संदर्भ
यद्यपि प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना ने 40 लाख अधिष्ठानों पर सौर ऊर्जा क्षमता को स्थापित करने संबंधी महत्त्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली है, जिससे सौर ऊर्जा क्षमता में 12 गीगावाट से अधिक की वृद्धि हुई है, किंतु फिर भी वर्ष 2026 के अंत तक 75 लाख परिवारों तक पहुँचने के सरकार के लक्ष्य के सामने आपूर्ति शृंखला से संबंधित एक बड़ी बाधा मौजूद है।
- यह स्थिति घरेलू सामग्री आवश्यकता (Domestic Content Requirement-DCR) अनिवार्यता से जुड़े सौर पैनलों की बढ़ती लागत और उनकी सीमित उपलब्धता के कारण उत्पन्न हुई है।
प्रधानमंत्री सूर्य घर अनिवार्यता एवं आपूर्ति अंतर के बारे में (UPSC CSE Prelims 2025)
- यह भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक रूफटॉप सौर योजना है, जिसका उद्देश्य आवासीय परिवारों में सौर ऊर्जा प्रणालियों की स्थापना को बढ़ावा देना है।
- इस योजना के उद्देश्य हैं:
- घरों में रूफटॉप सौर पैनलों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता (सब्सिडी) प्रदान करना।
- 1 करोड़ परिवारों को अपनी स्वच्छ बिजली स्वयं उत्पन्न करने में सक्षम बनाना।
- सौर ऊर्जा उत्पादन तथा बिजली बिलों में कमी के माध्यम से परिवारों को प्रति माह 300 यूनिट तक निःशुल्क बिजली के समतुल्य लाभ उपलब्ध कराना।
- नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने को बढ़ावा देना तथा बिजली के पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता को कम करना।

- योजना की अनिवार्यता: प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के ढाँचे के अंतर्गत केंद्रीय सरकारी सब्सिडी प्राप्त करने के लिए DCR-अनुपालक सौर पैनलों का उपयोग करना अनिवार्य है।
- घरेलू सामग्री आवश्यकता (Domestic Content Requirement – DCR) के बारे में: घरेलू सामग्री आवश्यकता यह निर्धारित करती है कि स्थापित किए जाने वाले सौर पैनल देश में निर्मित सौर सेल का उपयोग करके बनाए गए हों। सौर सेल वे मुख्य अर्द्धचालक घटक होते हैं, जो सूर्य के प्रकाश को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं।
- जून 2026 की नीतिगत पहल: 1 जून, 2026 से प्रभावी, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (भारत सरकार) ने पात्र सौर परियोजनाओं के लिए मॉडल और निर्माताओं की स्वीकृत सूची (Approved List of Models and Manufacturers – ALMM) की सूची-II में शामिल सौर सेल के उपयोग को अनिवार्य कर दिया है।
- उद्देश्य: आयातित सौर फोटोवोल्टिक सेल पर निर्भरता को कम करना तथा घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना।
- हालाँकि, प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत वे रूफटॉप सौर उपभोक्ता, जो ‘गिव इट अप’ विकल्प के तहत स्वेच्छा से केंद्रीय वित्तीय सहायता (Central Financial Assistance – CFA) का त्याग करते हैं, उन्हें 31 मार्च, 2027 तक इस अनिवार्यता से छूट प्रदान की गई है।
- संरचनात्मक कमी: इस नीतिगत विस्तार ने सौर पैनल असेंबली और सौर सेल के मूल विनिर्माण के मध्य भारत की औद्योगिक असंगति को उजागर कर दिया है।
- सौर मॉड्यूल (पैनल) असेंबली क्षमता: लगभग 60–65 गीगावाट (GW) प्रति वर्ष।
- सौर सेल विनिर्माण क्षमता: केवल लगभग 30 गीगावाट (GW) प्रति वर्ष।
- कमी: चूँकि सौर सेल उत्पादन क्षमता, मॉड्यूल उत्पादन क्षमता की आधी से भी कम है, इसलिए भारत का हरित ऊर्जा क्षेत्र इस अंतर को भरने के लिए ऐतिहासिक रूप से आयातित सौर सेल पर काफी सीमा तक निर्भर रहा है।
सौर परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रभाव
- परियोजना में देरी: उत्तर प्रदेश, हरियाणा और ओडिशा जैसे राज्यों में जमीनी स्तर पर विक्रेता गंभीर रूप से आपूर्ति की कमी की रिपोर्ट कर रहे हैं। प्रमुख घरेलू निर्माता अपनी अधिकतम उत्पादन क्षमता पर कार्य कर रहे हैं, जिसके कारण सौर पैनलों की खरीद के लिए 25–30 दिनों की प्रतीक्षा अवधि उत्पन्न हो गई है।
- मूल्य वृद्धि: स्थानीय स्रोतों से खरीद की अनिवार्यता को अचानक वाणिज्यिक और औद्योगिक परियोजनाओं तक विस्तारित करने से माँग में तीव्र वृद्धि हुई, जिसके परिणामस्वरूप DCR-अनुपालक मॉड्यूलों की कीमतों में उल्लेखनीय बढोतरी हुई है।
- उपभोक्ता अनिश्चितता: आपूर्ति संकट के कारण उन आवासीय उपभोक्ताओं के मध्य अनिश्चितता बढ़ने का जोखिम है, जिन्हें पहले ही परियोजना स्वीकृति मिल चुकी है या जिन्होंने अग्रिम भुगतान कर दिया है।
स्थानीय सौर सेल अनिवार्यता का महत्त्व
- आयात निर्भरता में कमी: DCR नीति का दीर्घकालिक उद्देश्य भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को बाहरी आपूर्ति झटकों तथा प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं पर अत्यधिक आयात निर्भरता से सुरक्षित बनाना है।
- घरेलू पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाना: सुनिश्चित घरेलू बाजार उपलब्ध कराकर यह नीति भारत में उच्च-प्रौद्योगिकी सौर सेल निर्माण संयंत्रों की स्थापना हेतु बड़े पैमाने पर निजी निवेश को प्रोत्साहित करती है।
- आत्मनिर्भर भारत के अनुरूप: यह अनिवार्यता सुनिश्चित करती है कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत वितरित की जा रही विशाल राजकोषीय सब्सिडियाँ विदेशों में जाने के बजाय सीधे घरेलू विनिर्माण, रोजगार सृजन और औद्योगिक GDP वृद्धि को बढ़ावा देना।
चिंताएँ और कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियाँ
- लक्ष्य प्राप्ति का जोखिम: भारत प्रतिवर्ष लगभग 45 गीगावाट (GW) सौर क्षमता जोड़ रहा है, ऐसे में केवल 30 गीगावाट की सीमित घरेलू सौर सेल आपूर्ति शृंखला एक तात्कालिक अवरोध उत्पन्न करती है, जो वर्षांत तक सरकार के आवासीय लक्ष्यों की प्राप्ति को खतरे में डाल सकती है।
- स्थापकों के लिए लागत वृद्धि: छोटे और मध्यम वितरित नवीकरणीय ऊर्जा (Distributed Renewable Energy – DRE) विक्रेता सीमित लाभ मार्जिन पर कार्य करते हैं; इनपुट लागतों में अचानक वृद्धि उनकी व्यावसायिक व्यवहार्यता को प्रभावित करती है और रूफटॉप सौर ऊर्जा के प्रसार को धीमा कर देती है।
- गुणवत्ता और विस्तार क्षमता का संतुलन: घरेलू विनिर्माण इकाइयों के पूर्ण रूप से परिपक्व होने से पहले अचानक घरेलू स्रोतों पर निर्भरता बढ़ाने से अल्पकाल में लागत प्रतिस्पर्द्धात्मकता और प्रौद्योगिकी विस्तार के संदर्भ में समझौते की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
| सौर सेल (Solar Cells) और सौर मॉड्यूल (Solar Modules) के बीच अंतर |
| विशेषता |
सौर सेल |
सौर मॉड्यूल / पैनल |
| क्या है? |
फोटोवोल्टिक प्रभाव के माध्यम से प्रकाश को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करने वाली मूल अर्द्धचालक इकाई (आमतौर पर सिलिकॉन से निर्मित)। |
कई परस्पर जुड़े सौर सेल्स के नेटवर्क से निर्मित एक संयोजित संरचनात्मक ढाँचा। |
| विनिर्माण जटिलता |
अत्यधिक पूँजी-गहन; इसके लिए उन्नत क्लीनरूम प्रौद्योगिकियों तथा रासायनिक प्रसंस्करण लाइनों की आवश्यकता होती है। |
मुख्यतः इसमें सेल्स का असेंबली, सोल्डरिंग, एनकैप्सुलेशन तथा उन्हें मौसम-रोधी (weatherproof) संरचना में फ्रेम करना शामिल होता है। |
| भारत की स्थिति |
संरचनात्मक कमी (लगभग 30 GW क्षमता) का सामना कर रहा है, जिसके कारण ऐतिहासिक रूप से आयात पर उच्च निर्भरता रही है। |
उच्च आत्मनिर्भर क्षमता (लगभग 60–65 GW), जो घरेलू मॉड्यूल असेंबली की माँग को पूरा करने में सक्षम है। |
आगे की राह
- क्षमता विस्तार में तेजी लाना: नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) को घरेलू निर्माताओं के साथ मिलकर कार्य करना चाहिए, ताकि आगामी सौर पीवी सेल उत्पादन इकाइयों को निर्धारित समय से पूर्व चालू किया जा सके और माँग-आपूर्ति के मध्य उत्पन्न असंतुलन को कम किया जा सके।
- गतिशील मूल्य निगरानी: REC लिमिटेड और NISE के नेतृत्व में संयुक्त निगरानी प्रणाली को इस संक्रमणकालीन दबाव के दौरान, घरेलू सेल आपूर्तिकर्ताओं द्वारा की जाने वाली जमाखोरी या प्रीडेटरी प्राइसिंग (Predatory Pricing) पर सक्रिय रूप से अंकुश लगाना चाहिए।
- संतुलित नीतिगत चरणबद्धता: आगामी वितरित सौर परियोजनाओं (जैसे- कृषि पंप और आवासीय रूफटॉप सौर प्रणालियों) के लिए सरकार एक संक्षिप्त, क्रमशः घटती कार्यान्वयन अवधि या चरणबद्ध आयात अनुमति पर विचार कर सकती है, जब तक कि घरेलू सौर सेल उत्पादन क्षमता 50 गीगावाट (GW) की महत्त्वपूर्ण सीमा को पार न कर जाए।