धारित मानदंडों को पूरा करना होता है, जिससे तीसरे देशों द्वारा दुरुपयोग रोका जा सके।
  • निवेश एवं सेवाएँ: आधुनिक मुक्त व्यापार समझौतों में निवेश, बौद्धिक संपदा, डिजिटल व्यापार तथा सेवाओं जैसे क्षेत्रों को भी शामिल किया जाता है।

भारत के मुक्त व्यापार समझौतों से संबंधित चुनौतियाँ

  • व्यापार घाटे में वृद्धि: भारत का मुक्त व्यापार समझौता भागीदारों के साथ व्यापार घाटा काफी बढ़ा है; वर्ष 2007-09 से 2024-25 के बीच आसियान के साथ 381%, जापान के साथ 318% तथा दक्षिण कोरिया के साथ 268% वृद्धि हुई है, जबकि शेष विश्व के साथ यह 142% रहा।
  • बाह्य असंतुलन: पिछले तीन वर्षों में आसियान, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ भारत का औसत वार्षिक व्यापार घाटा लगभग 62 बिलियन डॉलर रहा, जो निर्यात वृद्धि की धीमी गति को दर्शाता है।
  • असमान बाजार पहुँच: अधिकांश साझेदार पहले से ही निम्न-टैरिफ अर्थव्यवस्थाएँ हैं, जबकि भारत का व्यापार-भारित MFN टैरिफ लगभग 12.6% है।
  • विदेशी निर्यातकों को अधिक लाभ: भारत द्वारा टैरिफ घटाने पर विदेशी उत्पादों को मूल्य लाभ मिलता है, जबकि भारतीय निर्यातकों को सीमित अतिरिक्त लाभ मिलता है।
  • निर्यात उपयोगिता कम: भारत के केवल 20–30% योग्य निर्यात ही मुक्त व्यापार समझौतों के लाभों का उपयोग कर पाते हैं, जिसका कारण अनुपालन लागत एवं प्रमाणन प्रक्रियाएँ हैं।
  • आयात उपयोगिता अधिक: आयात पक्ष पर उपयोगिता दर 60–70% है, जिससे व्यापार असंतुलन और बढ़ता है।
  • इनपुट लागत में वृद्धि: कच्चे माल पर अधिक शुल्क तथा तैयार वस्तुओं पर कम शुल्क के कारण उत्पादन लागत बढ़ती है।
  • विनिर्माण में नुकसान: उदाहरण के लिए, इस्पात एवं एल्युमिनियम पर 7.5–10% शुल्क है, जबकि उनसे बने उत्पाद कुछ समझौतों के तहत शुल्क-मुक्त प्रवेश प्राप्त कर लेते हैं।
  • डाउनस्ट्रीम उद्योगों पर दबाव: रसायन, प्लास्टिक, रबर एवं वस्त्र उद्योगों को कच्चे माल पर उच्च शुल्क के कारण लागत दबाव झेलना पड़ता है।
  • मेक इन इंडिया’ पर प्रभाव: टैरिफ असमानताएँ घरेलू मूल्य संवर्द्धन को हतोत्साहित करती हैं तथा वैश्विक आपूर्ति शृंखला में एकीकरण को कठिन बनाती हैं।
  • भारतीय उद्योगों के लिए लागत संबंधी हानि: घरेलू उत्पादकों को ऐसे आयातित उत्पादों से प्रतिस्पर्द्धा करनी पड़ती है, जो वैश्विक कीमतों के आधार पर निर्मित होते हैं और प्राथमिकता शुल्क लाभ प्राप्त करते हैं।

मुक्त व्यापार समझौतों पर भारत द्वारा बल दिए जाने के कारण

  • निर्यात बाजारों का विविधीकरण: भारत पारंपरिक बाजारों पर निर्भरता कम कर नए एवं उच्च-विकास वाले बाजारों तक प्राथमिकता पहुँच प्राप्त करना चाहता है।
  • वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में एकीकरण: मुक्त व्यापार समझौते भारत को वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करने तथा विशेषकर चीन+1 रणनीति के तहत अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखलाओं में शामिल होने में सहायता करते हैं।
  • विनिर्माण प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बढ़ावा: बेहतर बाजार पहुँच से मेक इन इंडिया तथा उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) जैसी पहलों को समर्थन मिलता है, जिससे भारतीय उद्योग आकार की अर्थव्यवस्थाएँ प्राप्त कर सकते हैं।
  • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित करना: व्यापार समझौते स्थिर नियम, निवेशकों का विश्वास तथा बड़े बाजारों तक पहुँच प्रदान करते हैं, जिससे भारत वैश्विक निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनता है।
  • बढ़ते संरक्षणवाद का मुकाबला: वैश्विक स्तर पर बढ़ती व्यापार बाधाओं एवं आपूर्ति शृंखला व्यवधानों के बीच, मुक्त व्यापार समझौते विश्वसनीय व्यापार साझेदारी सुनिश्चित करते हैं।
  • सेवा क्षेत्र के व्यापार का विस्तार: आधुनिक मुक्त व्यापार समझौते भारत की आईटी, वित्त, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं डिजिटल व्यापार में क्षमता को बढ़ाने के अवसर प्रदान करते हैं।
  • सीमित स्रोतों से आयात पर निर्भरता में कमी: विविध व्यापार साझेदारियों से महत्त्वपूर्ण वस्तुओं, प्रौद्योगिकी एवं कच्चे माल के लिए आपूर्ति शृंखला अधिक अनुकूलित बनती है।
  • रणनीतिक साझेदारियों को सुदृढ़ करना: मुक्त व्यापार समझौते आर्थिक कूटनीति के उपकरण के रूप में कार्य करते हैं तथा इंडो-पैसिफिक, यूरोप और पश्चिम एशिया के देशों के साथ संबंध मजबूत करते हैं।
  • कोविड-19 के बाद आपूर्ति शृंखला पुनर्गठन: वैश्विक कंपनियाँ उत्पादन नेटवर्क में बदलाव कर रही हैं, जिससे भारत के लिए वैकल्पिक विनिर्माण केंद्र बनने का अवसर उत्पन्न हुआ है।

भारत के लिए मुक्त व्यापार समझौतों के लाभ

  • निर्यात वृद्धि: मुक्त व्यापार समझौते टैरिफ एवं व्यापार बाधाओं में कमी कर भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजारों में प्राथमिकता पहुँच प्रदान करते हैं, जिससे वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स एवं इंजीनियरिंग उत्पाद जैसे क्षेत्रों को लाभ मिलता है।
  • निवेश में वृद्धि: स्थिर व्यापार नियम विदेशी निवेश आकर्षित करते हैं तथा भारत को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में एकीकृत करने में सहायता करते हैं।
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण: आधुनिक समझौते निवेश, डिजिटल व्यापार एवं सहयोग को बढ़ावा देते हैं, जिससे उन्नत तकनीक एवं वैश्विक रूप से श्रेष्ठ प्रथाओं तक पहुँच मिलती है।
  • उपभोक्ता लाभ: कम टैरिफ से उत्पादों की विविधता बढ़ती है, प्रतिस्पर्द्धा में वृद्धि होती है तथा उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर वस्तुएँ उपलब्ध होती हैं।
  • विनिर्माण प्रतिस्पर्द्धात्मकता: उद्योगों को सस्ते कच्चे माल, मशीनरी एवं वैश्विक बाजारों तक पहुँच मिलती है, जिससे उत्पादकता एवं पैमाना बढ़ता है।
  • रणनीतिक साझेदारी: व्यापार समझौते महत्त्वपूर्ण देशों के साथ आर्थिक एवं कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करते हैं तथा वैश्विक व्यापार में भारत की भूमिका को सुदृढ़ करते हैं।

मुक्त व्यापार समझौतों से क्षेत्रीय अवसर

  • इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर: मुक्त व्यापार समझौते भारत को महत्त्वपूर्ण घटकों, प्रौद्योगिकी एवं वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं तक पहुँच प्रदान कर सकते हैं।
    • यह सेमीकंडक्टर निर्माण एवं इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात जैसी पहलों को समर्थन देते हैं।
  • फार्मास्यूटिकल्स: बेहतर बाजार पहुँच से भारत की सस्ती दवाओं के वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में भूमिका का विस्तार हो सकता है।
  • कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण: मुक्त व्यापार समझौते प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, समुद्री उत्पाद, मसाले एवं कृषि उत्पादों के लिए नए बाजार खोल सकते हैं, बशर्ते गुणवत्ता मानकों में सुधार किया जाए।
  • सेवा क्षेत्र: मुक्त व्यापार समझौतों के अंतर्गत भारत निम्नलिखित क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण लाभ प्राप्त कर सकता है:
    • आईटी सेवाएँ
    • डिजिटल अर्थव्यवस्था
    • व्यावसायिक सेवाएँ
    • शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ।

आगे की राह

  • संतुलित वार्ताएँ: भारत को ऐसे मुक्त व्यापार समझौतों पर ध्यान देना चाहिए, जो समान बाजार पहुँच सुनिश्चित करें तथा कृषि एवं MSMEs जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करें।
  • प्रतिस्पर्द्धात्मकता में सुधार: लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, अवसंरचना सुधार, कौशल विकास तथा गुणवत्ता मानकों को सुदृढ़ करना आवश्यक है, ताकि मुक्त व्यापार समझौतों को वास्तविक निर्यात लाभ में बदला जा सके।
  • इनपुट लागत असंतुलन में कमी: कच्चे माल एवं मध्यवर्ती वस्तुओं पर टैरिफ का युक्तीकरण घरेलू उद्योगों को आयातित उत्पादों के साथ प्रतिस्पर्द्धा करने में सहायता करेगा।
  • FTA उपयोगिता में वृद्धि: उत्पत्ति के नियमों को सरल बनाना, अनुपालन लागत कम करना तथा निर्यातकों में जागरूकता बढ़ाना मुक्त व्यापार समझौतों के लाभों के उपयोग को बढ़ा सकता है।
  • घरेलू उद्योग को सुदृढ़ करना: मुक्त व्यापार समझौतों को PLI, मेक इन इंडिया एवं MSME समर्थन नीतियों के साथ समन्वित किया जाना चाहिए, ताकि घरेलू मूल्य संवर्द्धन को बढ़ावा मिले।
  • उच्च-गुणवत्ता वाले समझौतों पर ध्यान: भविष्य के समझौतों में केवल टैरिफ कमी के बजाय सेवाएँ, डिजिटल व्यापार, हरित प्रौद्योगिकी एवं निवेश को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

निष्कर्ष

  • भारत का मुक्त व्यापार समझौतों पर बढ़ता ध्यान केवल व्यापार मात्रा बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खंडित वैश्विक आर्थिक व्यवस्था के अनुरूप स्वयं को ढालने का प्रयास भी दर्शाता है।
  • बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं तथा कमजोर होती बहुपक्षीय संस्थाओं के मध्य, मुक्त व्यापार समझौते अब रणनीतिक साझेदारी, आपूर्ति शृंखला सुदृढ़ता एवं आर्थिक सुरक्षा के महत्त्वपूर्ण साधन बनते जा रहे हैं।
  • आगे चलकर, भारत की व्यापार नीति केवल आर्थिक लाभों से ही नहीं, बल्कि वृहद रणनीतिक विचारों द्वारा भी निर्धारित होगी।

मुक्त व्यापार समझौता (FTA) और संबंधित व्यापार अवधारणाओं के बीच अंतर

अवधारणा अर्थ शुल्क में कमी दायरा उदाहरण
मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दो या अधिक देशों के मध्य ऐसा समझौता है, जिसमें सदस्य देशों के मध्य शुल्क और व्यापार बाधाओं को कम या समाप्त किया जाता है। अनेक वस्तुओं/सेवाओं पर शुल्क कम या समाप्त। वस्तुओं, सेवाओं, निवेश, मूल के नियम आदि। भारत–UAE CEPA, भारत–ऑस्ट्रेलिया ECTA
प्राथमिकता व्यापार समझौता (PTA) ऐसा समझौता है, जिसमें चयनित उत्पादों पर वरीयतापूर्ण शुल्क दिया जाता है, परंतु पूर्ण शुल्क समाप्ति नहीं होती। विशिष्ट उत्पादों पर सीमित कमी। FTA से संकीर्ण; चयनित वस्तुओं तक सीमित। भारत–मर्कोसुर PTA
व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) FTA का विस्तृत रूप जो व्यापार, सेवाएँ, निवेश, बौद्धिक संपदा और आर्थिक सहयोग को कवर करता है। महत्त्वपूर्ण शुल्क कमी। वस्तुएँ + सेवाएँ + निवेश + नियामकीय सहयोग। भारत–UAE CEPA
आर्थिक सहयोग समझौता (ECA) मुख्यतः आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग पर केंद्रित समझौता, न कि व्यापक शुल्क उदारीकरण पर। सीमित शुल्क रियायतें हो सकती हैं। प्रौद्योगिकी, निवेश, क्षमता निर्माण, सहयोग। भारत–ऑस्ट्रेलिया ECTA
सीमा शुल्क संघ देश आपस में शुल्क समाप्त करते हैं और अन्य देशों के लिए समान बाहरी शुल्क अपनाते हैं। आंतरिक रूप से शून्य/कम शुल्क। व्यापार नीति संयुक्त रूप से संचालित। यूरोपीय संघ सीमा शुल्क संघ
सामान्य बाजार सीमा शुल्क संघ के साथ वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी और श्रम की मुक्त आवाजाही। आंतरिक शुल्क नहीं। व्यापक आर्थिक एकीकरण। यूरोपीय संघ
आर्थिक संघ सर्वोच्च स्तर का एकीकरण जिसमें साझा आर्थिक नीतियाँ और संस्थाएँ शामिल होती हैं। व्यापार बाधाएँ नहीं + समन्वित नीतियाँ। मौद्रिक, राजकोषीय और आर्थिक समन्वय। यूरोपीय संघ (आंशिक)
बहुपक्षीय व्यापार समझौता वैश्विक ढाँचे के अंतर्गत कई देशों के बीच व्यापार समझौता। समझौते पर निर्भर। व्यापक वैश्विक व्यापार नियम। WTO समझौते
द्विपक्षीय व्यापार समझौता दो देशों के बीच व्यापार समझौता। सामान्यतः दोनों देशों के बीच शुल्क में कमी। दो देशों तक सीमित। भारत–जापान CEPA
क्षेत्रीय व्यापार समझौता (RTA) किसी क्षेत्र के देशों के बीच व्यापार समझौता। PTA से FTA तक भिन्न। क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण। आसियान मुक्त व्यापार क्षेत्र।

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