भारतीय नाविकों का संरक्षण

15 Jun 2026

संदर्भ

हाल ही में फारस की खाड़ी में स्थिति उस समय गंभीर हो गई, जब अमेरिकी मिसाइल हमलों में भारतीय चालक दल वाले तीन व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया।

संबंधित तथ्य

  • जून 2026 में मरिवेक्स (Marivex), सेटेबेलो (Settebello) और जलवीर (Jalveer) नामक तीन व्यापारी जहाजों पर अमेरिकी बलों द्वारा हमले किए गए।
  • इस घटना में सेटेबेलो जहाज पर तीन भारतीय नाविकों की मृत्यु हो गई, जबकि अन्य जहाजों के इंजन कक्ष और स्टीयरिंग सिस्टम को गंभीर क्षति पहुँची, जिससे वे समुद्र में ही अवरुद्ध हो गए।
  • अमेरिका ने इन हमलों को यह कहकर उचित ठहराया कि ये जहाज प्रतिबंधों (Sanctions) का उल्लंघन कर रहे थे और ईरानी तेल के परिवहन में संलग्न थे। वहीं जहाज संचालकों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनका ईरानी तेल से कोई संबंध नहीं था।
  • इस घटना ने संघर्ष-प्रवण समुद्री क्षेत्रों में भारतीय नाविकों की संवेदनशीलता को उजागर किया तथा ‘फ्लैग्स ऑफ कंवीनिएंस’ (FOCS) के अंतर्गत संचालित जहाजों पर उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पुनः उत्पन्न की।

‘फ्लैग्स ऑफ कन्वीनिएंस’ (FOCs)

  • ‘फ्लैग्स ऑफ कन्वीनिएंस’ (FOCs) उस प्रथा को संदर्भित करता है, जिसमें जहाज को उसके वास्तविक मालिक की राष्ट्रीयता से भिन्न किसी अन्य देश में पंजीकृत किया जाता है, ताकि सरल विनियम कम कर, तथा परिचालन लागत का लाभ लिया जा सके।
  • प्रमुख FOC देश: पनामा, लाइबेरिया और मार्शल आइलैंड्स जैसे देश प्रमुख FOC रजिस्ट्रियों के रूप में जाने जाते हैं, जहाँ बड़ी संख्या में विदेशी-स्वामित्व वाले जहाज पंजीकृत होते हैं।
  • लाभ: FOCs वैश्विक समुद्री व्यापार में परिचालन संबंधी अनुकूलन प्रदान करते हैं तथा अनुपालन लागत को कम करते हैं, जिसके कारण ये अंतरराष्ट्रीय शिपिंग उद्योग में अत्यंत लोकप्रिय हैं।
  • चिंताएँ: FOCs के कारण उत्तरदायित्व और निगरानी से जुड़ी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न होती हैं, क्योंकि ‘फ्लैग स्टेट’ (Flag State) के पास सुरक्षा मानकों, श्रम कानूनों और पर्यावरणीय अनुपालन की प्रभावी निगरानी करने की सीमित क्षमता हो सकती है।

भारत की समुद्री सुरक्षा पहल

  • ऑपरेशन संकल्प: यह भारतीय नौसेना द्वारा शुरू की गई एक सतत् समुद्री सुरक्षा पहल है, जो फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में संचालित होती है। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव के मध्य भारतीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना और समुद्री व्यापार की सुरक्षा करना है।
  • सूचना संलयन केंद्र – हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR): वर्ष 2018 में गुरुग्राम में स्थापित यह केंद्र भारतीय नौसेना द्वारा संचालित है। इसका उद्देश्य समुद्री क्षेत्र जागरूकता को बढ़ाना तथा मित्र देशों एवं समुद्री एजेंसियों के साथ वास्तविक समय में सूचना साझा करना है।
  • सागर (SAGAR): यह भारत का समुद्री दृष्टिकोण है, जिसका लक्ष्य हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में सुरक्षित, संरक्षित और स्थिर समुद्री वातावरण सुनिश्चित करना है। इसके अंतर्गत सहयोग, क्षमता निर्माण और सामूहिक सुरक्षा पर बल दिया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय विधिक ढाँचा

  • अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO): यह संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी है, जो वैश्विक शिपिंग सुरक्षा, समुद्री नियमों और मानकों को नियंत्रित करती है, लेकिन इसके पास प्रवर्तन शक्तियाँ सीमित होती हैं।
  • समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCLOS): यह अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्रों में नौवहन, समुद्री अधिकारों और मार्गों (जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य) को नियंत्रित करने वाला कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।

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