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AI पर संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल की प्रारंभिक रिपोर्ट

3 Jul 2026

संदर्भ 

संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल की प्रारंभिक रिपोर्ट में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की परिवर्तनकारी क्षमता को रेखांकित किया गया है, साथ ही वैश्विक उत्तर तथा वैश्विक दक्षिण के बीच बढ़ती असमानताओं तथा नियामकीय कमियों के प्रति भी चेतावनी दी गई है।

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प्रमुख चिंताएँ

  • डिजिटल असमानता: कंप्यूटिंग क्षमता, डेटा, प्रतिभा एवं पूँजी तक असमान पहुँच वैश्विक तकनीकी एवं आर्थिक असमानताओं को और बढ़ा सकती है।
  • बाजार का संकेंद्रण: कुछ चुनिंदा प्रौद्योगिकी कंपनियों का प्रभुत्व प्रतिस्पर्द्धा, नवाचार तथा AI तक समान पहुँच को सीमित कर सकता है।
  • डीपफेक एवं भ्रामक सूचना: AI-जनित सामग्री निर्वाचन की शुचिता, जनविश्वास एवं लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए गंभीर चुनौती उत्पन्न कर सकती है।
  • साइबर सुरक्षा जोखिम: उन्नत AI का दुरुपयोग परिष्कृत साइबर हमलों, स्वचालित हैकिंग तथा महत्त्वपूर्ण अवसंरचना को बाधित करने के लिए किया जा सकता है।
  • नैतिक चुनौतियाँ: AI प्रणालियाँ एल्गोरिद्मिक पक्षपात, भेदभाव, गोपनीयता के उल्लंघन तथा स्वचालित निर्णय-निर्माण में पारदर्शिता के अभाव को बढ़ावा दे सकती हैं।
  • आर्थिक व्यवधान: AI को तेजी से अपनाने से श्रम बाजार में व्यापक परिवर्तन, रोजगार विस्थापन तथा प्रणालीगत वित्तीय जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल के बारे में

  • इसका गठन संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर संयुक्त राष्ट्र के उच्च-स्तरीय सलाहकार निकाय की अनुशंसाओं के आधार पर किया गया, ताकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर स्वतंत्र एवं विज्ञान-आधारित आकलन उपलब्ध कराए जा सकें।
  • उद्देश्य: AI के वैज्ञानिक, आर्थिक, सामाजिक, नैतिक एवं पर्यावरणीय प्रभावों का मूल्यांकन करना तथा साक्ष्य-आधारित वैश्विक AI शासन को समर्थन प्रदान करना।
  • प्रकृति: यह एक स्वतंत्र, बहुविषयक विशेषज्ञ निकाय है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ एवं नीति विशेषज्ञ शामिल हैं।

भारत के समक्ष चुनौतियाँ

  • सीमित कंप्यूट अवसंरचना: भारत में अभी भी उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC) क्षमता, उन्नत GPU तथा अर्द्धचालक विनिर्माण की कमी है, जिससे अग्रणी AI मॉडलों के विकास में बाधा आती है।
    • उदाहरण: इंडियाAI कंप्यूट फैसिलिटी (IndiaAI Compute Facility) की शुरुआत इस बात को दर्शाती है कि सरकार ने देश में कंप्यूट क्षमता की कमी तथा सुलभ GPU उपलब्धता की आवश्यकता को स्वीकार किया है।
  • विदेशी मॉडलों पर निर्भरता: वैश्विक AI कंपनियों, विदेशी फाउंडेशन मॉडलों तथा आयातित AI चिप्स [जैसे- एनवीडिया (NVIDIA) GPU] पर अत्यधिक निर्भरता रणनीतिक स्वायत्तता, प्रौद्योगिकीय निर्भरता एवं डेटा संप्रभुता से संबंधित चिंताएँ उत्पन्न करती है।
    • उदाहरण: भारत में व्यापक रूप से उपयोग होने वाली अधिकांश जनरेटिव AI प्रणालियाँ—जैसे ओपनAI (OpenAI), गूगल (Google) एवं एन्थ्रोपिक (Anthropic) के मॉडल विदेशों में विकसित किए गए हैं।
  • नियामकीय तैयारी: भारत का AI शासन ढाँचा अभी भी उत्तरदायित्व, दायित्व, गोपनीयता, एल्गोरिद्मिक पारदर्शिता, पक्षपात, कॉपीराइट तथा AI-जनित भ्रामक सूचना जैसे मुद्दों से निपटने के लिए विकसित हो रहा है।
    • उदाहरण: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल की संयुक्त राष्ट्र की प्रारंभिक रिपोर्ट (2026) ने AI शासन को मजबूत करने तथा वैश्विक दक्षिण की अधिक भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे भारत के विकसित हो रहे नीति ढाँचे के महत्त्व की पुष्टि होती है।
  • कौशल अंतराल: AI शोधकर्ताओं, इंजीनियरों, डेटा वैज्ञानिकों एवं AI नैतिकता विशेषज्ञों की माँग उपलब्धता से अधिक बनी हुई है, जिसके लिए AI शिक्षा, पुनः कौशल विकास (Reskilling) तथा उन्नत अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र में अधिक निवेश की आवश्यकता है।
    • उदाहरण: इंडियाAI मिशन (IndiaAI Mission) के फ्यूचरस्किल्स (FutureSkills) घटक की शुरुआत AI शिक्षा का विस्तार करने तथा अधिक संख्या में कुशल AI पेशेवरों को तैयार करने के लिए की गई है।
  • डेटा की गुणवत्ता एवं भाषायी विविधता: AI प्रणालियों को उच्च गुणवत्ता, प्रतिनिधिक एवं बहुभाषी डेटासेट की आवश्यकता होती है, किंतु अनेक भारतीय भाषाएँ अभी भी पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्व नहीं करतीं, जिससे मॉडलों की सटीकता एवं समावेशिता प्रभावित होती है।
    • उदाहरण: भारतजेन मिशन (BharatGen Mission) इस कमी को दूर करने के लिए भारतीय भाषाओं एवं भारतीय संदर्भों के अनुरूप स्वदेशी बहुभाषी फाउंडेशन मॉडल विकसित करने का प्रयास कर रहा है।
  • ऊर्जा एवं पर्यावरणीय लागत: बड़े AI मॉडलों के प्रशिक्षण एवं संचालन के लिए पर्याप्त विद्युत, शीतलन अवसंरचना तथा जल संसाधनों की आवश्यकता होती है, जिससे स्थिरता (Sustainability) संबंधी चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं।
    • उदाहरण: इंडियाAI मिशन के अंतर्गत AI डेटा केंद्रों के विस्तार के साथ नवीकरणीय ऊर्जा एवं संसाधन दक्षता के मध्य संतुलन स्थापित करना एक उभरती हुई नीतिगत प्राथमिकता बन गया है।

भारत की AI संबंधी पहलें

  • इंडियाएआई मिशन: कंप्यूटिंग अवसंरचना, उच्च-गुणवत्ता वाले डेटासेट, AI स्टार्ट-अप्स, अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास तथा विभिन्न क्षेत्रों में AI के उपयोग को समर्थन देकर एक सुदृढ़ AI पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण हेतु प्रमुख पहल।
  • इंडियाएआई कंप्यूट फैसिलिटी (IndiaAI Compute Facility): शोधकर्ताओं, स्टार्ट-अप्स, शैक्षणिक संस्थानों एवं सार्वजनिक संस्थाओं को उच्च-प्रदर्शन GPU कंप्यूटिंग अवसंरचना उपलब्ध कराकर महँगे निजी कंप्यूटिंग संसाधनों पर निर्भरता कम करती है।
  • डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023: व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा, डेटा प्रसंस्करण के विनियमन, उपयोगकर्ता की सहमति सुनिश्चित करने तथा डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करने हेतु अधिकार-आधारित विधिक ढाँचा प्रदान करता है।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए राष्ट्रीय रणनीति – #AIforAll: उत्तरदायी, समावेशी एवं नैतिक AI के उपयोग के लिए एक रोडमैप प्रदान करती है, जिसमें स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, स्मार्ट गतिशीलता एवं सुशासन को प्राथमिकता दी गई है।
  • भारतजेन मिशन (BharatGen Mission): स्वदेशी ‘मल्टी लैंग्वेज फाउंडेशन मॉडल’ एवं जनरेटिव AI के विकास को प्रोत्साहित करता है, जिससे भारतीय भाषाओं, संस्कृति एवं स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप AI समाधान विकसित किए जा सकें।

वैश्विक AI शासन संबंधी पहलें

  • संयुक्त राष्ट्र: सतत् विकास को बढ़ावा देने तथा सुरक्षा, असमानता एवं मानवाधिकारों से जुड़े जोखिमों का समाधान सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक, समावेशी एवं मानव-केंद्रित AI शासन ढाँचे को प्रोत्साहित करता है।
  • ग्लोबल डिजिटल कॉम्पैक्ट (Global Digital Compact): डिजिटल प्रौद्योगिकियों, AI शासन, डेटा शासन, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना तथा वैश्विक डिजिटल विभाजन को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है।
  • AI संबंधी नैतिकता पर यूनेस्को की सिफारिश (UNESCO Recommendation on the Ethics of AI): AI के लिए पहला वैश्विक मानकात्मक ढाँचा प्रदान करती है, जिसमें पारदर्शिता, निष्पक्षता, उत्तरदायित्व, गोपनीयता, मानवाधिकार एवं पर्यावरणीय स्थिरता पर विशेष बल दिया गया है।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर वैश्विक साझेदारी (GPAI): एक बहु-हितधारक पहल है, जो उत्तरदायी AI विकास, नीति अनुसंधान तथा विश्वसनीय AI के व्यावहारिक क्रियान्वयन के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करती है।

आगे की राह

  • स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाना: कंप्यूटिंग अवसंरचना, फाउंडेशन मॉडल, अर्द्धचालक विनिर्माण तथा AI अनुसंधान तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुसंधान में निवेश का विस्तार किया जाए।
  • सुदृढ़ कृत्रिम बुद्धिमत्ता विनियमन विकसित करना: जोखिम-आधारित नियामकीय ढाँचा विकसित किया जाए, जो नवाचार एवं सुरक्षा, उत्तरदायित्व तथा नैतिक सुरक्षा उपायों के बीच संतुलन स्थापित करे।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना: समावेशी वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन का समर्थन किया जाए, जो विकासशील देशों के हितों को समुचित रूप से प्रतिबिंबित करे।
  • मानव पूँजी का विकास: भविष्य की कार्यबल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा, डिजिटल कौशल तथा अंतरविषयक अनुसंधान का विस्तार किया जाए।
  • उत्तरदायी कृत्रिम बुद्धिमत्ता सुनिश्चित करना: निष्पक्षता, पारदर्शिता, गोपनीयता, उत्तरदायित्व तथा मानवीय निगरानी के सिद्धांतों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग में अपनाया जाए।

निष्कर्ष

कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वैज्ञानिक प्रगति एवं आर्थिक विकास के लिए अभूतपूर्व अवसर प्रदान करती है, किंतु इसके लाभों का समान एवं समावेशी वितरण सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ बनाना, समावेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन को बढ़ावा देना तथा स्वदेशी क्षमताओं में निवेश करना यह सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य होगा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानवता के हित में कार्य करे तथा प्रौद्योगिकीय, आर्थिक एवं नैतिक जोखिमों को न्यूनतम किया जा सके।

AI पर संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल की प्रारंभिक रिपोर्ट

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